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पाली के बांता गांव में तेंदुए की दहशत, ड्रोन कैमरे से तलाश में जुटा वन विभागराजस्थान
10 सित॰ 2026, 7:14 pm (15 दिन पहले)· 2

पाली के बांता गांव में तेंदुए की दहशत, ड्रोन कैमरे से तलाश में जुटा वन विभाग

पाली के आऊवा क्षेत्र के बांता गांव में हिंगलाज माता मंदिर की पहाड़ी पर तेंदुए की आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वन विभाग ने ड्रोन कैमरों और पिंजरे की मदद से सर्च अभियान तेज कर दिया है।

पाली जिले की ऐतिहासिक भूमि के रूप में पहचान रखने वाला आऊवा क्षेत्र इन दिनों एक नए और गंभीर डर के साए में जीने को मजबूर है। वीरों की इस धरती और इसके आसपास के गांवों में इन दिनों एक तेंदुए की लगातार मौजूदगी ने लोगों की नींद उड़ा दी है। आऊवा के नजदीक स्थित बांता गांव के पास बनी सेहवाज हिंगलाज माता मंदिर की पहाड़ी पर हाल ही में तेंदुए को घूमते हुए देखा गया, जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। क्रांतिधरा के नाम से मशहूर इस क्षेत्र के बांता गांव में इस वन्यजीव की आवाजाही से स्थानीय निवासियों के मन में यह आशंका घर कर गई है कि कहीं यह जानवर किसी इंसान को अपना शिकार न बना ले। ड्रोन कैमरे में तेंदुए की तस्वीरें कैद होने के बाद वन विभाग ने अपनी खोजबीन तेज कर दी है और पूरे इलाके में सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

वन विभाग की तलाश और सर्च अभियान

जैसे ही इस घटना की खबर प्रशासन तक पहुंची, वन विभाग की टीम ने तुरंत हरकत में आते हुए घटनास्थल का रुख किया और व्यापक स्तर पर तलाश अभियान शुरू कर दिया। मारवाड़ जंक्शन के क्षेत्रीय वन अधिकारी सुरेंद्रसिंह के मुताबिक, घटनास्थल का इलाका बेहद पथरीला और दुर्गम है, जिसकी वजह से तेंदुए के बिल्कुल ताजे पगचिह्न तो जमीन पर नहीं मिल पाए हैं, लेकिन पहाड़ी के पास बने एक जलस्रोत के आसपास पुराने निशान जरूर देखे गए हैं। इन्हीं संकेतों को आधार बनाते हुए तेंदुए की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए जंगल में विशेष ट्रैक कैमरे लगाए जा रहे हैं ताकि उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

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पिंजरा और ड्रोन से निगरानी

त तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने और पकड़ने के लिए वन विभाग ने पानी के मुख्य स्रोत के पास एक बड़ा पिंजरा स्थापित किया है, जिसमें शिकार भी रखा गया है ताकि जानवर उसकी तरफ आकर्षित हो सके। विभाग के कर्मचारी उम्मेदसिंह और मुकेश सहित पूरी रेंज की टीम लगातार मैदानी इलाकों और जंगलों में गश्त कर रही है। इसके अलावा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ड्रोन कैमरों की मदद से पहाड़ी की चोटियों और आसपास फैली घनी झाड़ियों में तेंदुए के मूवमेंट पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी तरह की अनहोनी से पहले ही कदम उठाया जा सके।

ग्रामीणों और पशुपालकों के लिए चेतावनी

इलाके में तेंदुए की लगातार हलचल को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने बांता और आऊवा के सभी ग्रामीणों के लिए एक जरूरी चेतावनी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे पूरी तरह सतर्क रहें, अकेले बाहर निकलने से बचें और विशेष तौर पर रात के समय अत्यधिक सावधानी बरतें। इसके अलावा क्षेत्र के पशुपालकों को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने मवेशियों को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थानों पर बांधकर रखें ताकि किसी भी अप्रिय या खतरनाक घटना से बचाव किया जा सके।

पिछले तीन महीनों से बना हुआ है खौफ

क्षेत्र के स्थानीय किसानों और ग्रामीणजनों का कहना है कि यह तेंदुआ पिछले तीन महीनों से इस पूरे इलाके में लगातार देखा जा रहा है और अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक इस जानवर ने केवल छोटे वन्यजीवों को ही अपना शिकार बनाया है और किसी भी इंसान के ऊपर सीधा हमला नहीं किया है। इसके बावजूद रिहायशी आबादी और धार्मिक स्थल के इतने करीब एक खतरनाक शिकारी का यूं खुलेआम घूमना ग्रामीणों के मन में गहरा डर पैदा कर रहा है। अब हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि वन विभाग जल्द से जल्द इस तेंदुए को पकड़ने में कामयाब हो ताकि इलाके के लोग भयमुक्त होकर अपना जीवन जी सकें।

सवाल-जवाब

तेंदुआ पाली के किस इलाके में देखा गया है?
तेंदुआ पाली जिले के आऊवा क्षेत्र के पास स्थित बांता गांव की सेहवाज हिंगलाज माता मंदिर की पहाड़ी पर देखा गया है।
तेंदुए की मौजूदगी का पता कैसे चला?
ड्रोन कैमरे में तेंदुए की तस्वीरें कैद होने के बाद उसकी मौजूदगी का खुलासा हुआ और वन विभाग हरकत में आया।
वन विभाग तेंदुए को पकड़ने के लिए क्या कर रहा है?
वन विभाग ने पानी के स्रोत के पास शिकारयुक्त पिंजरा लगाया है और ट्रैक कैमरों तथा ड्रोनों से निगरानी की जा रही है।
क्या तेंदुए ने अब तक किसी इंसान पर हमला किया है?
अब तक इस तेंदुए ने केवल छोटे वन्यजीवों का शिकार किया है और किसी भी इंसान पर हमला नहीं किया है।
ग्रामीणों और पशुपालकों के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
प्रशासन ने ग्रामीणों को अकेले बाहर न निकलने और पशुपालकों को मवेशी सुरक्षित स्थानों पर बांधने की सलाह दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

पाली के आऊवा क्षेत्र में तीन महीने से तेंदुए की मौजूदगी और वन विभाग द्वारा ड्रोन व पिंजरे का उपयोग यह दर्शाता है कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों पर बढ़ते दबाव के कारण मानव-पशु संघर्ष तेजी से बढ़ रहे हैं। चूंकि क्षेत्र का भूभाग पथरीला है और केवल पुराने निशान मिले हैं, इसलिए केवल गश्त पर्याप्त नहीं होगी। प्रशासन को थर्मल इमेजिंग ड्रोन और सामुदायिक वॉच ग्रुप की मदद लेनी चाहिए ताकि किसी भी बड़ी दुर्घटना से पहले इस वन्यजीव का सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वन्यजीवों की बढ़ती घुसपैठ से कृषि और पशुपालन दोनों बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। मवेशियों को सुरक्षित रखने की चेतावनी के बावजूद किसानों का खुले खेतों में जाना जोखिम भरा है। यदि वन विभाग ने जल्द ही इस वन्यजीव को नहीं पकड़ा, तो यह स्थिति मानव-वन्यजीव संघर्ष के एक बड़े संकट में बदल सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनजीवन दोनों पर गहरा असर पड़ेगा।

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