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नागौर में फसल बीमा योजना के नाम पर ठगी का पर्दाफाश, 4 शातिर चढ़े पांचौड़ी पुलिस के हत्थेराजस्थान
21 अग॰ 2026, 12:17 pm (35 दिन पहले)· 1

नागौर में फसल बीमा योजना के नाम पर ठगी का पर्दाफाश, 4 शातिर चढ़े पांचौड़ी पुलिस के हत्थे

राजस्थान के नागौर जिले की पांचौड़ी पुलिस ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर फर्जी क्लेम उठाने वाले गिरोह के 4 सदस्यों को 3 लाख रुपये नकद और स्कॉर्पियो कार के साथ गिरफ्तार किया है।

राजस्थान के नागौर जिले में किसानों की गाढ़ी कमाई और सरकारी योजनाओं के पैसों पर डाका डालने वाले एक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। पांचौड़ी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह के 4 प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से किसानों के नाम पर तैयार किए गए फर्जी बीमा दस्तावेज, कूटरचित फॉर्म, 3 लाख रुपये की नकद राशि और वारदात में इस्तेमाल की जा रही एक स्कॉर्पियो गाड़ी भी जब्त की है। यह गिरोह सीधे-सादे किसानों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड हासिल कर उनके नाम पर फर्जी क्लेम उठा रहा था।

किस तरह दिया जा रहा था ठगी का अंजाम

पुलिस पड़ताल में इस शातिर गिरोह की पूरी कार्यप्रणाली सामने आई है। आरोपी सबसे पहले ग्रामीण इलाकों के सीधे-सादे किसानों के नाम, पते, आधार कार्ड और जमीन की जमाबंदी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाते थे। इसके बाद किसान को बिना भनक लगे क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के माध्यम से उनकी जमीनों पर फसल बीमा का आवेदन कर दिया जाता था। इस प्रक्रिया में गिरोह के सदस्य किसानों के बैंक खातों की जगह अपने नेटवर्क से जुड़े फर्जी या अन्य लोगों के बैंक खातों का ब्योरा दर्ज करते थे। जैसे ही बीमा कंपनी की तरफ से क्लेम की राशि स्वीकृत होती थी, वह पैसा सीधे गिरोह के सदस्यों के खातों में ट्रांसफर हो जाता था, जिसे आरोपी तुरंत निकाल कर आपस में बांट लेते थे।

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4 लाख 70 हजार रुपये के फर्जीवाड़े से खुला राज

इस पूरे घोटाले का खुलासा दुजासर गांव के रहने वाले राजेश (पुत्र रामलाल जाट) की शिकायत के बाद हुआ। राजेश ने 13 अगस्त को पांचौड़ी पुलिस थाने में एक औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवादी राजेश ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी सुमित्रा के नाम पर दर्ज कृषि भूमि का किसी अज्ञात व्यक्ति ने क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के जरिए फर्जी तरीके से फसल बीमा करवा लिया है। जब राजेश ने इस मामले की गहराई से जानकारी जुटाई तो पता चला कि बीमा आवेदन में उनकी पत्नी के दस्तावेजों और बैंक विवरणों का गलत इस्तेमाल किया गया है। आरोपियों ने फर्जी क्लेम तैयार कर 4 लाख 70 हजार 168 रुपये की भारी-भरकम राशि हड़प ली थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

पुलिस की गिरफ्त में आए 4 शातिर आरोपी

मामले की गंभीरता को देखते हुए नागौर एसपी आशा राम चौधरी के दिशा-निर्देशन में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने साक्ष्यों और तकनीकी विवरणों का विश्लेषण करते हुए गिरोह के 4 सदस्यों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है

  • सियाराम लोयल: पुत्र परसाराम जाट
  • रविन्द्र: पुत्र श्रवणराम जाट
  • तरुण लोयल: पुत्र परसाराम जाट
  • सुखवीर: पुत्र ताजूराम जाट

नागौर एसपी आशा राम चौधरी ने बताया कि आरोपियों के पास से बरामद दस्तावेजों की सघन जांच की जा रही है। जब्त किए गए 3 लाख रुपये नकद और स्कॉर्पियो कार के अलावा पुलिस को कई अन्य जमीनों के कूटरचित फॉर्म भी मिले हैं, जिनसे इस गिरोह के तार और भी कई मामलों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।

10 से 12 अन्य संदिग्धों पर पुलिस की नजर

एसपी आशा राम चौधरी ने खुलासा किया कि इस फर्जीवाड़े में केवल यही 4 लोग शामिल नहीं हैं, बल्कि एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। शुरुआती जांच में करीब 10 से 12 अन्य लोगों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। इसमें सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर काम करने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार स्टाम्प वेंडर, नोटरी, बीमा कंपनी के तहसील कॉर्डिनेटर, जिला कॉर्डिनेटर और स्थानीय एजेंटों की मिलीभगत की गहनता से पड़ताल की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन प्रशासनिक और संस्थागत संपर्कों के बिना इतने बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज तैयार करना और क्लेम पास कराना संभव नहीं था।

पुलिस उपाधीक्षक की देखरेख में चल रही जांच

इस पूरे मामले की तफ्तीश पुलिस उपाधीक्षक जुगाराम और पांचौड़ी थाना अधिकारी के सुपरविजन में की गई। पुलिस टीम ने गहन छानबीन और कागजी सबूतों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रैकिंग कर उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। पांचौड़ी पुलिस थाने में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस हिरासत में आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है, जिससे नागौर और आसपास के इलाकों में फसल बीमा के नाम पर हुई अन्य बड़ी ठगी की घटनाओं का पर्दाफाश होने की पूरी संभावना है।

सवाल-जवाब

नागौर के पांचौड़ी में किस योजना में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है?
नागौर के पांचौड़ी में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर फर्जी तरीके से क्लेम उठाने और ठगी करने का मामला सामने आया है।
पुलिस ने इस मामले में किन चीजों को बरामद किया है?
पुलिस ने आरोपियों के पास से 3 लाख रुपये नकद, फर्जी बीमा दस्तावेज, कूटरचित फॉर्म और एक स्कॉर्पियो कार बरामद की है।
फसल बीमा फर्जीवाड़े में कितने आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं?
पांचौड़ी पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 4 मुख्य आरोपियों (सियाराम लोयल, रविन्द्र, तरुण लोयल और सुखवीर) को गिरफ्तार किया है।
इस ठगी का खुलासा किस शिकायत के बाद हुआ?
दुजासर निवासी राजेश ने 13 अगस्त को अपनी पत्नी सुमित्रा के नाम पर दर्ज खेत का फर्जी फसल बीमा कराकर ₹4,70,168 हड़पने की शिकायत दर्ज कराई थी।
क्या इस गिरोह में अन्य लोग भी शामिल हैं?
पुलिस जांच में 10 से 12 अन्य लोगों की भूमिका सामने आई है, जिनमें स्टाम्प वेंडर, नोटरी, बीमा कंपनी के तहसील और जिला कॉर्डिनेटर व एजेंट शामिल हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·34 दिन पहले

यह मामला डिजिटल कृषि योजनाओं में साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी की भारी कमजोरियों को उजागर करता है। जब तक किसानों के जमीन और बैंक रिकॉर्ड्स की डिजिटल पहुंच के सत्यापन के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण या ओटीपी आधारित कड़े नियम लागू नहीं किए जाते, तब तक ऐसे संगठित गिरोह सरकारी निधियों का दुरुपयोग करते रहेंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में ऐसे तकनीकी फर्जीवाड़े दर्शाते हैं कि ग्रामीण स्तर पर डिजिटलीकरण के साथ सुरक्षा तंत्र को कितना सख्त करने की आवश्यकता है। जब तक सीधे-सादे किसानों के बायोमेट्रिक और भू-अभिलेखों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सत्यापन के स्तर नहीं बढ़ाए जाएंगे, तब तक इस तरह के संगठित गिरोह सरकारी खजाने और किसानों के हक पर सेंध लगाते रहेंगे। ऐसे मामलों में वित्तीय ट्रेल की गहराई से जांच होना अनिवार्य है ताकि इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों का भी पर्दाफाश हो सके।

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

यह वित्तीय धोखाधड़ी दर्शाती है कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण में मजबूत डेटा सुरक्षा और कड़े केवाईसी मानदंडों की कितनी आवश्यकता है। जब तक बीमा क्леम के भुगतान सीधे प्रमाणित आधार-लिंक्ड खातों और बायोमेट्रिक सत्यापन से नहीं जुड़ेंगे, तब तक फिनटेक लूपहोल्स का फायदा उठाकर ऐसे संगठित गिरोह सरकारी खजाने को चूना लगाते रहेंगे। भविष्य में वित्तीय ट्रेल की गहन जांच से यह भी पता चलेगा कि इस नेटवर्क में और कितने फर्जी खाते सक्रिय हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 दिन पहले

यह मामला डिजिटल इंडिया और सरकारी योजनाओं में तकनीकी खामियों के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण है। क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के माध्यम से किसानों के खातों की जगह अन्य खाते जोड़ना यह दर्शाता है कि इस गिरोह के तार बीमा क्षेत्र के किसी अंदरूनी व्यक्ति या तकनीकी सहायता से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को अब यह गहराई से खंगालना होगा कि क्या इस नेटवर्क में कुछ अन्य बिचौलिए या सरकारी तंत्र के लोग भी शामिल हैं, ताकि ऐसे अन्य मामलों का भी खुलासा हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

यह फर्जीवाड़ा सिर्फ एक स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि डिजिटल कृषि प्रणालियों में मौजूद सुरक्षा छिद्रों की पोल खोलता है। चूंकि आरोपी सीधे ऐप के जरिए बैंक खाते बदल रहे थे, इसलिए पुलिस को यह जांचना होगा कि क्या बीमा कंपनियों के आंतरिक डेटा तक इनकी पहुंच थी। इस खुलासे के बाद पूरे राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्य ऑनलाइन क्लेम्स की भी उच्च-स्तरीय तकनीकी ऑडिट होनी चाहिए, ताकि अन्य किसानों की गाढ़ी कमाई को बचाया जा सके।

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