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प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी पर सोपोर में पुलिस की सख्त कार्रवाई, 26 ठिकानों पर UAPA के तहत छापेमारीजम्मू-कश्मीर
9 अग॰ 2026, 1:07 pm (44 दिन पहले)· 0

प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी पर सोपोर में पुलिस की सख्त कार्रवाई, 26 ठिकानों पर UAPA के तहत छापेमारी

जम्मू-कश्मीर के सोपोर जिले में आतंकवाद रोधी जांच के तहत प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से जुड़े 26 ठिकानों पर पुलिस ने रविवार को एक साथ छापेमारी की।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आतंकवाद से संबंधित एक मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए रविवार को सोपोर इलाके में 26 विभिन्न स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। यह पूरी कार्रवाई गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत की गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस समन्वित छापेमारी का मुख्य उद्देश्य प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (JeI) के भूमिगत तंत्र का पर्दाफाश करना और मामले से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल व दस्तावेजी सबूत एकत्र करना है।

प्रतिबंध और उसके पीछे के कारण

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने देश की अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों में शामिल होने के कारण जमात-ए-इस्लामी को गैर-कानूनी संगठन घोषित कर रखा है। वर्ष 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले के तुरंत बाद भारत सरकार ने इस अलगाववादी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए गए समूह पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद सुरक्षा स्थिति की लगातार समीक्षा करते हुए गृह मंत्रालय ने फरवरी 2024 में इस प्रतिबंध को अगले पांच वर्षों की अवधि के लिए और बढ़ा दिया। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह संगठन पर्दे के पीछे से अलगाववादी भावनाओं को भड़काने और राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देने वाले तत्वों को सहायता प्रदान करने में लगा हुआ था।

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संगठन का इतिहास और प्रसार

जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी का इतिहास काफी पुराना रहा है। इसकी स्थापना 1950 के दशक में एक स्वतंत्र इकाई के रूप में हुई थी, जो मुख्य रूप से सैयद अबुल आला मौदूदी की इस्लामी विचारधारा और शिक्षाओं से अनुप्राणित थी। इस संगठन ने घाटी के सामाजिक ताने-बाने में अपनी पैठ बनाने के लिए कई तरह के धर्मार्थ कार्यों, सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं और निजी स्कूलों का एक विस्तृत तंत्र तैयार किया। इन शैक्षणिक और सामाजिक मंचों का उपयोग वैचारिक रूप से कट्टरपंथी दृष्टिकोण के प्रसार के लिए किया जाता रहा। संगठन का मूलभूत राजनीतिक रुख हमेशा से यही रहा कि वह कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र मानता है। मौलाना सादुद्दीन ताराबली ने वर्ष 1953 में इस संस्था की आधिकारिक नींव रखी थी और वे 1985 तक इसके शीर्ष पद पर काबिज रहे। शुरुआती दशकों में इस समूह ने चुनावी राजनीति में सक्रिय हिस्सा लिया था, लेकिन 1990 के दशक में सशस्त्र अलगाववादी हिंसा की शुरुआत के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई।

सैयद अली शाह गिलानी की भूमिका और गुटबाजी

जमात-ए-इस्लामी के राजनीतिक और वैचारिक इतिहास में सैयद अली शाह गिलानी का नाम सबसे चर्चित और विवादित रहा है। हथियारबंद उग्रवाद शुरू होने से पहले तक गिलानी ने जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए कुल आठ बार चुनाव लड़ा था, जिनमें से तीन बार उन्हें जीत हासिल हुई थी और पांच मौकों पर हार का सामना करना पड़ा था। समय के साथ वे संगठन के भीतर सबसे कट्टरपंथी और पाकिस्तान समर्थक चेहरे के रूप में उभरे। आगे चलकर वैचारिक मतभेदों के चलते वे जमात-ए-इस्लामी की मुख्यधारा से अलग हो गए और उन्होंने 'तहरीक-ए-हुर्रियत' नाम से एक नया उग्रवादी अलगाववादी मंच गठित कर लिया। वर्ष 2021 में अपनी मृत्यु तक गिलानी लगातार भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थित कठोर रुख पर कायम रहे। हाल के वर्षों में जमात के भीतर वैचारिक विभाजन भी देखे गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 'जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट' (JDF) नाम का एक नया गुट सामने आया। इसके कई पूर्व कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक रूप से भारत के संवैधानिक ढांचे और लोकतांत्रिक व्यवस्था के भीतर रहकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

सवाल-जवाब

सोपोर में पुलिस ने कहां और क्यों छापेमारी की?
पुलिस ने आतंकवाद से जुड़े एक मामले में सबूत जुटाने के लिए सोपोर में जमात-ए-इस्लामी से जुड़े 26 स्थानों पर UAPA के तहत एक साथ छापेमारी की।
जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध कब लगाया गया था?
वर्ष 2019 के पुलवामा हमले के बाद गृह मंत्रालय ने जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे फरवरी 2024 में 5 साल के लिए और बढ़ा दिया गया।
जमात-ए-इस्लामी की स्थापना किसने और कब की थी?
मौलाना सादुद्दीन ताराबली ने 1953 में जम्मू-कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी की स्थापना की थी, जो सैयद अबुल आला मौदूदी के विचारों से प्रेरित थी।
सैयद अली शाह गिलानी ने कौन सी नई पार्टी बनाई थी?
जमात-ए-इस्लामी की मुख्यधारा से अलग होने के बाद सैयद अली शाह गिलानी ने 'तहरीक-ए-हुर्रियत' नामक संगठन का गठन किया था।
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