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परिमल नथवानी फिर बने राज्यसभा सदस्य, जानें झारखंड की राजनीति में उनकी अहमियतझारखंड
18 जून 2026, 8:27 pm (86 दिन पहले)· 4

परिमल नथवानी फिर बने राज्यसभा सदस्य, जानें झारखंड की राजनीति में उनकी अहमियत

उद्योगपति परिमल नथवानी ने चौथी बार राज्यसभा में प्रवेश किया है, जो झारखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ दर्शाता है। उनकी जीत ने कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका पेश किया है।

रांची: झारखंड के राज्यसभा चुनाव में उद्योगपति और नेता परिमल नथवानी की चर्चा सबसे अधिक रही। वे निर्दलीय उम्मीदवार थे, लेकिन उन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त था। नथवानी ने कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर चौथी बार राज्यसभा में पहुंचने का रिकॉर्ड बनाया है, जिससे कांग्रेस को बड़ा धक्का लगा है।

झारखंड विधानसभा में 81 सदस्य हैं, जिसमें जीत के लिए 28 वोटों की आवश्यकता थी। परिमल नथवानी को 28 वैध वोट मिले, जबकि कांग्रेस के प्रणव झा को केवल 20 वोट मिले। इस चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी चर्चा का विषय बनी रही, जिसमें राजद और भाकपा (माले) के कुछ विधायकों ने भी नथवानी का समर्थन किया।

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परिमल नथवानी का जन्म गुजरात में हुआ, और वे एक प्रमुख उद्योगपति और कॉरपोरेट जगत की बड़ी हस्ती माने जाते हैं। उन्होंने अपने कारोबार के साथ-साथ राजनीति में भी एक मजबूत पहचान बनाई है। झारखंड और आंध्र प्रदेश में विकास कार्यों के लिए उनका नाम अक्सर लिया जाता है।

नथवानी का झारखंड से जुड़ाव नया नहीं है। उन्होंने 2008 में पहली बार झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा चुनाव जीता था। उस समय भी उन्हें विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला था और क्रॉस वोटिंग के जरिए 21 वोट प्राप्त किए थे।

2014 में, नथवानी ने फिर से झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार राज्यसभा में पहुंचे। इस चुनाव में भी उन्हें विभिन्न दलों के विधायकों का समर्थन मिला।

जून 2020 में, परिमल नथवानी ने आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुनाव जीता। वे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे, जिससे उन्होंने पहली बार झारखंड के बाहर किसी अन्य राज्य का प्रतिनिधित्व किया।

अब, वह फिर से झारखंड से लौट आए हैं और चौथी बार राज्यसभा के सदस्य बने हैं। इस प्रकार, परिमल नथवानी ने अब तक चार बार राज्यसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है, जिसमें से तीन बार झारखंड और एक बार आंध्र प्रदेश से चुने गए हैं। झारखंड से यह उनकी तीसरी जीत है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नथवानी की सबसे बड़ी ताकत विभिन्न दलों के नेताओं के साथ उनके अच्छे संबंध हैं। वर्षों से, उन्होंने झारखंड में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ संपर्क बनाए रखा है, जिससे उन्हें कई बार पार्टी की सीमाओं से बाहर जाकर भी समर्थन मिला है।

राज्यसभा में अपने पिछले कार्यकालों के दौरान, नथवानी ने विकास, सड़क, बिजली, आदिवासी कल्याण और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने सांसद निधि से कई विकास कार्य भी कराए, जिसमें गांवों में सड़कें, सामुदायिक भवन और अन्य परियोजनाओं पर काम शामिल है।

इस चुनाव से पहले, उनकी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ मुलाकात भी चर्चा का विषय रही थी। बाद में, उन्हें एनडीए का समर्थन मिला और वे चुनाव जीतने में सफल रहे। अपनी जीत के बाद, परिमल नथवानी ने कहा कि यह उनका चौथा राज्यसभा कार्यकाल है और झारखंड से तीसरी जीत है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी संसदीय यात्रा की शुरुआत इसी राज्य से हुई थी और यहां के लोगों से उनका विशेष लगाव है।

सवाल-जवाब

परिमल नथवानी कौन हैं?
परिमल नथवानी एक प्रमुख उद्योगपति और नेता हैं, जो हाल ही में चौथी बार राज्यसभा के सदस्य बने हैं।
उन्होंने किस पार्टी का समर्थन प्राप्त किया?
नथवानी को बीजेपी का समर्थन प्राप्त था।
उनकी जीत ने किस पार्टी को नुकसान पहुंचाया?
उनकी जीत ने कांग्रेस पार्टी को बड़ा झटका दिया है।
नथवानी का झारखंड से जुड़ाव कब से है?
नथवानी का झारखंड से जुड़ाव 2008 से है, जब उन्होंने पहली बार राज्यसभा चुनाव जीता था।
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