मूलांक 1 राशिफल 29 अक्टूबर: सूर्य की ऊर्जा से चमकेगा करियर, रचनात्मकता देगी लाभरिपब्लिकन पार्टी की आखिरी हफ्तों में बढ़ी चिंता, मजबूत सीटों पर भी करनी पड़ रही है पैसों की बारिशनागालैंड की मतदाता सूची पर विवाद, 1.57 लाख से अधिक नामों में गड़बड़ी का आरोपराजस्थान के झालावाड़ में दंपति के झगड़े में दखल देना पड़ा महंगा, चचेरे भाइयों पर चाकू से जानलेवा हमलाबिहार विधानपरिषद चुनाव में नीरज कुमार की जीत, अनंत सिंह पर कसा तंजत्रिपुरा में जल्द खुलेगा नया चाय नीलामी केंद्र, मुख्यमंत्री माणिक साहा 29 अक्टूबर को करेंगे शुभारंभमहिला पहलवानों की अपील पर कोर्ट सख्त, बृजभूषण शरण सिंह को जवाब के लिए मिला अंतिम अवसरमहाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव परिणाम: बीजेपी ने जीती पुणे शिक्षक सीट, दो क्षेत्रों में शरद पवार गुट को बढ़तभीलवाड़ा में संपत्ति के लिए 72 वर्षीय कमला देवी की हत्या, शव जलाकर नदी में बहाए अवशेष; दो गिरफ्तारमिजो विरासत को सहेजने के लिए खुला मिजोरम स्टेट म्यूजियम, मंत्री सी. लालसाविवुंगा ने युवाओं से की खास अपील
मुरादाबाद के खेतों में सिंदूर के पेड़ों से लाखों की आमदनी, प्राकृतिक रंग और फूड कलर की मांग ने खोला नया रास्ताउत्तर प्रदेश
7 अक्तू॰ 2026, 9:49 am (22 दिन पहले)· 0

मुरादाबाद के खेतों में सिंदूर के पेड़ों से लाखों की आमदनी, प्राकृतिक रंग और फूड कलर की मांग ने खोला नया रास्ता

मुरादाबाद में किसान सिंदूर के पेड़ लगाकर शानदार मुनाफा कमा रहे हैं, जिसकी पैदावार से प्राकृतिक सिंदूर, फूड कलर और कार्बन क्रेडिट का दोहरा फायदा मिल रहा है।

पारंपरिक फसलों से अलग हटकर नए प्रयोग करने वाले किसानों के लिए सिंदूर की बागवानी एक बेहतरीन और मुनाफेदार विकल्प बनकर उभरी है। मुरादाबाद के ग्रामीण इलाकों में अब सिंदूर के पेड़ लगाकर काश्तकार अपनी आय को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इस पौधे से निकलने वाले बीजों का इस्तेमाल पूरी तरह प्राकृतिक सिंदूर बनाने के साथ-साथ खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले सुरक्षित फूड कलर तैयार करने में किया जाता है। बाजार में प्राकृतिक उत्पादों की जबरदस्त मांग होने के कारण इसकी उपज हाथों-हाथ बिक रही है, जिससे काश्तकारों को कम लागत में शानदार रिटर्न मिल रहा है।

अनुकूल मिट्टी और पौध तैयार करने का सही तरीका

इस बहुवर्षीय पेड़ को तैयार करने के लिए बलुई दोमट मिट्टी को सबसे बेहतर माना जाता है। शुरुआत में इसके बीजों से नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं, जिन्हें बारिश के दिनों में खेतों में रोपा जाता है। इसके अलावा लेयरिंग तकनीक का इस्तेमाल करके भी इसके पौधे तैयार किए जा सकते हैं। कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक मेहंदी रत्ता के अनुसार इस पौधे की एक बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी की उपलब्धता में भी आसानी से पनप जाता है। कम लागत और न्यूनतम देखभाल की बदौलत यह बागवानी किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है।

ये भी पढ़ें

मैदानी इलाकों में रोपाई और उपज की प्रक्रिया

आमतौर पर यह पेड़ पहाड़ी इलाकों में ज्यादा देखने को मिलता रहा है, लेकिन अब मैदानी भागों में भी इसकी खेती पूरी तरह कामयाब साबित हो रही है। किसान चाहें तो अपने पूरे खेत में इसके बाग लगा सकते हैं। चूंकि इसका पेड़ 4 से 5 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचता है, इसलिए कतार से कतार और पौधे से पौधे के बीच 4 मीटर की दूरी रखना जरूरी होता है। रोपाई के लगभग तीन साल बाद पेड़ पर फल आने शुरू हो जाते हैं, जबकि तीसरे से चौथे साल में यह पूरी क्षमता के साथ उपज देने लगता है। इसके फल गुच्छों में लगते हैं, जो एक बार रोपने के बाद लगातार 4 से 5 साल तक फल देते हैं। किसान इन गुच्छों को तोड़कर बीज अलग करते हैं और फिर प्रोसेसिंग के जरिए असली व प्राकृतिक सिंदूर बनाकर बाजार में बेचते हैं।

हरियाली के साथ कार्बन क्रेडिट का अतिरिक्त लाभ

सिंदूर के पेड़ों का सघन रोपण पर्यावरण के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। खेतों में बड़े पैमाने पर इन पेड़ों के लगने से वनीकरण को सीधा बढ़ावा मिलता है। पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम के चलते किसानों को कार्बन क्रेडिट का भी सीधा आर्थिक फायदा मिलने की राह खुली है। वन विभाग के साथ-साथ कई निजी कंपनियां भी काश्तकारों को इस तरह के पेड़ लगाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही हैं।

सवाल-जवाब

सिंदूर के पेड़ की खेती के लिए कौन सी मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सिंदूर के पेड़ की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है।
इस पेड़ को लगाने के कितने समय बाद फल आने शुरू होते हैं?
खेत में लगाने के लगभग तीन साल बाद पेड़ पर फल आने शुरू हो जाते हैं और तीसरे से चौथे साल में अच्छी उपज मिलने लगती है।
सिंदूर के एक पेड़ से कितने वर्षों तक फल प्राप्त किए जा सकते हैं?
एक बार लगाने के बाद यह पेड़ लगातार 4 से 5 साल तक फल देता है।
खेत में पौधे लगाते समय कितनी दूरी रखनी चाहिए?
चूंकि इसका पौधा 4 से 5 मीटर तक बढ़ता है, इसलिए पौधे से पौधे और कतार से कतार के बीच 4 मीटर की दूरी रखनी चाहिए।
सिंदूर के पेड़ से कौन-कौन से उत्पाद बनाए जाते हैं?
इसके फलों के बीजों को प्रोसेस करके प्राकृतिक सिंदूर और सुरक्षित फूड कलर बनाया जाता है।
इसकी खेती से किसानों को पर्यावरण से जुड़ा क्या फायदा मिलता है?
इससे खेतों में वनीकरण बढ़ता है और किसानों को कार्बन क्रेडिट का अतिरिक्त लाभ मिलता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·20 दिन पहले

डॉक्टर दीपक मेहंदी रत्ता ने सही कहा, कम पानी में भी बढ़िया पैदावार मिल जाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·20 दिन पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है पर मैदानी इलाकों में पानी कम लगने की बात पर मुझे थोड़ा शक है। हर जगह मिट्टी एक जैसी नहीं होती।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

मुरादाबाद के किसानों का पारंपरिक खेती से हटकर यह प्रयोग सचमुच नया रास्ता दिखाने वाला है। कम पानी और लागत में अगर प्राकृतिक रंगों के जरिए अच्छी आमदनी हो रही है, तो पश्चिमी यूपी के बाकी जिलों में भी इसे आजमाना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

रोहन भाई, बात तो सही है पर कम पानी वाली बात पर थोड़ा शक है। पश्चिमी यूपी में हर जगह मिट्टी एक जैसी नहीं होती, हो सकता है हर खेत में यह प्रयोग सफल न हो पाए।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp