NEET परीक्षा के पेपर लीक विवाद को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में लगातार तीखे प्रदर्शन हो रहे हैं। छात्रों के बढ़ते गुस्से और जंतर-मंतर पर जारी आंदोलनों के बीच, केंद्र सरकार इस तरह की धांधली को रोकने के लिए एक बेहद सख्त और नया कानून बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इस नए कानूनी मसौदे का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ तुरंत और कड़ी कार्रवाई करना है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह से लगाम लगाई जा सके। सरकार इस कानून के जरिए देश के करोड़ों युवाओं को यह संदेश देना चाहती है कि उनकी मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान
प्रस्तावित कानून के तहत मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा, जिससे मुकदमों का निपटारा महज तीन महीने के भीतर सुनिश्चित किया जा सके। इस नए कानून में अपराधियों को दस साल तक की जेल की सजा देने का प्रावधान शामिल किया गया है। इसके साथ ही, आर्थिक मोर्चे पर भी कड़ी चोट करने की तैयारी है, जिसके तहत दोषियों पर दस करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है। फिलहाल इन सभी कड़े नियमों और कानूनी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक चल रही है, जिसमें इस पूरे मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इतनी सख्त सजा और बड़े जुर्माने के प्रावधान से पेपर लीक करने वाले गिरोहों में डर पैदा होगा।
आधी रात को मंत्रियों की पहल और सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त
इस पूरे मामले की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बड़े ऐलान के बाद सरकार तुरंत एक्शन मोड में आ गई। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन और भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक तक पहुंचने के लिए सरकार ने देर रात ही अपनी सक्रियता दिखाई। सरकार की ओर से दो वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह, आधी रात के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने भर्ती सोनम वांगचुक से मुलाकात की और सरकार की तरफ से उन्हें ठोस आश्वासन दिया। इस बातचीत और आश्वासन के बाद, सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का फैसला किया। गौरतलब है कि वह पिछले 28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे थे। सरकार ने उन्हें पूरा भरोसा दिलाया है कि शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठाने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी और सोनम वांगचुक द्वारा उठाई गई सभी मांगों पर सरकार बहुत ही गंभीरता से विचार करेगी।
प्रधानमंत्री का देश के छात्रों के नाम विशेष संदेश
इस नए विधेयक को पेश करने की पृष्ठभूमि कल रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किए गए एक वीडियो संदेश से तैयार हुई थी। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने देश के छात्र समुदाय को आश्वस्त किया था कि केंद्र सरकार पेपर लीक जैसी समस्याओं को लेकर बेहद गंभीर है और इसके लिए एक समर्पित तथा कड़ा कानून बनाने जा रही है। प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संबोधन में स्पष्ट किया था कि आज होने वाली कैबिनेट की बैठक में इस सख्त कानून के मसौदे को मंजूरी के लिए रखा जाएगा। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद, सरकार की योजना इसे अगले हफ्ते ही संसद में पेश कर पारित कराने की है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि सरकार शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था की शुचिता बनाए रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती और वह छात्रों के विश्वास को डिगने नहीं देगी।




















