राष्ट्रीय राजधानी के बीचों-बीच चल रहा नीट परीक्षा पेपर लीक का विरोध प्रदर्शन बुधवार रात अचानक हिंसक रूप ले लिया। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर डेरा डाले कॉकरोच जनता पार्टी के छात्रों और वहां तैनात पुलिस बलों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस भारी बवाल के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर पत्थरबाजी की, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर चल रहे राष्ट्रीय विवाद में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को आईं गंभीर चोटें
बुधवार रात अचानक हुए इस पथराव से कानून-व्यवस्था संभाल रहे जवानों में अफरा-तफरी मच गई। इस हमले में कनॉट प्लेस के असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (एसीपी) विवेक भगत सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जिन्हें खून से लथपथ हालत में तुरंत दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एसीपी विवेक भगत के दोनों हाथों और पैरों पर कई जगह चोट के गहरे निशान हैं। उनके कंधे पर भी गंभीर चोट आई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि उनके सिर के पिछले हिस्से, यानी पैरिएटो-ऑक्सिपिटल क्षेत्र में भारी सूजन देखी गई। घायल अधिकारी ने खुद डॉक्टरों को बताया कि उन्हें उल्टी हो रही है और कान से लगातार खून बह रहा है, जिसके बाद उन्हें तुरंत गहन चिकित्सा दी गई।
आरएमएल अस्पताल के सर्जरी विभाग की विशेष टीम ने उनका पूरा मेडिकल मूल्यांकन किया और आवश्यक शुरुआती इलाज उपलब्ध कराया। हालांकि, इसके बाद मरीज ने अपनी आगे की चिकित्सा और बेहतर इलाज के लिए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जाने की इच्छा प्रकट की। उनकी इस मांग को देखते हुए, अस्पताल प्रशासन ने सभी जरूरी जांच पूरी करने के बाद उन्हें उनकी अपनी मर्जी से आरएमएल से छुट्टी दे दी। इस हिंसक घटना में केवल विवेक भगत ही नहीं, बल्कि पंजाबी बाग इलाके के एसीपी भी पथराव की चपेट में आकर घायल हुए हैं। इनके साथ ही ड्यूटी पर तैनात इंस्पेक्टर नंद किशोर और कई अन्य पुलिस कर्मियों को भी इस उपद्रव में चोटें आई हैं।
भारी सुरक्षा बलों की तैनाती और एफआईआर दर्ज
कनॉट प्लेस के आसपास के इलाके में हुई इस भीषण हिंसा और पत्थरबाजी को दिल्ली पुलिस ने बेहद गंभीरता से लिया है और मामले में आधिकारिक तौर पर केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब उपद्रवियों की पहचान करने में जुट गई है। फिलहाल जंतर-मंतर पर डटे हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के इर्द-गिर्द सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है ताकि दोबारा किसी भी तरह की हिंसा को भड़कने से रोका जा सके।
इस टकराव का सीधा असर दिल्ली की आम जनता की दिनचर्या पर भी पड़ा है। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रशासन ने कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों से यात्रियों की आवाजाही को रोक दिया है। दिल्ली मेट्रो के राजीव चौक, पटेल चौक और जनपथ समेत कुल 16 महत्वपूर्ण स्टेशनों के एक्जिट गेट गुरुवार सुबह 7:30 बजे से ही पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं। मेट्रो प्रशासन का कहना है कि अगले आदेश तक ये सभी पाबंदियां लागू रहेंगी, जिससे दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नीट के मुद्दे पर सड़क पर उतरे कई दिग्गज नेता
गौरतलब है कि नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर जंतर-मंतर पर 20 जून से ही माहौल गरमाया हुआ है, जब कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था। इस आंदोलन को तब और मजबूती मिली जब देश के जाने-माने वैज्ञानिक सोनम वांगचुक भी सीजेपी के समर्थन में इस अनशन पर बैठ गए। प्रदर्शन कर रहे इन सभी लोगों की एक ही प्रमुख मांग है कि नीट पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
समय के साथ यह छात्र आंदोलन एक बड़े राजनीतिक मोर्चे में तब्दील हो चुका है। सीजेपी के धरने को समर्थन देने के लिए एक के बाद एक कई विपक्षी नेता जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। विरोध की आंच तब और तेज हो गई थी जब 21 जुलाई को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी अन्य कई प्रमुख विपक्षी चेहरों के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के ठीक बाहर धरने पर बैठ गए थे। शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ हो रहे इस धरना-प्रदर्शन और संसद मार्च में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव और दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी जैसी कई जानी-मानी हस्तियां भी शामिल हो चुकी हैं, जो यह दर्शाता है कि यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।



















