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पलवल में 'मिस्टर बिरयानी' का बढ़ा क्रेज, नौकरी जाने के बाद उत्तराखंड की उमा और उनके पति ने पनीर ग्रेवी से बनाई नई पहचानहरियाणा
18 सित॰ 2026, 5:39 pm (4 दिन पहले)· 2

पलवल में 'मिस्टर बिरयानी' का बढ़ा क्रेज, नौकरी जाने के बाद उत्तराखंड की उमा और उनके पति ने पनीर ग्रेवी से बनाई नई पहचान

हरियाणा के पलवल में एक दंपत्ति ने नौकरी जाने के बाद सड़क किनारे बिरयानी की रेहड़ी लगाना शुरू किया था, जो आज अपनी अनोखी पनीर ग्रेवी के कारण पूरे दिल्ली-एनसीआर में मशहूर हो चुका है।

हरियाणा के पलवल जिले में इन दिनों एक खास जायके का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। यहाँ 'मिस्टर बिरयानी' नाम की एक छोटी सी दुकान पर खान-पान के शौकीनों का भारी जमावड़ा लगा रहता है। इस दुकान का स्वाद इतना लाजवाब है कि इसके दीवाने केवल स्थानीय लोग ही नहीं हैं, बल्कि काफी दूर-दूर से लोग यहाँ खिंचे चले आते हैं। फरीदाबाद, गुरुग्राम, नोएडा और देश की राजधानी दिल्ली सहित पूरे दिल्ली-एनसीआर से लोग विशेष रूप से इस बिरयानी का स्वाद चखने के लिए पलवल पहुँच रहे हैं। पिछले ढाई वर्षों के दौरान इस दुकान ने सफलता की एक नई कहानी लिखी है, जिसे एक पति-पत्नी की जोड़ी मिलकर चला रही है। आइए जानते हैं कि कैसे एक डांस टीचर और एक असिस्टेंट एचआर ने मिलकर इस मशहूर स्वाद की नींव रखी।

कठिन परिस्थितियों से उपजा स्वरोजगार का विचार

इस दुकान का संचालन करने वाली उमा बताती हैं कि जीवन में एक ऐसा वक्त आया जब उन्हें बेहद कठिन दौर से गुजरना पड़ा। उनके पति पहले एक स्कूल में डांस टीचर के रूप में काम करते थे। किसी कारणवश स्कूल से उनकी डांस टीचर की नौकरी छूट गई, जिससे परिवार के सामने अचानक आर्थिक संकट खड़ा हो गया। ऐसे कठिन समय में कोई दूसरा रास्ता न दिखने पर, उन्होंने शुरुआत में मजबूरी में सड़क किनारे बिरयानी की रेहड़ी लगाने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने इस संकट को एक अवसर में बदलने की ठानी। उमा ने सोचा कि क्यों न इस छोटे से काम को आगे बढ़ाया जाए और इसे ही अपना मुख्य व्यवसाय बनाया जाए। इसके बाद वह भी अपने पति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम में जुट गईं। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाने लगी और उनकी बिरयानी की दुकान प्रसिद्ध होने लगी।

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कॉर्पोरेट की दुनिया छोड़कर संभाली दुकान की जिम्मेदारी

उमा की शैक्षणिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि काफी अलग रही है। उन्होंने बीए पॉलिटिकल साइंस से अपनी पढ़ाई पूरी की है। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के कॉर्पोरेट सेक्टर में भी काम किया था। वह दिल्ली में एक टेलीकॉलर के रूप में काम कर चुकी हैं और इसके अलावा उन्होंने असिस्टेंट एचआर के पद पर भी अपनी सेवाएं दी थीं। उमा और उनके पति का रिश्ता भी बेहद दिलचस्प है। उत्तराखंड की मूल निवासी उमा और पलवल के रहने वाले उनके पति की मुलाकात एक डांस कॉम्पिटिशन के दौरान हुई थी। डांस के इसी साझा शौक के जरिए दोनों एक-दूसरे के करीब आए और आखिरकार साल 2020 में दोनों ने प्रेम विवाह (लव मैरिज) कर लिया। जब जीवन में कठिन समय आया, तो उमा ने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी के अनुभव और योग्यता को पीछे छोड़कर अपने पति के व्यवसाय को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया।

स्वाद का अनोखा सीक्रेट: पनीर वाली खास ग्रेवी

उमा के अनुसार, उनकी बिरयानी की सबसे बड़ी खासियत और सफलता का मुख्य राज उसकी अनोखी ग्रेवी है। वे जो ग्रेवी तैयार करती हैं, वह पनीर वाली होती है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाली बिरयानी के साथ कोई भी पनीर की ग्रेवी नहीं परोसता है। लोगों को उनकी यह अनोखी पनीर वाली ग्रेवी बेहद पसंद आती है और यही वजह है कि ग्राहक यहां बार-बार खिंचे चले आते हैं। समय की पाबंदी और काम के प्रति समर्पण भी इनकी सफलता का बड़ा कारण है। यह दंपत्ति रोजाना सुबह 8 बजे ही अपनी दुकान खोल देता है और दोपहर 3 बजे तक उनकी दुकान पर ग्राहकों की सेवा की जाती है। उमा हर दिन लगभग 15 किलो चावल की बिरयानी तैयार करके दुकान पर लाती हैं और दोपहर होते-होते पूरी बिरयानी खत्म हो जाती है। इतनी मशहूर होने के बावजूद, यहां बिरयानी की शुरुआती कीमत मात्र 40 रुपये रखी गई है ताकि हर कोई इसका आनंद ले सके।

ग्राहकों की जुबानी 'मिस्टर बिरयानी' की तारीफ

इस दुकान के स्वाद की गवाही यहाँ आने वाले ग्राहक खुद देते हैं। पहली बार यहाँ बिरयानी खाने पहुँचे स्थानीय निवासी विनोद ने बताया कि यहाँ की बिरयानी खाने के बाद सचमुच मजा आ गया और इसका स्वाद बेहद लाजवाब है। वहीं, अक्सर यहाँ आने वाले नियमित ग्राहक लोकेश कुमार ने साझा किया कि वे यहाँ लगातार आते रहते हैं क्योंकि ऐसा अनोखा स्वाद उन्हें और कहीं नहीं मिलता। एक अन्य ग्राहक राहुल ने भी यहाँ के बेहतरीन जायके की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कई अन्य जगहों पर भी बिरयानी खाई है, लेकिन पलवल की इस दुकान का स्वाद बाकी सभी जगहों से बिल्कुल अलग और लाजवाब है।

सवाल-जवाब

पलवल की इस मशहूर बिरयानी दुकान का क्या नाम है?
इस दुकान का नाम 'मिस्टर बिरयानी' है और इसे एक दंपत्ति मिलकर चला रहे हैं।
इस दुकान की बिरयानी में ऐसा क्या खास है जो लोग इतनी दूर से आते हैं?
इस बिरयानी की सबसे बड़ी खासियत इसके साथ मिलने वाली विशेष पनीर वाली ग्रेवी है, जो आमतौर पर कहीं और नहीं मिलती।
दुकान की मालकिन उमा और उनके पति पहले क्या काम करते थे?
उमा पहले दिल्ली में टेलीकॉलर और असिस्टेंट एचआर थीं, जबकि उनके पति एक स्कूल में डांस टीचर के रूप में कार्यरत थे।
इस दुकान के खुलने का समय और बिरयानी की शुरुआती कीमत क्या है?
यह दुकान रोजाना सुबह 8 बजे खुलती है और दोपहर 3 बजे तक रहती है। यहाँ बिरयानी की शुरुआती कीमत मात्र 40 रुपये है।
उमा मूल रूप से कहाँ की रहने वाली हैं और उनके पति कहाँ के निवासी हैं?
उमा मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली हैं, जबकि उनके पति हरियाणा के पलवल के निवासी हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·3 दिन पहले

उमा और उनके पति की यह कहानी केवल संघर्ष से सफलता तक की दास्तान नहीं है, बल्कि यह इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे आज का 'स्ट्रीट फ़ूड' कल्चर डिजिटल दौर में सोशल मीडिया के ज़रिए तेज़ी से वायरल हो रहा है। जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर के लोग अनोखी पनीर ग्रेवी के स्वाद के लिए पलवल का रुख़ कर रहे हैं, वह इस बात का संकेत है कि ऑरिजिनल और इनोवेटिव फूड कॉन्सेप्ट्स आज के पॉप कल्चर का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं। आने वाले समय में ऐसे स्टार्टअप्स के लिए ओटीटी या फ़ूड-बेस्ड रियलिटी शोज़ में भी बड़े अवसर खुल सकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

यह सफलता की कहानी केवल एक रेहड़ी की नहीं, बल्कि रोजगार सृजन और ग्रामीण-शहरी गतिशीलता का बड़ा उदाहरण है। जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर से लोग पलवल आ रहे हैं, वह टियर-2 और टियर-3 शहरों में स्वरोजगार की आर्थिक क्षमता को रेखांकित करता है। कॉर्पोरेट सेक्टर से निकलकर स्ट्रीट वेंडिंग में आना और नीतियां न होने के बावजूद खुद को स्थापित करना, देश में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता को दर्शाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

यह कहानी सिर्फ जायके की नहीं, बल्कि देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में उभरते सूक्ष्म उद्यमों की आर्थिक ताकत को दर्शाती है। जिस तरह कॉर्पोरेट अनुभव का उपयोग करके इस दंपत्ति ने अपने व्यवसाय को ब्रांड में बदला है, वह अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण और औपचारिकरण की संभावनाओं को मजबूत करता है। आने वाले समय में ऐसे स्टार्टअप्स के लिए छोटे पैमाने पर आसान ऋण और वित्तीय समावेशन ही इस स्थानीय विकास को राष्ट्रीय स्तर के सप्लाई चेन मॉडल में बदल सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

यह सफलता दर्शाती है कि विपरीत परिस्थितियों में वैध स्वरोजगार और उद्यमशीलता न केवल आजीविका बचाती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देती है। ऐसे मामलों में बिना लाइसेंस या स्ट्रीट वेंडिंग नियमों के उल्लंघन जैसे प्रशासनिक मुद्दों पर भी ध्यान देना आवश्यक हो जाता है ताकि यह व्यावसायिक मॉडल दीर्घकालिक रूप से सुरक्षित और कानूनी रूप से टिकाऊ बना रहे।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

उद्यमिता और स्वरोजगार के इस मॉडल को ज़मीनी स्तर पर प्रशासनिक और नीतिगत सहयोग की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में स्ट्रीट वेंडिंग एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन न होने के कारण छोटे कारोबारियों को लगातार अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। यदि स्थानीय प्रशासन ऐसे उभरते हुए उद्यमों के लिए वेंडिंग जोन का सही निर्धारण करे और लाइसेंस प्रक्रिया को सुगम बनाए, तो यह क्षेत्रीय आजीविका सुरक्षा का एक बड़ा मॉडल बन सकता है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

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