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मानसूनी बारिश और भूस्खलन ने बागेश्वर के पर्यटन बाजार पर लगाया ब्रेक, कौसानी-बैजनाथ के पर्यटन स्थलों में पर्यटक नदारदउत्तराखंड
6 सित॰ 2026, 6:14 pm (26 मिनट पहले)· 3

मानसूनी बारिश और भूस्खलन ने बागेश्वर के पर्यटन बाजार पर लगाया ब्रेक, कौसानी-बैजनाथ के पर्यटन स्थलों में पर्यटक नदारद

बागेश्वर जिले में लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते कौसानी, बैजनाथ और बागनाथ धाम में पर्यटकों की आवाजाही थम गई है, जिससे होटल, होमस्टे और टैक्सी कारोबार को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है.

बागेश्वर जिले में बीते कई दिनों से हो रही बारिश और अलग-अलग जगहों पर हो रहे भूस्खलन ने यहां के पर्यटन कारोबार की रौनक छीन ली है. कौसानी, बैजनाथ और बागेश्वर जैसे लोकप्रिय पर्यटन और धार्मिक ठिकानों पर इन दिनों पर्यटकों की तादाद बेहद कम नजर आ रही है. जो जगहें आम दिनों में सैलानियों की भीड़ से गुलजार रहती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है. खराब मौसम और बाधित सड़कों की वजह से बाहर से आने वाले लोग अपनी यात्रा टाल रहे हैं.

कौसानी की खूबसूरत वादियों में इस बार कम रौनक

कौसानी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और हिमालय की चोटियों के मनोरम नजारों के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है. मानसून में यहां की पहाड़ियां हरी चादर ओढ़ लेती हैं और नजारा और भी दिलकश हो जाता है, फिर भी इस बार बारिश की वजह से पर्यटकों की तादाद में वह उछाल नहीं दिख रहा जिसकी उम्मीद की जाती थी. सड़कों पर भूस्खलन और मलबा गिरने का खतरा बना रहने के कारण सैलानी लंबी दूरी की यात्रा से परहेज कर रहे हैं.

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बैजनाथ और बागनाथ धाम में भी श्रद्धालु कम पहुंचे

स्थानीय कारोबारी हरीश सोनी के मुताबिक बैजनाथ के पुराने मंदिर समूह और बागनाथ धाम में भी मानसून का असर साफ दिख रहा है. धार्मिक यात्रा के लिए जाने जाने वाले इन इलाकों में आम दिनों के मुकाबले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आमद घट गई है. बारिश की वजह से बहुत से लोग निकलने से पहले सड़क और मौसम का हाल जान लेना चाहते हैं, जिसका सीधा असर स्थानीय पर्यटन गतिविधियों पर पड़ा है.

होटल, होमस्टे और टैक्सी संचालकों की कमाई पर सीधी चोट

पर्यटकों की घटती संख्या का सबसे ज्यादा नुकसान होटल, होमस्टे, टैक्सी चलाने वालों, रेस्टोरेंट मालिकों और छोटे दुकानदारों को उठाना पड़ रहा है. जिस सीजन में इन कारोबारियों को अच्छी कमाई की उम्मीद रहती है, इस बार मानसून ने उनकी योजना बिगाड़ दी है. होटल और होमस्टे संचालकों का कहना है कि कई बुकिंग रद्द हो चुकी हैं, तो कई पर्यटकों ने अपनी यात्रा आगे के लिए टाल दी है.

सड़कों की तुरंत बहाली और निगरानी की उठी मांग

जिले में बारिश के चलते कई मोटर मार्ग बार-बार बंद हो रहे हैं, जिससे आवाजाही में दिक्कत आ रही है. इसका असर स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ रहा है. कारोबारियों का कहना है कि मानसून के दौरान प्रमुख पर्यटक मार्गों पर खास निगरानी रखी जानी चाहिए, ताकि सड़क बंद होने पर तुरंत मलबा हटाकर रास्ता खोला जा सके. उनका मानना है कि इससे पर्यटकों का भरोसा फिर से लौट सकता है.

स्थानीय पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद है कि मौसम साफ होते ही और सड़कें पूरी तरह दुरुस्त होने के बाद पर्यटकों की आवाजाही फिर रफ्तार पकड़ेगी. उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रमुख पर्यटन मार्गों की नियमित निगरानी हो, संवेदनशील जगहों पर तेजी से कार्रवाई की जाए और सैलानियों को सड़क व मौसम की सही और समय पर जानकारी दी जाए, ताकि वे बेवजह अपनी यात्रा रद्द न करें.

सवाल-जवाब

बागेश्वर जिले में पर्यटन कारोबार पर असर क्यों पड़ा?
लगातार बारिश और जगह-जगह भूस्खलन के कारण सड़कें बाधित हुई हैं, जिससे पर्यटक अपनी यात्रा टाल रहे हैं.
किन पर्यटन स्थलों पर सबसे ज्यादा असर दिखा?
कौसानी, बैजनाथ और बागनाथ धाम में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही सबसे ज्यादा घटी है.
किन कारोबारियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है?
होटल, होमस्टे, टैक्सी संचालकों, रेस्टोरेंट और स्थानीय दुकानदारों की कमाई पर सीधा असर पड़ा है.
क्या होटल-होमस्टे की बुकिंग रद्द हुई हैं?
होटल और होमस्टे संचालकों के अनुसार कई बुकिंग रद्द हुई हैं और कुछ पर्यटकों ने अपनी यात्रा आगे बढ़ा दी है.
स्थानीय कारोबारियों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
उन्होंने प्रमुख पर्यटन मार्गों की नियमित निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर त्वरित कार्रवाई और पर्यटकों को सड़क-मौसम की सही जानकारी देने की मांग की है.
बैजनाथ और बागनाथ धाम की स्थिति के बारे में किसने बताया?
स्थानीय व्यापारी हरीश सोनी ने बताया कि इन धार्मिक स्थलों पर भी मानसून का असर साफ देखने को मिल रहा है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·4 मिनट पहले

यह संकट केवल स्थानीय कारोबारियों की आय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ी जिलों में आपदा प्रबंधन और मजबूत बुनियादी ढांचे की दीर्घकालिक मांग को भी रेखांकित करता है। प्रशासन यदि समय पर संवेदनशील मार्गों से मलबा हटाने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया बल तैनात नहीं करता है, तो मानसून के बाद भी पर्यटकों का विश्वास बहाल होने में लंबा समय लग सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 मिनट पहले

रोहन वर्मा की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह देखना अहम है कि बार-बार सड़क मार्ग बाधित होने से कानून-व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र पर भी दबाव बढ़ता है। यदि समय पर मलबा नहीं हटाया गया और प्रशासनिक सुस्ती रही, तो न केवल पर्यटन अर्थव्यवस्था को बल्कि आपदा के समय आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही को भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा सीधे तौर पर प्रभावित होती है।

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