उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर कानपुर की आर्यनगर विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास तीन दशकों से समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच राजनीतिक खींचतान का केंद्र रहा है। कानपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत आने वाली इस विधानसभा का क्रमांक 287 है। साल 1991 से लेकर 2022 तक इस सीट पर कुल 8 बार विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं, जिनमें समाजवादी पार्टी ने 5 बार जीत का परचम लहराया, बीजेपी को 2 बार कामयाबी मिली और बीएसपी केवल 1 बार विजयी हो सकी। वहीं कांग्रेस पार्टी के लिए यह क्षेत्र पिछले तीस सालों में बेहद निराशाजनक रहा है और उसे एक भी जीत हासिल नहीं हुई। वर्तमान में समाजवादी पार्टी के अमिताभ बाजपेयी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उनके सामने अगली बार जीत की हैट्रिक लगाने का मौका है।
1991 में बीजेपी ने दर्ज की थी पहली चुनावी जीत
साल 1991 के विधानसभा चुनाव में आर्यनगर की जनता ने पहली बार भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतदान किया था। इस मुकाबले में बीजेपी प्रत्याशी सत्यदेव पचौरी ने कुल 29,964 वोट हासिल किए। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आईएमएल के उम्मीदवार मोहम्मद सुलेमान को 10,105 मतों के भारी अंतर से शिकस्त दी थी। मोहम्मद सुलेमान के खाते में उस समय 19,859 वोट आए थे। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी एसएम उस्मान तीसरे पायदान पर रहे थे और उन्हें महज 8,222 वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। इस तरह बीजेपी ने आर्यनगर में अपना पहला मजबूत चुनावी आधार तैयार किया था।
1993 के चुनाव में सपा और बीएसपी गठबंधन का पलटा दांव
आर्यनगर में 1991 की जीत के बाद 1993 के विधानसभा चुनाव में पूरा सियासी समीकरण बदल गया। उस समय समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच चुनावी गठबंधन हुआ था। इस गठबंधन के तहत बीएसपी के टिकट पर मैदान में उतरे महेश चंद्र ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 45,981 मत प्राप्त किए और सीट अपने नाम कर ली। बीजेपी के सत्यदेव पचौरी इस मुकाबले में दूसरे स्थान पर खिसक गए, जिन्हें 40,913 वोट मिले। महेश चंद्र ने सत्यदेव पचौरी को 5,068 मतों के अंतर से पराजित किया। दूसरी तरफ, कांग्रेस इस बार भी मुख्य लड़ाई से बाहर रही और उसके उम्मीदवार हाफिज मोहम्मद उमर 7,300 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे।
1996 में मुश्ताक सोलंकी ने बेहद करीबी अंतर से दिलाई सपा को जीत
साल 1996 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने आर्यनगर सीट पर पहली बार अपना परचम फहराया। सपा के प्रत्याशी मुश्ताक सोलंकी और बीजेपी के सत्यदेव पचौरी के बीच बेहद रोमांचक और कड़ा मुकाबला देखने को मिला। मुश्ताक सोलंकी ने 39,531 वोट प्राप्त कर सत्यदेव पचौरी को महज 2,562 वोटों के नजदीकी अंतर से पराजित किया। सत्यदेव पचौरी को कुल 36,969 मत मिले थे। यह 1991 से लेकर 2022 के बीच हुए सभी आठ चुनावों में जीत का सबसे कम अंतर था। इस चुनाव में बीएसपी तीसरे स्थान पर रही और उसके प्रत्याशी जियाउल इस्लाम जिया को 17,036 वोट मिले थे।
2002 में मुश्ताक सोलंकी की लगातार दूसरी बड़ी जीत
साल 2002 के विधानसभा चुनाव में मुश्ताक सोलंकी ने आर्यनगर में अपनी मजबूत पकड़ साबित करते हुए लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। समाजवादी पार्टी के मुश्ताक सोलंकी को जनता ने 46,448 वोट दिए, जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अनंत मिश्र अंटू को केवल 19,132 वोट मिले। मुश्ताक सोलंकी ने 27,316 मतों के विशाल अंतर से एकतरफा जीत दर्ज की। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी तीसरे स्थान पर रही और उसके प्रत्याशी भूधर नारायण मिश्र को 12,920 वोट मिले। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी रजनीश तिवारी चौथे नंबर पर खिसक गए, जिन्हें महज 4,490 वोट ही मिल सके थे।
2007 में इरफान सोलंकी ने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया
साल 2006 में विधायक मुश्ताक सोलंकी के आकस्मिक निधन के बाद 2007 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उनके बेटे इरफान सोलंकी को चुनावी समर में उतारा। इरफान सोलंकी ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाला और 36,376 वोट पाकर जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार हरीश मटरेजा को 23,203 वोटों के बड़े अंतर से मात दी। हरीश मटरेजा को सिर्फ 13,173 वोट ही मिले थे। इस जीत के साथ समाजवादी पार्टी ने आर्यनगर सीट पर जीत की हैट्रिक पूरी कर ली थी। कांग्रेस प्रत्याशी पवन गुप्ता 9,636 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि बीएसपी उम्मीदवार सुनील बाबू को 7,788 वोटों के साथ चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा।
2012 में परिसीमन के बाद सलिल विश्नोई ने कराई बीजेपी की वापसी
साल 2008 के परिसीमन के बाद जब 2012 में विधानसभा चुनाव कराए गए, तब आर्यनगर का सियासी परिदृश्य फिर बदला। भारतीय जनता पार्टी के सलिल विश्नोई ने समाजवादी पार्टी के लगातार चले आ रहे विजय रथ को रोक दिया। सलिल विश्नोई ने 51,200 वोट हासिल किए और सपा के जितेंद्र बहादुर सिंह को 15,411 मतों के अंतर से हरा दिया। जितेंद्र बहादुर सिंह को 35,789 वोट मिले थे। इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी अनिल कुमार शर्मा 19,345 वोट जुटाकर तीसरे स्थान पर रहे। बहुजन समाज पार्टी की ओर से मैदान में उतरे कैलाश शर्मा 12,797 वोट लेकर चौथे स्थान पर रहे थे।
2017 में अमिताभ बाजपेयी ने सपा की झोली में डाली जीत
साल 2017 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने नए चेहरे के रूप में अमिताभ बाजपेयी को मैदान में उतारा। इस मुकाबले में अमिताभ बाजपेयी ने बीजेपी के निवर्तमान विधायक सलिल विश्नोई को कड़े संघर्ष में शिकस्त दी। अमिताभ बाजपेयी को 70,993 वोट मिले, जबकि सलिल विश्नोई 65,270 वोट जुटा पाए। सपा उम्मीदवार ने यह मुकाबला 5,723 मतों के अंतर से जीता। उस चुनाव में बीएसपी का जनाधार काफी कमजोर हुआ और उसके उम्मीदवार ए. हसीव को सिर्फ 6,061 वोट मिले। प्रदेश स्तर पर सपा और कांग्रेस का गठबंधन होने के बावजूद आर्यनगर सीट पर कांग्रेस ने अपना अलग प्रत्याशी खड़ा किया था। कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद कुमार जायसवाल 1,596 मत पाकर चौथे पायदान पर रहे।
2022 में अमिताभ बाजपेयी ने दर्ज की लगातार दूसरी जीत
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के अमिताभ बाजपेयी ने अपनी जीत का सिलसिला कायम रखा। उन्होंने कुल 76,897 मत हासिल करके भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी सुरेश अवस्थी को 7,924 वोटों के अंतर से हराया। सुरेश अवस्थी को कुल 68,973 वोट मिले थे। इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रमोद कुमार जायसवाल 3,309 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। वहीं बहुजन समाज पार्टी की स्थिति और भी कमजोर हुई और उसके उम्मीदवार आदित्य जायसवाल को केवल 1,387 वोट मिले, जिससे वह चौथे स्थान पर सिमट गए।
आर्यनगर सीट पर तीन दशकों के चुनावी परिणाम का लेखा-जोखा
आर्यनगर सीट के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो हर चुनाव में विभिन्न दलों के बीच कड़ा मुकाबला रहा है। 1991 में बीजेपी के सत्यदेव पचौरी 29,964 वोट पाकर जीते, जबकि आईएमएल के मोहम्मद सुलेमान 19,859 वोट पाकर 10,105 मतों से हारे। 1993 में बीएसपी के महेश चंद्र 45,981 वोट लेकर विजयी हुए और बीजेपी के सत्यदेव पचौरी 40,913 वोटों के साथ 5,068 मतों से पीछे रह गए। 1996 में सपा के मुश्ताक सोलंकी ने 39,531 वोट जुटाकर बीजेपी के सत्यदेव पचौरी को 2,562 वोटों से मात दी, जिन्हें 36,969 वोट मिले थे। 2002 में सपा के मुश्ताक सोलंकी 46,448 वोट पाकर जीते और बीजेपी के अनंत मिश्र अंटू 19,132 वोटों के साथ 27,316 मतों से हारे। 2007 में सपा के इरफान सोलंकी ने 36,376 वोट लेकर जीत हासिल की और बीजेपी के हरीश मटरेजा 13,173 मतों के साथ 23,203 वोटों से पराजित हुए। 2012 में बीजेपी के सलिल विश्नोई 51,200 वोट पाकर जीते और सपा के जितेंद्र बहादुर सिंह 35,789 वोट पाकर 15,411 मतों से हारे। 2017 में सपा के अमिताभ बाजपेयी 70,993 वोट लेकर विजयी रहे और बीजेपी के सलिल विश्नोई 65,270 वोटों के साथ 5,723 मतों से पीछे रहे। 2022 में सपा के अमिताभ बाजपेयी 76,897 वोट लेकर फिर जीते, जबकि बीजेपी के सुरेश अवस्थी 68,973 वोट पाकर 7,924 मतों से हार गए।
2027 के चुनाव में जातीय समीकरण और राजनीतिक परिस्थितियां
आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र की सामाजिक बनावट पर गौर करें तो यहां मुस्लिम, वैश्य और ब्राह्मण वर्ग के मतदाता चुनाव परिणाम तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साल 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के सामने अपने इस मजबूत गढ़ को बचाने और मौजूदा विधायक के जरिए जीत की हैट्रिक लगाने की चुनौती रहेगी। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी इस सीट पर दोबारा कब्जा जमाने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है। 2027 के समर में उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय नागरिक समस्याएं और विभिन्न जातियों की लामबंदी नतीजे तय करने में निर्णायक साबित होंगे। इस चुनाव में एक तरफ बीजेपी होगी, तो दूसरी तरफ सपा और कांग्रेस के गठबंधन की सीधी चुनौती देखने को मिल सकती है। हाल के चुनावी रुझानों को देखते हुए बीएसपी इस क्षेत्र में मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की स्थिति में नजर नहीं आ रही है।



















