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मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने शिलॉन्ग हादसे के पीड़ितों के लिए अनुग्रह राशि जारी होने की पुष्टि कीमेघालय
27 अग॰ 2026, 3:01 pm (35 दिन पहले)· 2

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने शिलॉन्ग हादसे के पीड़ितों के लिए अनुग्रह राशि जारी होने की पुष्टि की

विधानसभा में वीपीपी अध्यक्ष अर्देंट बसायावमोइत के सवाल पर मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने कहा कि शिलॉन्ग कार्यस्थल हादसे में जान गंवाने वाले 5 लोगों के परिवारों को विशेष अनुदान से सहायता दी जा चुकी है।

मेघालय विधानसभा के भीतर शिलॉन्ग में हुए एक दर्दनाक कार्यस्थल हादसे में मारे गए पांच लोगों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर जोरदार चर्चा देखने को मिली। वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी (VPP) के अध्यक्ष और नोंगक्रेम से विधायक अर्देंट बसायावमोइत ने विधानसभा के शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया और राज्य सरकार पर पीड़ितों के परिजनों को अनुग्रह राशि न देने का आरोप लगाया। इस मामले पर स्थिति साफ करते हुए राज्य के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने विपक्ष के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया और सदन को जानकारी दी कि पीड़ित परिवारों को वित्तीय सहायता पहले ही दी जा चुकी है।

विशेष अनुदान कोष से जारी की गई सहायता राशि

विधानसभा में शून्यकाल नोटिस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा ने कहा कि सरकार ने प्रभावित परिवारों को मदद पहुंचाने में कोई ढिलाई नहीं बरती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहायता राशि राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष (SDMF) के जरिए न देकर मुख्यमंत्री विशेष अनुदान (CMSG) से जारी की गई है। मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि अनुग्रह राशि न दिए जाने का दावा पूरी तरह से गलत और निराधार है। सरकार ने परिस्थितियों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए तुरंत आवश्यक वित्तीय सहायता स्वीकृत कर दी थी।

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आपदा कोष और विशेष अनुदान के नियमों में अंतर

मुख्यमंत्री संगमा ने दो अलग-अलग सरकारी फंडों के बीच के तकनीकी अंतर को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि राज्य आपदा न्यूनीकरण कोष का उपयोग केवल प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ही किया जा सकता है, जो राज्य आपदा मोचन बल के तय मानकों और रूपरेखा के अंतर्गत आती हैं। कार्यस्थल पर होने वाले हादसे प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में नहीं आते हैं, इसलिए इस मामले में एसडीएमएफ लागू नहीं होता था। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री विशेष अनुदान के तहत मुख्यमंत्री को यह विवेकाधीन अधिकार प्राप्त होता है कि वे किसी विशेष परिस्थिति या व्यक्तिगत मामले की गंभीरता को देखते हुए सीधी वित्तीय सहायता स्वीकृत कर सकें।

बिना प्रचार और कम प्रोफाइल रखने की सरकारी नीति

सहायता राशि दिए जाने के बावजूद पैदा हुए भ्रम पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस वित्तीय मदद का सार्वजनिक प्रचार न करने का सचेत फैसला लिया था। सरकार का मानना है कि काम ज्यादा करना चाहिए और बातें कम करनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीड़ित परिवारों को बिना कोई हंगामा किए, बिना सार्वजनिक घोषणा किए और बिना किसी सोशल मीडिया रील के सहायता पहुंचाई गई है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि हादसों के बाद विशेष अनुदान से मदद देने की प्रक्रिया को सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाने से बचना चाहिए, ताकि भविष्य में हर दुर्घटना के बाद इस कोष से स्वतः मुआवजे की उम्मीद न बांधी जाने लगे।

विपक्षी विधायक का रुख और मीडिया रिपोर्ट की बात

मुख्यमंत्री के जवाब के बाद वीपीपी नेता अर्देंट बसायावमोइत ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा मीडिया में आई खबरों को देखने के बाद उठाया गया था और उनका मकसद कोई राजनीतिक पब्लिसिटी हासिल करना नहीं था। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने के नाते समाचारों में सामने आए जनहित के मुद्दों को विधानसभा में उठाना उनका कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष केवल बातें करने और काम न करने की मंशा से काम नहीं करता, बल्कि जनता से जुड़े सवालों का समाधान चाहता है।

सवाल-जवाब

शिलॉन्ग हादसे में कितने लोगों की मौत हुई थी?
शिलॉन्ग में हुए कार्यस्थल हादसे में कुल 5 लोगों की जान चली गई थी।
मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने अनुग्रह राशि पर क्या सफाई दी?
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सभी पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री विशेष अनुदान (CMSG) से सहायता राशि जारी की जा चुकी है।
हादसे के पीड़ितों को एसडीएमएफ (SDMF) से मदद क्यों नहीं मिली?
एसडीएमएफ केवल प्राकृतिक आपदाओं को कवर करता है, इसलिए कार्यस्थल दुर्घटना के पीड़ितों को मुख्यमंत्री विशेष अनुदान से सहायता दी गई।
विधानसभा में यह मुद्दा किसने उठाया था?
वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी (VPP) के अध्यक्ष और नोंगक्रेम के विधायक अर्देंट बसायावमोइत ने शून्यकाल नोटिस के माध्यम से यह मुद्दा उठाया था।
सरकार ने अनुग्रह राशि का सार्वजनिक प्रचार क्यों नहीं किया?
सरकार का कहना है कि वे बातें कम और काम ज्यादा करने के सिद्धांत पर चलते हैं और सहायता देने का प्रचार कर गलत परंपरा शुरू नहीं करना चाहते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 दिन पहले

यह मामला विधि और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच के उस महीन अंतर को उजागर करता है, जहाँ जनभावना और विधिक नियमों का टकराव होता है। शिलॉन्ग कार्यस्थल हादसे पर मुख्यमंत्री का यह स्पष्टीकरण कि सहायता राशि आपदा कोष से न देकर विशेष अनुदान से दी गई, कानूनी और प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। हालांकि, सरकार की 'कम प्रचार' वाली नीति ने पारदर्शिता और सूचना के अधिकार के बीच एक विधिक बहस को जन्म दे दिया है, जिससे भविष्य में ऐसी आपदाओं के दौरान त्वरित आधिकारिक संवाद की आवश्यकता और बढ़ जाती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे कार्यकारी विवेक और विधायी नियमों का संतुलन राजनीतिक संवाद में अहम भूमिका निभाता है। मुख्यमंत्री का यह तर्क कि कार्यस्थल की दुर्घटनाएँ प्राकृतिक आपदा कोष के दायरे में नहीं आतीं, प्रशासनिक रूप से सही है, लेकिन विशेष अनुदान के प्रयोग को सार्वजनिक न करने की नीति ने विपक्ष को सवाल उठाने का मौका दे दिया। भविष्य में इस तरह के मामलों पर शुरुआती दौर में ही स्पष्ट आधिकारिक सूचना जारी करना शासन की पारदर्शिता और विश्वास दोनों के लिए बेहतर होगा।

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