न्हावा शेवा पोर्ट के यार्ड से गुजर रहे एक कंटेनर पर न कोई सिस्टम अलर्ट बजा था, न किसी वॉचलिस्ट में उसका नाम था, फिर भी जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी में तैनात सीआईएसएफ के एक जवान ने सिर्फ अपने शक के दम पर उसे रोक लिया। यही शक आगे चलकर करीब 71 लाख 40 हजार रुपये के एक बड़े खेल का पर्दाफाश कर गया।
बिना किसी चेतावनी के गुजर रहा था कंटेनर
न्हावा शेवा टर्मिनल पर हर रोज करोड़ों रुपये का माल आता-जाता है, और इसमें से सारा कारोबार कानूनी रास्तों से नहीं होता। यहां तैनात सीआईएसएफ के जवान लगातार उन कंटेनरों पर नजर रखते हैं, जिनके जरिए सामान को गलत तरीके से पोर्ट से बाहर भेजने की कोशिश हो सकती है। उस दिन जिस कंटेनर पर शक हुआ, उसके लिए न तो कोई अलर्ट जारी हुआ था और न ही कोई सिग्नल मिला था। लेकिन कंटेनर की हरकत और उसके आसपास मंडरा रहे कुछ लोगों का रवैया देखकर तैनात जवान को कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा हुआ। उस वक्त उसके पास कोई पक्का सबूत नहीं था, बस मन में बार-बार यही खटक रहा था कि यहां कुछ ठीक नहीं है।
मिनटों में घेर लिया गया कंटेनर
कंटेनर को यूं ही जाने देने के बजाय जवान ने तुरंत अपने साथी जवानों को सतर्क किया और दोनों ने मिलकर बीच रास्ते में ही कंटेनर को रोक दिया। देखते ही देखते सीआईएसएफ के जवानों ने कंटेनर के चारों ओर घेरा बना लिया और कड़ी निगरानी में उसे सीधे सीएफए यार्ड ले जाया गया। इसकी सूचना ऊपर तक पहुंचाई गई और मौके पर कस्टम्स की एक स्पेशल टीम को भी बुला लिया गया।
एक्स-रे स्कैन में सामने आया झोल
कस्टम्स अधिकारियों की मौजूदगी में सील खोलने से पहले कंटेनर को हाई-पावर एक्स-रे स्कैनर से गुजारा गया। स्कैनिंग में जो तस्वीर उभरी, वह दस्तावेजों में दर्ज माल के ब्योरे से मेल नहीं खा रही थी। यही अंतर पूरी तलाशी के लिए काफी था। इसके बाद कंटेनर की सील तोड़ी गई, कटर की मदद ली गई और लोहे के भारी दरवाजों को जबरदस्ती खोला गया।
246 वॉशिंग मशीनें निकलीं बाहर
इसके बाद शुरू हुआ पूरी तरह का सर्च ऑपरेशन, जिसमें सीआईएसएफ के जवान और कस्टम्स अधिकारी मिलकर एक-एक सामान बाहर निकालने में जुट गए। गिनती पूरी होने तक सामने ब्रांड-न्यू फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीनों की कतार लग चुकी थी, कुल 246 मशीनें, जिनमें से 147 मशीनें 6 किलो क्षमता की और 99 मशीनें 8 किलो क्षमता की थीं। इन सभी की कुल कीमत करीब 71 लाख 40 हजार रुपये आंकी गई, यानी एक अकेले कंटेनर से इतना बड़ा माल निकलना ड्यूटी पर मौजूद किसी के लिए भी हैरानी की बात थी।
अंदर कुछ छिपा तो नहीं, हर पुर्जा हुआ चेक
एक्स-रे में मिले फर्क को देखते हुए अधिकारी सिर्फ मशीनें गिनकर संतुष्ट नहीं हुए। हर मशीन के ड्रम और पुर्जों की बारीकी से जांच की गई, ताकि यह पक्का हो सके कि कहीं अंदर कोई नशीला पदार्थ, हथियार या तस्करी का कोई और सामान तो नहीं छिपाया गया। राहत की बात रही कि किसी भी मशीन के अंदर से कोई कंसील्ड चीज बरामद नहीं हुई।
पोर्ट सिक्योरिटी में सीआईएसएफ की नई भूमिका
यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है जब सीआईएसएफ को इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी यानी ISPS कोड के तहत देशभर की पोर्ट फैसिलिटीज के लिए रिकग्नाइज्ड सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन यानी RSO का दर्जा मिले ज्यादा वक्त नहीं हुआ है। यह अधिकार सीआईएसएफ को 6 मई 2026 को दिया गया था। फिलहाल सीआईएसएफ देश के 13 बड़े बंदरगाहों की सुरक्षा संभाल रही है और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी भी इन्हीं में शामिल है।


















