रूसी कब्जे वाले ओलेशकी से सुरक्षित निकाले गए सैकड़ों यूक्रेनी नागरिकमीन साप्ताहिक राशिफल 1-7 नवंबर 2026: वक्री शनि बढ़ाएंगे जिम्मेदारी, जानें करियर, धन और सेहत का हालग्रेटर नोएडा की तरह बसा था दुनिया का पहला ग्रेटर शहर, 1898 में न्यूयॉर्क ने बदली थी शहरी विकास की तस्वीरडेटोना बीच में चुनावी भाषण के दौरान अपनी बहनों का जिक्र कर बैठे डोनाल्ड ट्रंप, इल्हान ओमर के विवाद पर साधा निशानागांधीनगर में मवेशी न पकड़ने के नाम पर रिश्वत ले रहा निगम कर्मी गिरफ्तारगोवा में बनेगा पहला एलपीजी आयात टर्मिनल, दुबई के अन्वी ग्रुप के साथ 5,000 करोड़ रुपये का हुआ समझौताजयपुर में दो अलग-अलग हत्याओं की गुत्थी सुलझी, चार आरोपी गिरफ्तारउज्जैन-गरोठ लिंक एक्सप्रेसवे का 90 फीसदी काम पूरा, दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से सीधे जुड़ेंगे महाकाल के श्रद्धालुलखनऊ में अकेली बुजुर्ग महिला के घर सेंधमारी और जानलेवा हमला, पचास लाख के गहनों समेत चार पकड़े गएरामलीला मैदान की रैली के साथ दिल्ली के दुकानदारों से खरीदारी करने की अपील, राहुल गांधी बोले त्योहारों पर छोटे कारोबारियों को दें सहारा
देवेंद्र फडणवीस के फोन वाले तंज पर उद्धव ठाकरे का पलटवार, 2019 के बाद बातचीत हमेशा के लिए खत्ममहाराष्ट्र
1 नव॰ 2026, 12:21 am (1 घंटे पहले)· 0

देवेंद्र फडणवीस के फोन वाले तंज पर उद्धव ठाकरे का पलटवार, 2019 के बाद बातचीत हमेशा के लिए खत्म

संजय राउत की किताब के विमोचन पर उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर कटाक्ष करते हुए साफ किया कि 2019 के घटनाक्रम के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद पूरी तरह समाप्त हो गया था।

महाराष्ट्र की सियासत में पुराने सहयोगियों के बीच तल्खी एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर दिखाई दी है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2019 के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ संवाद के तमाम रास्ते पूरी तरह बंद हो गए थे, जो आज तक बहाल नहीं हो सके हैं। ठाकरे का यह तीखा पलटवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस हालिया बयान के बाद आया है, जिसमें फडणवीस ने फोन कॉल्स और बातचीत को लेकर चुटकी ली थी।

संजय राउत की पुस्तक विमोचन पर साधा निशाना

शनिवार को मुंबई में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान ठाकरे अपनी बात रख रहे थे। यह समारोह शिवसेना (UBT) सांसद तथा 'सामना' के कार्यकारी संपादक संजय राउत की नई कृति 'बोध कीर्तन' के लोकार्पण के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस मंच से ठाकरे ने फडणवीस के पूर्व वक्तव्य पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों को संपर्क सूत्र टूटने के बाद कभी दोबारा कॉल नहीं गए और यह सिलसिला स्थायी तौर पर खत्म हो गया।

ये भी पढ़ें

फडणवीस की पूर्व टिप्पणी और पृष्ठभूमि

इस जुबानी जंग की शुरुआत दो दिन पहले आयोजित एक अन्य पुस्तक विमोचन समारोह में हुई थी। उस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे एक साथ मौजूद थे। फडणवीस ने हल्के-फुल्के लहजे में दावा किया था कि जब भी ठाकरे की तरफ से संपर्क साधा गया, उन्होंने सदैव सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। इसके साथ ही फडणवीस ने यह भी जोड़ दिया था कि 2019 के उपरांत उन्हें कोई कॉल नहीं मिला, जबकि वह संवाद की प्रतीक्षा कर रहे थे।

2019 का टकराव और 2022 का राजनीतिक विभाजन

महाराष्ट्र में दोनों दलों का दशकों पुराना गठबंधन 2019 के विधानसभा चुनाव परिणामों के तत्काल बाद टूट गया था। उस समय अविभाजित शिवसेना ने शीर्ष प्रशासनिक पद यानी मुख्यमंत्री की कुर्सी के बंटवारे को लेकर भाजपा से अपनी राहें अलग कर ली थीं। इसके बाद 2022 में शिवसेना के भीतर बड़ा विभाजन हुआ, जब एकनाथ शिंदे के गुट ने अलग होकर भाजपा के सहयोग से सत्ता की कमान संभाली। इस आंतरिक टूट ने ठाकरे गुट और भाजपा के आपसी संबंधों में कड़वाहट को चरम पर पहुंचा दिया।

'बोध कीर्तन' की विषयवस्तु और राज ठाकरे के संस्मरण

जिस 'बोध कीर्तन' किताब का विमोचन हुआ, उसमें राउत के दार्शनिक विचार, निजी अनुभव और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षण दर्ज हैं। इस संग्रह में अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा उत्सव के पश्चात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए उद्बोधन पर आधारित एक आलेख भी शामिल है।

समारोह में उपस्थित मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने पत्रकार के रूप में संजय राउत के चार दशकों से अधिक लंबे सफर को साझा किया। राज ठाकरे ने स्मरण कराया कि जब राउत किसी अन्य अखबार में कार्यरत थे, तब वे शिवसेना की नीतियों पर तीखी आलोचनात्मक सामग्री लिखते थे। इस कारण शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे आरंभ में काफी क्षुब्ध हुए थे। हालांकि बाल ठाकरे को राउत की निर्भीक लेखनी पसंद आई और कालांतर में इसी विशिष्ट शैली के चलते उन्हें 'सामना' के कार्यकारी संपादक का दायित्व सौंपा गया।

सवाल-जवाब

उद्धव ठाकरे ने 2019 के बाद बातचीत को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि 2019 के बाद भाजपा के साथ सभी संवाद पूरी तरह बंद हो गए थे और उसके बाद कभी बहाल नहीं हुए।
देवेंद्र फडणवीस ने फोन को लेकर पहले क्या टिप्पणी की थी?
फडणवीस ने कहा था कि ठाकरे के फोन पर वे हमेशा सकारात्मक रहे, लेकिन 2019 के बाद उन्हें कोई कॉल नहीं आया और वे इंतजार कर रहे थे।
ठाकरे ने यह बयान किस अवसर पर दिया?
यह बयान शनिवार को सांसद संजय राउत की पुस्तक 'बोध कीर्तन' के विमोचन समारोह के दौरान दिया गया।
2019 में शिवसेना और भाजपा का गठबंधन क्यों टूटा था?
विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर उपजे विवाद के कारण यह गठबंधन टूट गया था।
राज ठाकरे ने संजय राउत के आरंभिक पत्रकारिता जीवन के बारे में क्या बताया?
उन्होंने बताया कि राउत पहले शिवसेना की आलोचना करते थे जिससे बाल ठाकरे नाराज हुए, पर बाद में इसी खूबी के कारण उन्हें 'सामना' का संपादक बनाया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·20 मिनट पहले

नेता लोग मंच पर भले ही फोन कॉल और पुरानी दोस्ती की बात करके बात टाल दें, पर अंदर की तल्खी कम नहीं हुई है।

Priya Sharma@priya-sharma·20 मिनट पहले

संदीप जी, सही कहा आपने। रिश्तों में एक बार दूरियां आ जाएं तो मंच पर मुस्कुराना सिर्फ दिखावा बनकर रह जाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·40 मिनट पहले

फोन उठाने और न उठाने की ये बातें अब पुरानी हो गईं, जनता को इससे क्या फर्क पड़ता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

2019 के बाद से दोनों के बीच वाकई कभी कोई फोन पर बात नहीं हुई, या राजनीति के चलते बस सार्वजनिक तौर पर ऐसा कहा जा रहा है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·59 मिनट पहले

रोहन, राजनीति में बंद दरवाजों के पीछे बहुत कुछ होता है, सार्वजनिक बयानों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp