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फरीदाबाद में मिट्टी की गणेश मूर्तियां पानी में मिनटों में घुलती हैं और 70 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैंहरियाणा
12 सित॰ 2026, 10:12 pm (9 दिन पहले)· 3

फरीदाबाद में मिट्टी की गणेश मूर्तियां पानी में मिनटों में घुलती हैं और 70 प्रतिशत तक सस्ती मिल रही हैं

फरीदाबाद के सेक्टर 17 बाईपास रोड पर मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे लगे स्टॉल पर मिट्टी की गणेश जी की मूर्तियां 70 प्रतिशत तक की छूट पर बिक रही हैं. बिना रंग वाली मूर्तियां पानी में तीन से चार मिनट में घुलती हैं और खरीदार दिल्ली एनसीआर तथा गुरुग्राम से भी आ रहे हैं.

फरीदाबाद में गणेश चतुर्थी की खरीदारी के दौरान मिट्टी की ऐसी गणेश जी की मूर्तियां सामने आई हैं, जिनकी मिट्टी पानी से तुरंत नरम होकर कुछ मिनटों में घुल जाती है. सेक्टर 17 बाईपास रोड पर मुंबई एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले रास्ते के किनारे लगे स्टॉल पर 70 प्रतिशत तक की छूट भी मिल रही है, जिसने दिल्ली एनसीआर और गुरुग्राम के खरीदारों को आकर्षित किया है.

फरीदाबाद के बाजारों में छूट ने समेटी खरीदारों की भीड़

गणेश चतुर्थी के आते ही फरीदाबाद के बाजारों में रौनक लौट आई है और शहर के कई हिस्सों में मूर्तियां बिक रही हैं. बाईपास से मुंबई एक्सप्रेसवे की तरफ जाने पर राजस्थान से आए कलाकार अपनी मूर्तियां बेचते मिल जाते हैं, जबकि फरीदाबाद के अंदरूनी बाजारों में भी खरीदारी जारी है. इनमें सेक्टर 17 बाईपास रोड पर लगा स्टॉल सबसे सस्ती मूर्तियों और कई अलग डिज़ाइनों के लिए खासा दिख रहा है.

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स्टॉल पर 70 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है और यही मुख्य कारण है कि लोग खरीदारी के लिए यहां आ रहे हैं. फरीदाबाद में लगातार बारिश के कारण बिक्री थोड़ी कम हुई है, फिर भी कलाकार कारोबार से खुश हैं. छूट के बाद भी मूर्तियां अच्छी कीमत पर निकल रही हैं और दुकानदार के अनुसार कोई ग्राहक खाली हाथ नहीं लौट रहा. 10 हजार रुपये की मूर्ति 3 हजार रुपये तक में मिल सकती है. बड़े आकार की मूर्तियां भी उपलब्ध हैं, जिससे अलग-अलग जरूरतों के लिए विकल्प मौजूद हैं.

चित्तौड़ से आए रोहन राजपूत की मिट्टी वाली खासियत

दुकानदार रोहन राजपूत ने बताया कि वे राजस्थान के चित्तौड़ के रहने वाले हैं और मूर्तियां बनाने का काम करते हैं. इस बार वे फरीदाबाद में गणेश जी की मूर्तियां बेच रहे हैं. उनके पास जितनी भी मूर्तियां हैं, सभी ईको-फ्रेंडली बताई गई हैं. डिज़ाइन कोलकाता और महाराष्ट्र से लिए गए हैं और मूर्तियां भी इन्हीं दो क्षेत्रों से लाई गई हैं. इनकी खासियत यह है कि पानी में डालने पर मूर्ति चार से पांच मिनट में घुल जाती है.

रोहन के अनुसार मूर्ति बनाते समय किसी प्रकार का केमिकल इस्तेमाल नहीं किया गया. ग्राहक अधिकतम 10 फुट की मूर्ति बनवा सकते हैं और 15 फुट की मूर्ति भी ऑर्डर पर तैयार हो सकती है. दुकान पर इस समय चार फुट की गणेश जी की मूर्ति मौजूद है, जबकि ऑर्डर पर 10 से 15 फुट तक की मूर्तियां बनाने की सुविधा भी बताई गई है. मूर्तियों पर लगे वस्त्र स्टॉल वालों ने खुद पहनाए हैं. कीमतें 100 रुपये से 10 हजार रुपये तक रखी गई हैं. आमतौर पर 50 प्रतिशत तक छूट दी जा रही है, मगर जरूरत पड़ने पर यह छूट 70 प्रतिशत तक की जा सकती है.

बिना रंग वाली मूर्तियों की मांग सबसे अधिक

बिना पेंट किए यानी बिना रंग वाली गणेश जी की मूर्तियां भी स्टॉल पर रखी हैं और इनकी मांग सबसे अधिक है. रोहन ने बताया कि यह मूर्तियां पानी में जाते ही तीन से चार मिनट में घुल जाती हैं. इनमें भी किसी तरह का केमिकल नहीं है. हाल ही में बारिश हुई तो ढकी न गई मिट्टी पानी में अपने आप पिघल गई, क्योंकि उसे छुपाकर नहीं रखा गया था. यह घटना मिट्टी की खासियत दिखाती है कि पानी की बूंद पड़ते ही सतह पिघलने लगती है.

इस बार बारिश अधिक हो रही है, इसलिए पिछले साल की तुलना में बिक्री थोड़ी कम है. बारिश का असर बाहर लगे स्टॉल पर दिखता है, क्योंकि खुली मिट्टी पानी से जल्दी घुल सकती है. इसके बावजूद बिना रंग वाली मूर्तियां तेजी से बिक रही हैं और भारी छूट ने खरीदारों की रुचि बनाए रखी है.

दिल्ली एनसीआर से खरीदार और पसंद के अनुसार सजावट

रोहन के स्टॉल पर पूरे दिल्ली एनसीआर से ग्राहक आ रहे हैं. वे दूर-दराज से इसलिए आ रहे हैं क्योंकि उन्हें यहां अच्छी खासी छूट मिल जाती है और कीमतें उनके हिसाब से उचित हैं. रोहन का कहना है कि फरीदाबाद में इतनी छूट शायद ही कहीं और मिले. गुरुग्राम से भी पुराने ग्राहक मूर्तियां खरीदने उनके स्टॉल तक आते हैं.

सादा गणेश जी की मूर्ति पर ग्राहक जैसा वस्त्र पहनाना चाहते हैं, दुकान वाले वैसा ही वस्त्र पहनाकर मूर्ति देते हैं. सभी मूर्तियों को सजाकर बेचा जाता है. रोहन के अनुसार गणेश चतुर्थी से जुड़ा उनका कारोबार केवल दो दिन का है, इसलिए बची मूर्तियां निकालने के लिए छूट अधिक रखी गई है. मूर्तियां मिट्टी की और ईको-फ्रेंडली हैं, इसलिए घर में विसर्जन के बाद पानी में घुल जाती हैं. चांद पर बैठे गणेश जी के रूप वाली मूर्तियां भी स्टॉल पर हैं. ग्राहकों ने इनका ऑर्डर दिया था और उसी के बाद इन्हें तैयार किया गया.

सवाल-जवाब

मूर्तियां बेचने वाला स्टॉल फरीदाबाद में कहां है?
यह स्टॉल सेक्टर 17 बाईपास रोड पर है और मुंबई एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले मार्ग के किनारे लगा है.
70 प्रतिशत छूट का उदाहरण क्या है?
10 हजार रुपये की मूर्ति 3 हजार रुपये तक में मिल सकती है. दुकानदार ने सामान्य छूट 50 प्रतिशत तक और जरूरत पर 70 प्रतिशत तक बताई.
मिट्टी की मूर्तियां पानी में कितने समय में घुलती हैं?
सामान्य मूर्तियां चार से पांच मिनट में घुलती हैं. बिना पेंट यानी बिना रंग वाली मूर्तियां तीन से चार मिनट में घुल जाती हैं.
क्या मूर्तियों में केमिकल इस्तेमाल हुआ है?
दुकानदार के अनुसार मूर्तियों में किसी प्रकार का केमिकल इस्तेमाल नहीं किया गया. सभी मूर्तियां ईको-फ्रेंडली मिट्टी की बताई गई हैं.
मूर्तियों की कीमत और उपलब्ध आकार क्या हैं?
कीमतें 100 रुपये से 10 हजार रुपये तक हैं और चार फुट की मूर्ति उपलब्ध है. अधिकतम 10 फुट की मूर्ति और 15 फुट की मूर्ति ऑर्डर पर बन सकती है, तथा ऑर्डर सीमा 10 से 15 फुट बताई गई है.
खरीदार कहां से आ रहे हैं?
दुकानदार के अनुसार पूरे दिल्ली एनसीआर से ग्राहक आ रहे हैं. गुरुग्राम से भी पुराने ग्राहक उनके स्टॉल पर आते हैं.
ग्राहक मूर्ति को अपनी पसंद से कैसे सजवा सकते हैं?
सादा मूर्ति पर ग्राहक जैसा वस्त्र चाहते हैं, वैसा पहना दिया जाता है और सभी मूर्तियों को सजाकर दिया जाता है. चांद पर बैठे गणेश जी का डिज़ाइन भी ग्राहकों के ऑर्डर पर तैयार किया गया.
बारिश का कारोबार और मिट्टी पर क्या असर देखा गया?
लगातार बारिश से बिक्री पिछले साल की तुलना में थोड़ी कम है. ढकी न गई मिट्टी हाल की बारिश में अपने आप पिघल गई.
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