ओडिशा के भद्रक जिले से एक ऐसी अजीबोगरीब घटना सामने आई है जिसने चिकित्सा कर्मियों और स्थानीय निवासियों दोनों को ही चौंका दिया है। आमतौर पर सांप के डसने के बाद लोग दहशत में आ जाते हैं और तुरंत सुरक्षित स्थान की तलाश करते हैं या मेडिकल मदद लेते हैं, लेकिन यहाँ के एक स्थानीय निवासी ने इसके बिल्कुल उलट कदम उठाया। सांप के काटने के बाद उसने न केवल खुद अस्पताल जाने का फैसला किया, बल्कि उस खतरनाक जीव को भी अपने साथ डिब्बे में कैद करके ले आया जिसने उसे डसा था।
बसुदेवपुर के बालिमेड इलाके की घटना
यह पूरी घटना भद्रक जिले के बसुदेवपुर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले बालिमेड क्षेत्र के जेनासाही गाँव की है। इस चौंकाने वाली घटना के केंद्र में रहने वाले युवक की पहचान बिजय जेना के रूप में हुई है। घटना के दिन शाम के वक्त बिजय अपने कुछ दोस्तों के साथ बाहर टहलने के लिए निकला हुआ था। इसी दौरान अंधेरे या झाड़ियों के बीच अचानक एक जहरीले सांप ने उसे अपना शिकार बना लिया और डस लिया। इस अप्रत्याशित हमले से वहाँ अफरा-तफरी मच सकती थी, लेकिन बिजय ने बेहद असामान्य तरीके से स्थिति को संभाला और एक ऐसा कदम उठाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी।
सांप के डसने से घबराने के बजाय बिजय ने तुरंत उस सांप को अपनी पकड़ में ले लिया। उसने बिना डरे उस जहरीले जीव को काबू किया और एक प्लास्टिक के डिब्बे के अंदर सुरक्षित रूप से बंद कर दिया। इसके बाद बिना एक भी पल गँवाए वह उसी डिब्बे को अपने हाथ में उठाकर इलाज की आस में नजदीकी कम्युनिटी हेल्थ सेंटर की तरफ निकल पड़ा। अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में जब उसने डिब्बे का ढक्कन खोलकर या उसमें मौजूद सांप को डॉक्टरों और वहाँ मौजूद लोगों को दिखाया, तो सब लोग दंग रह गए। मरीज के साथ-साथ खुद हमलावर सांप को अस्पताल के अंदर देखना वहाँ मौजूद हर व्यक्ति के लिए हैरान करने वाला अनुभव था।
अस्पताल में इलाज और वर्तमान स्थिति
अस्पताल पहुँचने के बाद मेडिकल स्टाफ ने तुरंत सक्रियता दिखाई और बिजय जेना को प्राथमिक उपचार मुहैया कराया। हालाँकि उसकी स्थिति और विष के असर को देखते हुए वहाँ के डॉक्टरों ने उसे बेहतर तथा उन्नत इलाज के लिए भद्रक जिला मुख्यालय अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है और उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। इस पूरी घटना की चर्चा पूरे जेनासाही इलाके में मुख्य विषय बन चुकी है। एक साधारण सी शाम को टहलने की घटना इतनी नाटकीय स्थिति में बदल जाएगी, इसका अंदाजा किसी ने नहीं लगाया था।
इस पूरे वाकये में सबसे सकारात्मक और महत्वपूर्ण बात यह रही कि बिजय ने असामान्य तरीका अपनाने के बावजूद समय पर अस्पताल पहुँचकर अपनी जान बचा ली। डॉक्टरों का मानना है कि सर्पदंश के मामलों में समय पर चिकित्सीय सहायता मिलना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सर्पदंश जैसी प्राकृतिक आपदाएँ कितनी खतरनाक हो सकती हैं और अचानक जीवों के सामने आने पर इंसान किस तरह के अप्रत्याशित कदम उठा सकता है। इस तरह की अनोखी घटनाएँ अक्सर लोगों को हैरान कर देती हैं और लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहती हैं।





















