हर महीने के अंतिम रविवार की सुबह देश भर के करोड़ों परिवारों के लिए एक विशेष महत्व लेकर आती है। सुबह के ठीक 11 बजते ही लोग रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल माध्यमों से जुड़ जाते हैं। इस जुड़ाव की मुख्य वजह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बेहद लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' है। इस बार इस विशिष्ट कार्यक्रम की 136वीं कड़ी का प्रसारण किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री ने एक बार फिर देश की जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। यह मंच अब केवल सरकारी नीतियों और प्रशासनिक योजनाओं की घोषणाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के सुदूर क्षेत्रों में हो रहे सामाजिक बदलावों, पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों, शिक्षा के क्षेत्र में नवप्रयोगों और स्थानीय कलाकारों के संघर्ष की कहानियों को राष्ट्रीय पहचान देने का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। यही कारण है कि देश की जनता में हर नए एपिसोड को लेकर एक अलग तरह की उत्सुकता बनी रहती है कि इस बार प्रधानमंत्री किन नए विषयों पर चर्चा करेंगे और समाज को क्या संदेश देंगे।
कारगिल के वीर जवानों को श्रद्धांजलि और सीमाओं से मिला कड़ा संदेश
अपने मासिक संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्र के गौरव को याद करते हुए कहा कि हमारे जीवन चक्र में कुछ विशेष तारीखें ऐसी होती हैं जिन्हें याद रखने के लिए हमें किसी कैलेंडर की सहायता नहीं लेनी पड़ती और 26 जुलाई भी भारतीय इतिहास में एक ऐसी ही स्वर्णिम तारीख है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज के दिन पूरा देश हमारे सैनिकों के अद्वितीय पराक्रम, अदम्य साहस, असाधारण शौर्य और मातृभूमि के प्रति उनके निस्वार्थ समर्पण को नमन कर रहा है।
इसी संदर्भ में कारगिल की ऐतिहासिक भूमि से देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को अब तक की सबसे बड़ी और स्पष्ट चेतावनी दी है। रक्षा मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में कभी भी किसी प्रकार की बातचीत की स्थिति बनती है, तो वह बातचीत केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके के विषय पर ही होगी। सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय अखंडता पर दिया गया यह कड़ा संदेश देश की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और सीमाओं की सुरक्षा के प्रति हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी तकनीक का बढ़ता सामर्थ्य
राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने रक्षा क्षेत्र में भारत की लगातार बढ़ती आत्मनिर्भरता और तकनीकी विकास का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किए गए आधुनिक युद्धपोत INS महेंद्रगिरि का उदाहरण दिया। इस युद्धपोत को पूरी तरह से भारत में ही डिजाइन किया गया है और इसका निर्माण भी देश के भीतर ही हुआ है। इस अत्याधुनिक युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें इस्तेमाल की गई सामग्री का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरी तरह से स्वदेशी है, जो देश के विनिर्माण क्षेत्र की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
रक्षा क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि इसी महीने DRDO ने पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का एक और सफल परीक्षण किया है। इसके साथ ही कुछ दिन पहले कुशा मिसाइल प्रणाली का भी सफल परीक्षण संपन्न हुआ है। प्रधानमंत्री ने इन सभी शानदार रक्षा सफलताओं का श्रेय देश के वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और अनुसंधानकर्ताओं की दिन-रात की कड़ी मेहनत और उनके साझा प्रयासों को दिया, जिन्होंने देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ता भारतीय रक्षा निर्यात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
आज का भारत न केवल अपनी सीमाओं को सुरक्षित कर रहा है, बल्कि रक्षा उत्पादन और सैन्य उपकरणों के निर्यात के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है। प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि मित्र देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी और सैन्य सहयोग के मामले में भारत एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। इसी महीने की शुरुआत में हुई इंडोनेशिया की द्विपक्षीय यात्रा के दौरान ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल प्रणालियों से संबंधित बड़े समझौतों पर सहमति बनी है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि भारतीय तकनीक, स्वदेशी विनिर्माण क्षमता और रक्षा प्रणालियों पर अब दुनिया भर के देशों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है, जो भारत की वैश्विक साख को बढ़ाता है।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का बड़ा आह्वान
पर्यावरण और जल संकट की वैश्विक चुनौती पर बात करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को जनभागीदारी का एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने जानकारी दी कि 4 जुलाई से पूरे देश में एक विशेष जल संचयन अभियान चलाया जा रहा है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत वर्षा जल को सहेजने, भूजल स्तर को सुधारने, सदियों पुराने पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने और बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करने की गतिविधियों को एक नई दिशा दी जा रही है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि देश के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक, ग्राम पंचायतों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, सभी इस पुनर्जागरण अभियान में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने देश के प्रत्येक नागरिक से यह आग्रह किया कि वे अपने निवास स्थान के आसपास स्थित कम से कम एक तालाब, प्राचीन कुएं या ऐतिहासिक बावड़ी को गोद लें, उसकी सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी उठाएं। उन्होंने स्मरण कराया कि आज हमारे द्वारा बचाया गया पानी की एक-एक बूंद हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी साबित होगी।
कश्मीर की पारंपरिक 'वागु' चटाई और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर युवा वैज्ञानिकों का डंका
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आने वाली प्रेरक कहानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के भीतर अपने हुनर के प्रति समर्पण और कुछ असाधारण हासिल करने का संकल्प होता है, तो बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं। इसी क्रम में उन्होंने कश्मीर घाटी की पारंपरिक 'वागु' चटाई का विशेष उल्लेख किया। सरकंडे और धान के पुआल से तैयार की जाने वाली यह हस्तकला सदियों पुरानी है। आज भी कश्मीर के दलदली क्षेत्रों से विशेष प्रकार की घास और सरकंडे लाकर स्थानीय कारीगर इस लुप्त होती समृद्ध कला को जीवित रखने के लिए कड़ा परिश्रम कर रहे हैं।
एक तरफ जहां पारंपरिक कलाएं देश का गौरव बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के युवा वैज्ञानिक भी वैश्विक पटल पर भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को जानकारी दी कि इसी महीने आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर के फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित के साइंस ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और अपनी कुशाग्र बुद्धि के बल पर शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए। यह सफलता देश की युवा पीढ़ी की वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान के प्रति उनकी रुचि को प्रमाणित करती है।
बिजनौर की महिलाओं की हर्बल चाय और ग्रामीण उद्यमिता की सफलता
चाय के प्रति अपने व्यक्तिगत लगाव को साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में चाय केवल एक पेय पदार्थ नहीं है, बल्कि यह हमारे सामाजिक ताने-बाने, सत्कार और अपनत्व का एक अहम हिस्सा है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के लखीवाला गांव की महिलाओं के साहसिक प्रयास की सराहना की। वहां की एक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मिलकर 'विदुर प्रेरणा स्वदेशी हर्बल टी' का विकास किया है।
यह विशेष हर्बल चाय पूरी तरह से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से तैयार की जाती है, जिसमें लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, तुलसी, कच्ची हल्दी, दालचीनी, इलायची और सौंफ जैसी औषधीय सामग्रियों का समावेश किया गया है। यह अनूठा प्रयास न केवल लोगों को बेहतर स्वास्थ्य का विकल्प दे रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण की एक नई गाथा भी लिख रहा है।
करोड़ों श्रोताओं तक पहुंच और कार्यक्रम की असीम लोकप्रियता
प्रसार भारती की ओर से भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी IIM रोहतक द्वारा कराए गए एक व्यापक सर्वेक्षण और अध्ययन से इस रेडियो कार्यक्रम की लोकप्रियता के ऐतिहासिक आंकड़े सामने आए हैं। इस शोध रिपोर्ट के अनुसार, 'मन की बात' कार्यक्रम को अपने जीवन में कम से कम एक बार सुनने वाले अद्वितीय श्रोताओं की संख्या 100 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी है। आंकड़े बताते हैं कि देश की लगभग 96 प्रतिशत आबादी इस अनूठे संवाद कार्यक्रम से भली-भांति परिचित है।
यही वजह है कि इसके 136वें एपिसोड के प्रसारण पर भी देश और दुनिया की निगाहें टिकी थीं। इस कार्यक्रम का प्रसारण आकाशवाणी के विशाल नेटवर्क, दूरदर्शन के विभिन्न चैनलों और सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक साथ किया गया। हिंदी में मूल प्रसारण समाप्त होने के तुरंत बाद इसका क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद भी प्रसारित किया जाता है ताकि देश के सुदूर हिस्सों में रहने वाले लोग भी अपनी स्थानीय भाषा में देश के प्रधानमंत्री का यह प्रेरक संदेश सुन सकें और उससे जुड़ सकें।



















