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ओडिशा में सरकारी स्कूलों के खाली पदों के लिए शिक्षकों का प्रदर्शन, भूख हड़ताल शुरूओडिशा
23 अग॰ 2026, 12:13 am (39 दिन पहले)· 4

ओडिशा में सरकारी स्कूलों के खाली पदों के लिए शिक्षकों का प्रदर्शन, भूख हड़ताल शुरू

ओडिशा में सरकारी स्कूलों में खाली पड़े शिक्षक पदों को भरने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन छठे दिन भी जारी रहा। सरकार से वार्ता विफल होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने भूख हड़ताल और कैंडल मार्च शुरू कर दिया है।

भुवनेश्वर: ओडिशा के सरकारी विद्यालयों में रिक्त पड़े शिक्षण पदों पर तत्काल बहाली की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन अब और अधिक उग्र हो गया है। आंदोलन के छठे दिन, लोअर पीएमजी में बड़ी संख्या में युवा शिक्षक अभ्यर्थी सड़कों पर उतरे। सरकार के साथ हुई बैठकों और वार्ताओं के बेनतीजा साबित होने के बाद अब इन अभ्यर्थियों ने अनशन यानी भूख हड़ताल का कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य का यह शिक्षक आंदोलन एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है।

प्रमुख मांगें और ऑल ओडिशा टीचर्स एस्पिरेंट्स एसोसिएशन की भूमिका

विरोध प्रदर्शन कर रहे इन अभ्यर्थियों का एकमात्र और स्पष्ट उद्देश्य राज्य के सरकारी शिक्षण संस्थानों में खाली पड़ी जगहों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करवाना है। प्रदर्शनकारियों का साफ तौर पर आरोप है कि शासन-प्रशासन उनकी स्थिति से पूरी तरह अवगत होने के बावजूद इस गंभीर मसले पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहा है। ऑल ओडिशा टीचर्स एस्पिरेंट्स एसोसिएशन के बैनर तले ये सभी अभ्यर्थी गत 17 अगस्त से लोअर पीएमजी क्षेत्र में धरने पर बैठे हुए हैं।

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एसोसिएशन की मुख्य मांगों में केवल सामान्य सरकारी प्राथमिक और उच्च विद्यालयों में मौजूद रिक्तियां ही शामिल नहीं हैं, बल्कि इसके दायरे में स्पेशल एजुकेटर तथा ओडिशा आदर्श विद्यालयों में खाली पड़े पद भी आते हैं। इन सभी जगहों पर तत्काल प्रभाव से नई भर्ती अधिसूचना जारी करने की पुरजोर मांग की जा रही है, ताकि योग्य युवाओं को रोजगार मिल सके और विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर हो सके।

पोस्टर, बैनर और मंत्रियों के साथ विफल वार्ता

धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों के हाथों में विभिन्न प्रकार के नारे लिखे तख्तियां, पोस्टर और बैनर साफ देखे जा सकते थे। इन पोस्टरों पर प्रमुख रूप से यह संदेश दर्ज था कि, “प्रतिश्रुति नहीं, नियुक्ति दो। हम भीख नहीं मांग रहे, अपना हक मांग रहे हैं।” अभ्यर्थियों का तर्क है कि वे शिक्षक बनने के लिए जरूरी समस्त शैक्षणिक योग्यताएं और प्रशिक्षण पूरी कर चुके हैं, इसलिए वे इस सरकारी चयन प्रक्रिया में शामिल होने का वैध अधिकार रखते हैं।

बीते शुक्रवार को इन प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के पांच सदस्यों वाले एक प्रतिनिधिमंडल ने स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गंड से मुलाकात की थी। इस बैठक के दौरान अभ्यर्थियों ने अपनी तमाम जायज मांगें सरकार के समक्ष मजबूती से रखीं और फौरन बहाली प्रक्रिया आरंभ करने का आग्रह किया। हालांकि, तमाम चर्चाओं के बावजूद इस उच्चस्तरीय बैठक से कोई भी ठोस समाधान निकलकर सामने नहीं आ सका।

सरकार का पक्ष और प्रदर्शनकारियों के गंभीर आरोप

आंदोलनकारियों के मुताबिक, सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि राज्य में पहले ही लगभग 26 हजार नौकरियों पर बहाली की प्रक्रिया चलाई जा रही है और फिलहाल इससे अधिक पदों पर किसी नई घोषणा से इनकार कर दिया गया। एक प्रदर्शनकारी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर यह तक कह दिया गया कि समय आने पर ही नौकरियां दी जाएंगी और अभ्यर्थी इसके लिए सरकार पर अनुचित दबाव नहीं बना सकते।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार उनकी कठिनाइयों को भली-भांति समझती है, परंतु उनकी इस जायज मांग को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उनका यह भी आरोप है कि मंत्री के साथ हुई उस बैठक में उनकी खुद की शिक्षण योग्यता और क्षमता पर ही सवाल खड़े किए जाने लगे, जिससे प्रदर्शनकारियों के भीतर का आक्रोश और अधिक भड़क उठा। वार्ता के विफल होने के बाद आंदोलन को और तेज करने का बिगुल फूंक दिया गया।

भूख हड़ताल, कैंडल मार्च और अनिश्चितकालीन आंदोलन

शनिवार को ऑल ओडिशा टीचर्स एस्पिरेंट्स एसोसिएशन ने अपने पूर्व निर्धारित ऐलान के तहत भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी। अभ्यर्थियों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर कोई सकारात्मक और ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका यह संघर्ष यूं ही जारी रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने लोअर पीएमजी में अनिश्चितकाल तक डटे रहकर अपनी आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया है।

शनिवार के प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने एक भव्य और शांतिपूर्ण कैंडल मार्च भी निकाला। एक हाथ में प्रज्वलित मोमबत्ती और दूसरे हाथ में देश का तिरंगा थामे इन युवाओं ने बेहद अनुशासित तरीके से सरकार के रवैये का विरोध दर्ज कराया। इस कैंडल मार्च के दौरान पूरा माहौल राष्ट्रगान की धुनों से गूंज उठा, जहां हाथों में मोमबत्ती और तिरंगा लेकर अभ्यर्थियों ने अपनी बातें अहिंसक और लोकतांत्रिक माध्यम से सबके सामने रखीं।

एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष यह स्पष्ट मांग रखी है कि वह खाली पड़े शिक्षण पदों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करे और जल्द से जल्द नई बहाली का विज्ञापन निकालकर चयन प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाए। फिलहाल लोअर पीएमजी में यह आंदोलन अपनी पूरी तीव्रता के साथ जारी है और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस मामले में आगे क्या रुख अपनाती है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी राज्य में प्रशासनिक स्तर पर नियुक्तियों को लेकर कदम उठाए गए थे, जिसके तहत ओडिशा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 755 नए पदों को मंजूरी दी गई थी।

सवाल-जवाब

ओडिशा में शिक्षक अभ्यर्थियों का यह आंदोलन कहां और कब से चल रहा है?
यह आंदोलन भुवनेश्वर के लोअर पीएमजी में 17 अगस्त से लगातार चल रहा है।
शिक्षक अभ्यर्थियों की मुख्य मांग क्या है?
अभ्यर्थी सरकारी स्कूलों, स्पेशल एजुकेटर और ओडिशा आदर्श विद्यालयों में खाली पड़े शिक्षक पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की किस मंत्री के साथ बातचीत बेनतीजा रही?
शिक्षक अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गंड के साथ हुई थी जो किसी समाधान पर नहीं पहुंच सकी।
सरकार की ओर से बातचीत में क्या प्रतिक्रिया दी गई?
सरकार की तरफ से कहा गया कि राज्य में पहले ही लगभग 26 हजार नौकरियों पर बहाली की जा रही है और फिलहाल इससे अधिक पदों की घोषणा नहीं की जाएगी।
बातचीत विफल होने के बाद अभ्यर्थियों ने क्या कदम उठाया?
वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अभ्यर्थियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी और कैंडल मार्च निकालकर अनिश्चितकालीन आंदोलन की घोषणा की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·39 दिन पहले

सरकारी स्कूलों में रिक्त पदों को भरने की यह मांग केवल ओडिशा तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भी बेरोजगारी और बुनियादी ढांचे की एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। जब प्रशिक्षित युवा सड़कों पर उतरते हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक प्राथमिकताओं और शासन की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते वार्ता के माध्यम से ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो यह असंतोष अन्य क्षेत्रों के छात्र आंदोलनों की तरह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, जिससे शिक्षा व्यवस्था का सुचारू संचालन प्रभावित होना तय है।

Ravikash Gupta@ravikash·39 दिन पहले

ओडिशा में शिक्षक पदों के लिए चल रहा यह आंदोलन राज्य के रोजगार बाजार और मानव संसाधन प्रबंधन पर सीधा असर डाल रहा है। जब शिक्षित युवा सड़कों पर उतरने और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने को मजबूर होते हैं, तो यह कार्यबल के कुशल आवंटन और वित्तीय नियोजन में अंतराल को दर्शाता है। यदि इन रिक्तियों को समयबद्ध तरीके से नहीं भरा गया, तो इससे सामाजिक असंतोष बढ़ेगा और इसका दीर्घकालिक प्रभाव राज्य के शैक्षणिक ढांचे के साथ-साथ आर्थिक उत्पादकता पर भी पड़ेगा।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·39 दिन पहले

यह गतिरोध केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राज्य के मानव पूंजी निवेश पर एक बड़ा आघात है। जब प्रशिक्षित युवा सड़कों पर उतरते हैं, तो यह क्षेत्रीय उत्पादकता और भविष्य की कार्यबल क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। यदि इस नीतिगत गतिरोध का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला, तो यह असंतोष व्यापक सामाजिक-आर्थिक संकट का रूप ले सकता है, जिससे राज्य की प्रशासनिक विश्वसनीयता और शैक्षणिक मानकों दोनों पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

सरकारी स्कूलों में रिक्तियों को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। वार्ता विफल होने के बाद भूख हड़ताल शुरू होना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यह विरोध प्रदर्शन और अधिक उग्र रूप ले सकता है, जिससे राजधानी की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·39 दिन पहले

सरकार द्वारा वर्तमान में छब्बीस हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया का दावा और अभ्यर्थियों की वृहद मांग के बीच का यह गतिरोध गंभीर नीतिगत असंतुलन को दर्शाता है। यदि इस मुद्दे पर संवाद के द्वार पूरी तरह बंद होते हैं, तो यह राजनीतिक दलों के लिए आगामी चुनावी रणक्षेत्र में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, जिससे शासन की साख पर सीधा असर पड़ेगा।

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