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फरीदाबाद का तिलपत गांव: पांडव कालीन बाबा सूरदास मंदिर में मथुरा-वृंदावन जैसी भव्य जन्माष्टमी, उमड़ते हैं लाखों श्रद्धालुहरियाणा
2 सित॰ 2026, 3:39 pm (20 दिन पहले)· 0

फरीदाबाद का तिलपत गांव: पांडव कालीन बाबा सूरदास मंदिर में मथुरा-वृंदावन जैसी भव्य जन्माष्टमी, उमड़ते हैं लाखों श्रद्धालु

फरीदाबाद के तिलपत गांव स्थित बाबा सूरदास मंदिर में 4 सितंबर को जन्माष्टमी का उत्सव मथुरा और वृंदावन की तर्ज पर धूमधाम से मनाया जाएगा। पांडव काल से जुड़े इस ऐतिहासिक मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व 4 सितंबर को पूरे देश में अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। इस शुभ अवसर पर यदि आप अत्यधिक भीड़ या दूरी के कारण मथुरा, गोकुल या वृंदावन जाने की योजना नहीं बना पा रहे हैं, तो फरीदाबाद का ऐतिहासिक तिलपत गांव आपके लिए एक अत्यंत सुलभ और दिव्य विकल्प साबित हो सकता है। फरीदाबाद शहर से ज्यादा दूर स्थित न होने के कारण दिल्ली NCR और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों के लिए यहां पहुंचना बेहद आसान है। तिलपत गांव में स्थित प्रसिद्ध बाबा सूरदास मंदिर में जन्माष्टमी का पावन उत्सव ठीक उसी भव्यता, भक्ति और परंपरा के साथ मनाया जाता है, जैसी चमक ब्रजभूमि के वृंदावन और मथुरा में देखने को मिलती है। इस पावन अवसर पर श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की मनमोहक झलकियां देखने और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए न केवल स्थानीय लोग, बल्कि पड़ोसी राज्यों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

पांडव काल से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व और तिलपत गांव का पुनर्वास

तिलपत गांव की ऐतिहासिक और पौराणिक महत्ता का उल्लेख महाभारत काल से मिलता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध से पूर्व पांडवों ने कौरवों से शांति प्रस्ताव के तहत जो पांच गांव मांगे थे, उनमें से पांचवां प्रमुख गांव तिलपत ही बताया जाता है। पिछले 18 वर्षों से बाबा सूरदास मंदिर में निरंतर सेवा दे रहे नारायण दास के अनुसार, पूज्य संत श्री किशोरी शरणजी महाराज (जिन्हें बाबा सूरदास के नाम से जाना जाता था) अक्सर इस स्थल के पौराणिक संदर्भों के बारे में बताया करते थे। उनके अनुसार पांडव इस पवित्र भूमि पर आए थे और उन्होंने यहां विधिवत यज्ञ एवं हवन संपन्न किया था, जिससे यह स्थान अत्यंत सिद्ध माना जाता है।

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इतिहास के एक कालखंड में तिलपत गांव पूरी तरह उजड़ चुका था और निर्जन हो गया था। इसके बाद बाबा सूरदास की असीम कृपा और आध्यात्मिक ऊर्जा से इस क्षेत्र का पुनर्वास संभव हुआ। संत श्री किशोरी शरणजी महाराज ने बाहर के क्षेत्रों से लोगों को लाकर यहां बसाया और तिलपत गांव को एक नए स्वरूप में पुनर्जीवित किया। उल्लेखनीय है कि संत सूरदास जी महाराज के पूरे देश में लगभग 35 आश्रम स्थित बताए जाते हैं, जिनमें से फरीदाबाद का यह तिलपत धाम विशेष आस्था और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

वृंदावन जैसी भव्यता और सप्ताह भर चलने वाले धार्मिक आयोजन

तिलपत के बाबा सूरदास मंदिर में जन्माष्टमी पर्व की तैयारियां मुख्य तिथि से करीब एक सप्ताह पहले ही बड़े पैमाने पर शुरू कर दी जाती हैं। पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और सुगंधित पुष्पों से सजाया जाता है। पर्व के दिन से लेकर राधा अष्टमी तक मंदिर में लगातार अखंड कीर्तन, भजन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पश्चात राधा अष्टमी के पावन अवसर पर भी यहां बहुत बड़ा आयोजन होता है, जिसमें भव्य धार्मिक झांकी निकाली जाती है और पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल रहता है।

जन्माष्टमी के दौरान तिलपत गांव का वातावरण पूरी तरह से श्रीकृष्ण भक्ति से सराबोर हो जाता है। मथुरा, गोकुल और वृंदावन की तर्ज पर होने वाले भजनों, शंखनाद और आरती के कारण श्रद्धालुओं को ब्रजमंडल में होने का जीवंत अहसास होता है। यही कारण है कि दिल्ली NCR सहित अन्य राज्यों से आने वाले लोग हर साल इस अलौकिक उत्सव का हिस्सा बनते हैं।

विशाल परिसर और भक्तों की सुविधा: 1 किलोमीटर में फैला मंदिर

जन्माष्टमी जैसे बड़े पर्वों पर प्रायः मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे कई बार स्थान की कमी हो जाती है और भक्तों को दर्शन के लिए लंबी प्रतीक्षा व कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, तिलपत स्थित बाबा सूरदास मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को ऐसी समस्याओं से राहत मिलती है। नारायण दास बताते हैं कि मंदिर का परिसर इतना विशाल है कि लाखों श्रद्धालुओं के आने के बावजूद यहां स्थान की कोई कमी महसूस नहीं होती।

बाबा सूरदास मंदिर से लेकर बंसी वाले मंदिर तक का पूरा क्षेत्र लगभग 1 किलोमीटर के दायरे में विस्तृत है। गांव के आसपास की अधिकांश भूमि बाबा सूरदास के मंदिर परिसर से जुड़ी हुई बताई जाती है। इस वृहद भूभाग और खुले स्थान की वजह से जन्माष्टमी के मुख्य दिन विशाल जनसैलाब जुटने के बाद भी श्रद्धालुओं को दर्शन और परिक्रमा करने में किसी प्रकार की अव्यवस्था या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। जन्माष्टमी के अलावा, आम दिनों में भी विशेषकर प्रत्येक मंगलवार को बाबा सूरदास के दर्शन हेतु मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद के तिलपत गांव में जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी?
तिलपत गांव स्थित बाबा सूरदास मंदिर में जन्माष्टमी का मुख्य पर्व 4 सितंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा।
तिलपत गांव का पौराणिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों द्वारा मांगे गए पांच गांवों में से एक गांव तिलपत था, जहां पांडवों ने यज्ञ किया था।
तिलपत में जन्माष्टमी पर धार्मिक कार्यक्रम कब तक चलते हैं?
यहां जन्माष्टमी से शुरू होकर राधा अष्टमी तक लगातार अखंड कीर्तन चलता है और राधा अष्टमी पर भव्य झांकी निकाली जाती है।
बाबा सूरदास मंदिर परिसर कितना बड़ा है?
बाबा सूरदास मंदिर से लेकर बंसी वाले मंदिर तक का परिसर लगभग 1 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है।
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