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पनीर की भुर्जी को भूल जाइए, घर पर इस आसान तरीके से बनाएं मूली और पत्तों की स्वादिष्ट देसी भुर्जीराजस्थान
16 सित॰ 2026, 8:51 pm (8 दिन पहले)· 0

पनीर की भुर्जी को भूल जाइए, घर पर इस आसान तरीके से बनाएं मूली और पत्तों की स्वादिष्ट देसी भुर्जी

मूली और उसके ताजे पत्तों से बनने वाली यह देसी भुर्जी खाने में बेहद स्वादिष्ट होने के साथ-साथ झटपट तैयार हो जाती है। इसे घर में रखे सामान्य मसालों और सरसों के तेल से आसानी से बनाया जा सकता है।

अगर आप रोजाना की सब्जियों से बोर हो चुके हैं और कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो पारंपरिक पनीर की भुर्जी को छोड़कर इस बार मूली और उसके पत्तों की देसी भुर्जी बनाकर देख सकते हैं। मूली के पत्तों से तैयार होने वाली यह डिश स्वाद में बहुत ही शानदार होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बनाने के लिए आपको बाजार से किसी खास सामान की जरूरत नहीं पड़ती, बल्कि यह घर की रसोई में मौजूद बुनियादी मसालों से ही कम समय में बनकर तैयार हो जाती है। घर के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इसका अनोखा स्वाद बहुत पसंद आता है।

सब्जी बनाने की तैयारी और सामग्री की सफाई

इस स्वादिष्ट भुर्जी को बनाने की शुरुआत सही सफाई से होती है। सबसे पहले बाजार से लाई गई ताजी मूली और उसके हरे पत्तों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। मूली के पत्तों और जड़ों में अक्सर काफी मिट्टी जमी होती है, इसलिए इन्हें साफ करना बहुत जरूरी है ताकि खाने में किरकिरापन न आए। अच्छी तरह धोने के बाद मूली और उसके पत्तों को बारीक छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। सही आकार में काटने से उबालने और पकाने की प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है।

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कुकर में उबालने की प्रक्रिया

अब कटे हुए टुकड़े कुकर में डालें और जरूरत के अनुसार पानी डालकर गैस पर चढ़ा दें। कुकर में लगभग चार सीटी आने तक इसे पकाएं। जब मूली और उसके पत्ते पूरी तरह से नरम और मुलायम हो जाएं, तब गैस बंद कर दें। कुकर का प्रेशर पूरी तरह से खत्म होने के बाद उबली हुई सामग्री को बाहर निकाल लें। इसके बाद सबसे अहम कदम यह है कि मूली और पत्तों के अंदर मौजूद अतिरिक्त पानी को हाथों से अच्छी तरह निचोड़कर पूरी तरह अलग कर दें।

कढ़ाई में तड़का लगाने का तरीका

अब गैस पर एक कढ़ाई रखें और उसमें लगभग दो चम्मच सरसों का तेल डालकर गर्म करें। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब इसमें जीरा डालें। इसके तुरंत बाद बारीक कटी हुई हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड के लिए भून लें ताकि इसका तीखापन तेल में आ जाए। अब पानी निचोड़ी हुई उबली हुई मूली और उसके पत्तों को कढ़ाई में डाल दें और करछी की मदद से अच्छी तरह चलाएं ताकि मसालों का बेस तैयार हो सके।

मसाले मिलाने और पकाने के चरण

कढ़ाई में मौजूद सामग्री में हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला, लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाएं। सभी मसालों को मूली और पत्तों के साथ अच्छी तरह मिला लें ताकि हर एक बाइट में मसाले का स्वाद आए। अब इसे धीमी आंच पर करीब 5 से 7 मिनट तक पकने दें। इस दौरान बीच-बीच में भुर्जी को लगातार चलाते रहें ताकि मसाले नीचे न लगें और आपस में अच्छी तरह रच-बस जाएं।

परोसने का तरीका और खासियत

कुछ ही मिनटों में आपकी गरमागरम और स्वादिष्ट मूली के पत्तों की देसी भुर्जी बनकर तैयार हो जाती है। इसे आप गर्मागर्म सादी रोटी या पराठे के साथ प्लेट में परोस सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में यह सब्जी विशेष रूप से बुजुर्गों के बीच बहुत लोकप्रिय है। खेतों से ताजी मूली तोड़कर जब यह बनाई जाती है, तो इसका स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है। यह अनूठी रेसिपी स्वाद के साथ-साथ मूली के पौष्टिक पत्तों को अपने दैनिक भोजन में शामिल करने का एक बेहतरीन और सरल माध्यम है।

सवाल-जवाब

मूली की भुर्जी बनाने के लिए किन मुख्य सामग्रियों की जरूरत होती है?
इसके लिए मूली, उसके हरे पत्ते, सरसों का तेल, जीरा, हरी मिर्च और बुनियादी मसालों की आवश्यकता होती है।
कुकर में मूली को कितनी सीटी आने तक पकाना चाहिए?
कुकर में लगभग चार सीटी आने तक मूली और उसके पत्तों को पकाना चाहिए जब तक वे नरम न हो जाएं।
उबालने के बाद क्या करना जरूरी होता है?
उबालने के बाद मूली और पत्तों के अतिरिक्त पानी को हाथों से अच्छी तरह निचोड़कर अलग करना जरूरी है।
इस भुर्जी को किसके साथ परोसा जा सकता है?
इस स्वादिष्ट भुर्जी को गर्मागर्म रोटी या पराठे के साथ परोसा जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

यह पारंपरिक व्यंजन उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की खाद्य संस्कृति और कृषि आधारित जीवनशैली का एक सजीव उदाहरण है। शहरी क्षेत्रों में फास्ट फूड और महंगे विकल्पों के बीच इस तरह की मौसमी और स्थानीय सब्जियों की रेसिपी खान-पान की हमारी उन पुरानी जड़ों को मजबूत करती हैं, जो स्वास्थ्य और किफायती पोषण दोनों दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

यह पारंपरिक रेसिपी खाद्य सुरक्षा और किफायती पोषण के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उपज का यह सदुपयोग साबित करता है कि महंगे विकल्पों के बिना भी संतुलित आहार लिया जा सकता है। शहरी जीवनशैली में इस तरह के स्थानीय व्यंजनों को अपनाना न केवल स्वास्थ्य सुधारता है, बल्कि खाद्य अपशिष्ट को भी कम करता है।

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