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मिजोरम में नशे से जंग तेज, 48 पुनर्वास केंद्रों में 5000 से ज्यादा लोगों का इलाज जारीमिजोरम
31 अग॰ 2026, 1:58 pm (31 दिन पहले)· 2

मिजोरम में नशे से जंग तेज, 48 पुनर्वास केंद्रों में 5000 से ज्यादा लोगों का इलाज जारी

मिजोरम में मादक पदार्थों की लत से जूझ रहे लोगों के लिए 48 पुनर्वास केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 5,224 लोग इलाज ले रहे हैं। राज्य सरकार ने इन केंद्रों की मदद के लिए 42 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी है।

आइजोल: मिजोरम में मादक पदार्थों की लत के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के तहत वर्तमान में कुल 48 केंद्र और होम संचालित किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इन सुविधाओं के माध्यम से इस समय 5,224 लोग ड्रग्स की लत से उबरने के लिए उपचार, देखभाल और पुनर्वास सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। राज्य सरकार इन संस्थानों के कामकाज को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

वित्तीय सहायता और सरकारी सहयोग

नशे के खिलाफ इस लड़ाई को मजबूत करने के वास्ते राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के दौरान इन सभी सुविधाओं को 42 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस आर्थिक मदद का उद्देश्य पुनर्वास केंद्रों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना और वहां आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना है ताकि वे सामान्य जीवन की तरफ लौट सकें।

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हुलह्लियाप डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर की भूमिका

इसके अलावा, मिजोरम में हुलह्लियाप नाम से एक विशेष अल्पकालिक डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर भी स्थापित किया गया है, जहां अब तक 2,255 लोग अपना इलाज करा चुके हैं। पिछले साल जून में इस केंद्र के शुरू होने के बाद से यहां कुल नौ बैचों ने अपना निर्धारित कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया है। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने इन नौ बैचों के संचालन पर अब तक 3.86 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। इसके साथ ही, इस केंद्र को अन्य स्रोतों से 1.34 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्राप्त हुई है।

क्षमता और उपचार की प्रक्रिया

यह विशेष डिटॉक्सिफिकेशन केंद्र एक बार में लगभग 200 मरीजों को ठहराने की क्षमता रखता है। केंद्र में आने वाले लोगों को शुरुआत के 15 दिनों तक डॉक्टरों, नर्सों और काउंसलर की देखरेख में डिटॉक्सिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके बाद उन्हें विशेष आध्यात्मिक काउंसलिंग दी जाती है ताकि उनकी मानसिक स्थिति मजबूत हो सके।

आगे की प्रक्रिया और पुनर्वास

हुलह्लियाप केंद्र में निर्धारित कार्यक्रम पूरा होने के बाद मरीजों को या तो उनके परिजनों को सौंप दिया जाता है या फिर आगे की देखभाल और सहायता के लिए अन्य पुनर्वास केंद्रों में भेज दिया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए लगातार नए कदम उठा रही है ताकि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाला जा सके।

सवाल-जवाब

मिजोरम में वर्तमान में कुल कितने पुनर्वास केंद्र संचालित हो रहे हैं?
मिजोरम में इस समय कुल 48 केंद्र और होम संचालित हो रहे हैं जो नशा पीड़ितों को सेवाएं दे रहे हैं।
इन केंद्रों में कुल कितने लोग इलाज करा रहे हैं?
इन 48 केंद्रों में कुल 5,224 लोग अपनी मादक पदार्थों की लत का इलाज करवा रहे हैं।
राज्य सरकार ने इस साल कितनी वित्तीय सहायता दी है?
राज्य सरकार ने चालू वर्ष के दौरान इन पुनर्वास सुविधाओं को 42 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी है।
हुलह्लियाप केंद्र क्या है और यहां कितने लोग इलाज करा चुके हैं?
हुलह्लियाप एक अल्पकालिक डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर है, जहां अब तक 2,255 लोग उपचार करा चुके हैं।
हुलह्लियाप केंद्र के संचालन पर सरकार ने अब तक कितना खर्च किया है?
सरकार ने हुलह्लियाप केंद्र में संचालित नौ बैचों पर 3.86 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है।
हुलह्लियाप केंद्र की एक बार में कितने मरीजों को रखने की क्षमता है?
यह केंद्र एक समय में लगभग 200 इनमेट्स या मरीजों को समायोजित कर सकता है।
इलाज के दौरान शुरुआती 15 दिनों में मरीजों को क्या दिया जाता है?
शुरुआती 15 दिनों तक मरीजों को डॉक्टरों, नर्सों और काउंसलरों की निगरानी में डिटॉक्सिफिकेशन उपचार दिया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·30 दिन पहले

यह खबर दर्शाती है कि मिजोरम में मादक पदार्थों की लत से निपटने के लिए संस्थागत प्रयास तेजी से हो रहे हैं। 48 केंद्रों में 5,000 से अधिक लोगों का इलाज और विशेष रूप से हुलह्लियाप डिटॉक्सिफिकेशन सेंटर पर 3.86 करोड़ रुपये का खर्च यह साबित करता है कि राज्य का ध्यान केवल दंड पर नहीं, बल्कि चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक पुनर्वास पर भी है। हालांकि, ड्रग्स की समस्या सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी एक गहरी आपराधिक चुनौती है, इसलिए यह देखना होगा कि इन केंद्रों से निकलने वाले लोग मुख्यधारा में टिक पाते हैं या नहीं और क्या ड्रग्स के अवैध नेटवर्क पर भी उतनी ही सख्ती से कानूनी कार्रवाई हो रही है।

Ravikash Gupta@ravikash·30 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह ध्यान देना होगा कि हुलह्लियाप जैसे केंद्रों पर 3.86 करोड़ रुपये से अधिक का भारी निवेश और कुल 48 केंद्रों का संचालन राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य और पुनर्वास को सर्वोच्च स्थान पर रखता है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर चल रहे इन चिकित्सीय अभियानों की दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या पुनर्वास के बाद इन 5,000 से अधिक नागरिकों के लिए रोजगार और आजीविका के स्थायी अवसर सृजित हो पाते हैं, ताकि वे दोबारा आर्थिक तंगी या सामाजिक दबाव के कारण इस दलदल में न लौटें।

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