मीन साप्ताहिक राशिफल 1-7 नवंबर 2026: वक्री शनि बढ़ाएंगे जिम्मेदारी, जानें करियर, धन और सेहत का हालग्रेटर नोएडा की तरह बसा था दुनिया का पहला ग्रेटर शहर, 1898 में न्यूयॉर्क ने बदली थी शहरी विकास की तस्वीरजयपुर में दो अलग-अलग हत्याओं की गुत्थी सुलझी, चार आरोपी गिरफ्तारडेटोना बीच में चुनावी भाषण के दौरान अपनी बहनों का जिक्र कर बैठे डोनाल्ड ट्रंप, इल्हान ओमर के विवाद पर साधा निशानागांधीनगर में मवेशी न पकड़ने के नाम पर रिश्वत ले रहा निगम कर्मी गिरफ्तारलखनऊ में अकेली बुजुर्ग महिला के घर सेंधमारी और जानलेवा हमला, पचास लाख के गहनों समेत चार पकड़े गएउज्जैन-गरोठ लिंक एक्सप्रेसवे का 90 फीसदी काम पूरा, दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से सीधे जुड़ेंगे महाकाल के श्रद्धालुफखर जमां के आक्रामक शतक और अराफात मिन्हास के तूफानी अर्धशतक से पाकिस्तान ने 3 विकेट से जीता ट्राई सीरीज का फाइनलजम्मू में माल ढुलाई सुगम बनाने के लिए उद्योग विभाग और उत्तर रेलवे की साझा पहलअटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक, नेपाल संकट में भारत के योगदान की सराहना और समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर जोर
ऑपरेशन सिंदूर की मार से टूटा जैश अब मसूद अजहर के फर्जी एआई अवतार से साध रहा भर्ती का नया दांवभारत
31 अक्तू॰ 2026, 11:22 pm (1 घंटे पहले)· 0

ऑपरेशन सिंदूर की मार से टूटा जैश अब मसूद अजहर के फर्जी एआई अवतार से साध रहा भर्ती का नया दांव

भारतीय सुरक्षा बलों के ऑपरेशन सिंदूर में बहावलपुर ठिकाना तबाह होने के बाद जैश-ए-मोहम्मद अपने प्रमुख मसूद अजहर के नकली एआई वीडियो और ऑडियो के जरिए गिरती भर्ती को संभालने की कोशिश कर रहा है।

पहलगाम में पर्यटकों पर हुए बर्बर हमले के जवाब में भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान स्थित आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद की बुनियादी ढांचे को हिलाकर रख दिया है। बहावलपुर स्थित संगठन के मुख्य ठिकाने के जमींदोज होने और कई वरिष्ठ आतंकियों व रिश्तेदारों के मारे जाने के बाद यह संगठन भारी संकट से जूझ रहा है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद से संगठन का सरगना मसूद अजहर सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह नदारद है, जिससे संगठन में भर्ती लगभग ठप पड़ गई थी। अब इस गिरते मनोबल और घटते कैडर को फिर से खड़ा करने के लिए जैश ने आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर के झटके और बहावलपुर की तबाही

भारतीय सशस्त्र बलों ने निर्दोष सैलानियों की हत्या का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया था। इस सटीक सैन्य अभियान के दौरान बहावलपुर में मौजूद जैश-ए-मोहम्मद के मुख्य मुख्यालय को मलबे में तब्दील कर दिया गया था। इस भीषण कार्रवाई में मसूद अजहर के कई करीबी रिश्तेदार और संगठन के कई शीर्ष कमांडर ढेर हो गए थे। इस बड़े आघात के बाद से संगठन का सर्वोच्च नेतृत्व पूरी तरह भूमिगत हो गया और सार्वजनिक मंचों से गायब हो गया। इस लंबे सन्नाटे ने संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं और संभावित नए सदस्यों के विश्वास को बुरी तरह झकझोर दिया, जिससे जमीनी स्तर पर संगठन का ढांचा बिखरने लगा।

ये भी पढ़ें

सार्वजनिक मंचों से मसूद अजहर का गायब होना और उठते सवाल

इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, मसूद अजहर काफी लंबे वक्त से सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिया है। उसके इस तरह ओझल रहने से संगठन में शामिल होने की इच्छा रखने वाले युवाओं के भीतर गंभीर संदेह पैदा होने लगे। नए रंगरूट ऐसे संगठन में अपनी जान जोखिम में डालने से कतराने लगे, जिसका मुखिया खुद निष्क्रिय या लापता दिख रहा था। हाल के महीनों में जब जैश के रिक्रूटर्स ने नए युवाओं को जोड़ने की कोशिश की, तो उनमें से अधिकांश ने शामिल होने से साफ मना कर दिया या अपनी गहरी अनिच्छा जताई। कई युवाओं ने तो यह सीधा प्रमाण तक मांग लिया कि मसूद अजहर जीवित और सक्रिय है भी या नहीं, जिसका भर्ती करने वाले कोई ठोस उत्तर नहीं दे पाए। पहले कार्यकर्ताओं को आश्वस्त करने के लिए जो पुराने वीडियो या ऑडियो जारी किए गए थे, उन्हें लोगों ने तुरंत पहचान लिया कि वे पहले से रिकॉर्ड किए गए पुराने क्लिप हैं।

ग्लोबल जिहादी ट्रेंड और एआई का बदलता हथियार

खुफिया एजेंसियों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि आतंकी गतिविधियों और दुष्प्रचार में एआई तकनीक का प्रयोग सबसे पहले इस्लामिक स्टेट ने शुरू किया था। उसके बाद अल-कायदा ने भी अपने अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगैंडा को धार देने के लिए इस डिजिटल तकनीक को तेजी से आत्मसात किया। इसके विपरीत, पाकिस्तान की धरती से संचालित होने वाले लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूह लंबे समय तक पारंपरिक प्रचार शैलियों और पुराने ऑडियो टेपों पर ही निर्भर बने रहे। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद पैदा हुए अस्तित्व के संकट ने जैश को अपनी रणनीति बदलने पर विवश कर दिया और उसने बड़े पैमाने पर डीपफेक तकनीक तथा एआई जनरेटेड कंटेंट का निर्माण शुरू कर दिया।

कम पढ़े-लिखे युवाओं को बरगलाने का डिजिटल षड्यंत्र

जैश-ए-मोहम्मद अपने इन एआई जनरेटेड ऑडियो और वीडियो के माध्यम से मसूद अजहर को पूर्णतः स्वस्थ, ऊर्जावान और संगठन का सीधा नेतृत्व करते हुए पेश कर रहा है। इन आभासी वीडियो में वह भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने और संगठन में शामिल होने के आक्रामक आह्वान करता हुआ दिखाई देता है। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि यह प्रचार अभियान विशेष रूप से कम पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाले युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पुराने और दोबारा इस्तेमाल किए गए वीडियो को सामान्य लोग भी आसानी से पकड़ लेते थे, लेकिन जनरेटिव एआई की तेजी से बढ़ती गुणवत्ता के कारण अब वास्तविक और नकली वीडियो के बीच का तकनीकी अंतर पहचानना आम लोगों के लिए बेहद कठिन हो गया है। संगठन का मानना है कि तकनीकी रूप से अनभिज्ञ युवाओं के लिए वीडियो की सत्यता की पड़ताल करना संभव नहीं होगा।

भारत के ग्रामीण अंचलों तक जाल फैलाने की तैयारी

भारतीय खुफिया एजेंसियों की निगरानी में यह सनसनीखेज तथ्य भी सामने आया है कि जैश केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह भारत के ग्रामीण इलाकों में भी इस एआई प्रचार को प्रसारित करने की साजिश रच रहा है। इसके लिए मसूद अजहर के भाषणों और संदेशों को भारत के अलग-अलग राज्यों की स्थानीय भाषाओं और क्षेत्रीय बोलियों के अनुरूप तैयार करने की योजना बनाई गई है। ग्रामीण और कमजोर तबकों में एआई और डीपफेक जैसी जटिल तकनीकों के प्रति जागरूकता बहुत कम होती है, जिसका अनुचित लाभ उठाकर आतंकी गुट भावनात्मक रूप से युवाओं को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।

नेतृत्व संकट और समय हासिल करने की जुगत

खुफिया आकलन के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद इस डिजिटल हथकंडे के जरिए मुख्य रूप से 3 बड़े लक्ष्य हासिल करने में जुटा है। पहला मकसद संगठन के वजूद और उसकी आभासी सक्रियता को दर्शाना है, दूसरा उद्देश्य पुराने हताश कार्यकर्ताओं के गिरते मनोबल को संभालना है, और तीसरा लक्ष्य नई भर्तियों के जरिए अपनी घटती आतंकी संख्या को बढ़ाना है। मसूद अजहर संगठन के पुराने कार्यकर्ताओं के लिए एक नायक जैसा दर्जा रखता है, लेकिन उसकी गिरती सेहत अब उसे अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभाने की अनुमति नहीं देती। ऐसे में एआई जनरेटेड वीडियो जैश को तब तक का बहुमूल्य समय दे रहे हैं, जब तक कि वह मसूद अजहर का कोई उपयुक्त उत्तराधिकारी तलाश नहीं लेता। इसी बीच अंतरराष्ट्रीय दबाव और वैश्विक जांच से बचने के लिए पाकिस्तान ने दिखावे के तौर पर मसूद अजहर पर इनामी राशि बढ़ाकर 70 लाख रुपये करने का स्वांग भी रचा है।

सवाल-जवाब

जैश-ए-मोहम्मद अपने प्रचार में एआई का इस्तेमाल क्यों कर रहा है?
ऑपरेशन सिंदूर में हुए नुकसान और मसूद अजहर के लंबे समय से गायब रहने के बाद गिरती भर्ती को संभालने तथा कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतने के लिए संगठन एआई का सहारा ले रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश को क्या नुकसान हुआ था?
भारतीय सशस्त्र बलों की इस कार्रवाई में बहावलपुर स्थित जैश का मुख्यालय नष्ट हो गया था और मसूद अजहर के कई करीबी रिश्तेदारों समेत अनेक आतंकी मारे गए थे।
जैश के नए भर्ती अभियान में किन लोगों को निशाना बनाया जा रहा है?
संगठन मुख्य रूप से कम पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाले युवाओं को निशाना बना रहा है, जिनके लिए नकली वीडियो की पहचान करना मुश्किल होता है।
क्या जैश भारत के भीतर भी इस प्रचार को फैलाने की योजना बना रहा है?
खुफिया सूचना के मुताबिक, जैश भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं और बोलियों में मसूद अजहर के एआई जनरेटेड वीडियो प्रसारित करने की तैयारी कर रहा है।
पाकिस्तान ने हाल ही में मसूद अजहर को लेकर क्या कदम उठाया था?
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने दिखावा करने के लिए पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनामी राशि बढ़ाकर 70 लाख रुपये करने की घोषणा की थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·27 मिनट पहले

आतंक फैलाने के लिए अब एआई का ऐसा इस्तेमाल देख कर हैरानी होती है। तकनीक का कितना बुरा हाल है।

Ravikash Gupta@ravikash·48 मिनट पहले

आतंकियों का एआई इस्तेमाल करना नई बात नहीं है, पर मुझे शक है कि इससे इनके बहके में कोई नया युवा आएगा।

Divya Reddy@divya-reddy·48 मिनट पहले

रविकेश, आपकी बात सही है। जब मैं पिछले साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में एक सेमिनार कवर कर रही थी, तब कुछ छात्रों ने भी यही कहा था कि डीपफेक वीडियो को देखकर कोई भी आसानी से सच और झूठ का फर्क समझ जाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

आतंकियों का एआई इस्तेमाल करना नई बात नहीं है, लेकिन मुझे शक है कि इससे इनकी भर्ती सच में बढ़ जाएगी। जब ग्राउंड पर चेहरा ही गायब है, तो ऐसे नकली वीडियो से युवा कितने दिन बेवकूफ बनेंगे?

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

करण भाई, बात तो सही है। बहावलपुर वाला हेडक्वार्टर तबाह होने के बाद असली चेहरा सामने नहीं आया, तो एआई वीडियो से कितने दिन काम चलेगा?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp