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फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट मामले में शाहनवाज राणा के ठिकानों पर ईडी का छापा, 3.6 करोड़ रुपये नकद बरामदउत्तर प्रदेश
25 अग॰ 2026, 1:38 pm (65 दिन पहले)· 2

फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट मामले में शाहनवाज राणा के ठिकानों पर ईडी का छापा, 3.6 करोड़ रुपये नकद बरामद

प्रवर्तन निदेशालय ने फर्जी बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत पूर्व विधायक शाहनवाज राणा से जुड़े 9 परिसरों पर छापेमारी कर 3.6 करोड़ रुपये की नकदी और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक चेहरे और पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद स्थित कुल नौ ठिकानों पर एक साथ रेड डाली। इस तलाशी अभियान के दौरान सूटकेस और बैग में छुपाकर रखे गए 3.6 करोड़ रुपये नकद जब्त किए गए हैं। वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) नेटवर्क से जुड़े इस मामले में जब्ती के बाद संबंधित सभी परिसरों को सील कर बंद कर दिया गया है।

सूटकेस में बंद मिले करोड़ों रुपये, दस्तावेज भी जब्त

ईडी की लखनऊ जोनल टीम ने सोमवार को इस व्यापक तलाशी अभियान की शुरुआत की थी। जांच अधिकारियों ने मुजफ्फरनगर स्थित उनके आवास 'न्यू राणा हाउस' के अलावा गाजियाबाद में 'सुधा स्टील' से जुड़े परिसरों की गहनता से जांच की। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरनगर के राणा हाउस और गाजियाबाद की व्यावसायिक फर्म से ही 3 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी नकदी पाई गई थी। नकद राशि के साथ-साथ जांच दल ने मौके से नेटवर्क से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज, बही-खाते और डिजिटल सबूत भी अपने कब्जे में लिए हैं।

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फर्जी बिलिंग और मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा नेटवर्क

जांच एजेंसी के अनुसार यह पूरी कार्रवाई फर्जी इनवॉइस और बोगस बिल तैयार करके सरकारी खजाने को चूना लगाने के आरोपों से जुड़ी है। जांच में सामने आया कि बिना किसी सामान की वास्तविक आवाजाही के ही बड़े पैमाने पर फर्जी बिल बनाकर अनुचित आईटीसी का लाभ उठाया जा रहा था। मामले की तफ्तीश में वृहद स्तर पर सर्कुलर लेनदेन, पैसों को विभिन्न खातों में तेजी से ट्रांसफर कर लेयरिंग करने और कागजी कंपनियों के माध्यम से नकद राशि निकालने की कार्यप्रणाली उजागर हुई। सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाए जाने की पुष्टि होने के बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर यह छापेमारी की।

राजनीतिक सफर और पुराने आपराधिक विवाद

शाहनवाज राणा का राजनीतिक करियर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। बाद में वह राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) में शामिल हो गए थे। इसके बाद नवंबर 2025 में उन्होंने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ग्रहण की थी। उनका परिवार भी राजनीति में सक्रिय रहा है, जिनमें उनके भाई कादिर राणा पूर्व सांसद और नूर सलीम राणा पूर्व विधायक रह चुके हैं।

शाहनवाज राणा इससे पहले भी कई विवादों और कानूनी मुकदमों में घिरे रहे हैं। साल 2025 में उनकी फर्म 'राणा स्टील्स' पर 5.39 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग और जीएसटी चोरी के मामले की जांच करने पहुंची वाणिज्य कर विभाग की टीम पर हमले का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। इसके अलावा उनके खिलाफ बिजली चोरी समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्ष 2001 में एक महिला द्वारा उनके खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास की शिकायत भी दर्ज कराई गई थी।

सवाल-जवाब

पूर्व विधायक शाहनवाज राणा के ठिकानों से कितनी नकदी जब्त की गई?
ईडी की छापेमारी के दौरान सूटकेस में बंद कुल 3.6 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए।
ईडी ने किन शहरों में छापेमारी की कार्रवाई की?
प्रवर्तन निदेशालय ने मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में स्थित कुल नौ परिसरों पर रेड मारी।
शाहनवाज राणा पर क्या मुख्य आरोप लगाए गए हैं?
उन पर फर्जी इनवॉइस के जरिए अवैध रूप से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) लेने, फर्जी कंपनियों से रकम घुमाने और मनी लॉन्ड्रिंग करने के आरोप हैं।
शाहनवाज राणा हाल में किस राजनीतिक दल से जुड़े थे?
वह बसपा से विधायक रह चुके हैं और उन्होंने नवंबर 2025 में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की सदस्यता ली थी।
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