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राजस्थान और उत्तराखंड में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास: एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर ने महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सीधे भेदे सटीक निशानेराजस्थान
20 सित॰ 2026, 2:35 pm (5 दिन पहले)· 2

राजस्थान और उत्तराखंड में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास: एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर ने महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में सीधे भेदे सटीक निशाने

भारत और अमेरिका के बीच जारी संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास के 22वें संस्करण में एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों ने सीधे मार करने वाली प्रणाली से अपने सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक तबाह किया। राजस्थान के रेगिस्तान से लेकर औली की बर्फीली पहाड़ियों तक फैले इस अभियान में दोनों देशों के लगभग 600-600 सैनिक भाग ले रहे हैं।

भारत और अमेरिका के सशस्त्र बलों ने अपनी संयुक्त सामरिक क्षमता और मारक कौशल को मजबूत करते हुए राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भारी तोपखाने का जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया है। इस अभ्यास के दौरान एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों की मदद से सीधे दिखाई दे रहे लक्ष्यों को डायरेक्ट फायरिंग प्रणाली के जरिए निशाना बनाकर पलक झपकते ही पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। दोनों देशों के सैनिकों ने इस युद्धाभ्यास में अपनी उच्च स्तर की पेशेवर दक्षता, अचूक सटीकता और युद्ध के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहने की प्रतिबद्धता को साबित किया है। इसके साथ ही सेना ने अपने जय से विजय मिशन और हर पल सतर्क, हर समय तैयार रहने के संकल्प को भी मजबूती से दोहराया।

एम777 तोपखाने का सटीक प्रदर्शन और अमेरिकी दल का दौरा

राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में 16 सितंबर को यह विशेष फायरिंग अभ्यास आयोजित किया गया था। इस ड्रिल के दौरान एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की तोप टुकड़ियों ने योजनाबद्ध तरीके से सभी निर्धारित लक्ष्यों को सटीकता से भेदा। फायरिंग की कार्यवाही पूरी होने के तुरंत बाद अमेरिकी सैन्य दल ने उन विशिष्ट स्थलों का दौरा किया जहां यह तोपखाना तैनात था। वहां अमेरिकी सैनिकों ने भारतीय तोप टुकड़ी के अधिकारियों और जवानों के साथ गहन बातचीत की। दोनों देशों के जवानों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपने-अपने सैन्य अनुभवों, तोप संचालन तकनीकों और रणनीतिक प्रक्रियाओं को एक-दूसरे के साथ साझा किया।

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शूट एंड स्कूट तकनीक और तैनाती का व्यावहारिक प्रशिक्षण

लाइव फायरिंग से कुछ दिन पहले ही महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर की तैनाती और संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक प्रदर्शन और तकनीकी व्याख्यान आयोजित किए गए थे। इस प्रशिक्षण सत्र में सैनिकों की अलग-अलग जिम्मेदारियों, तोपों की त्वरित तैनाती की मानक प्रक्रिया और स्थानीय सुरक्षा समन्वय को विस्तार से समझाया गया था। अभ्यास का एक अहम हिस्सा जवाबी गोलाबारी की स्थिति से निपटना था, जिसमें गोलाबारी के तुरंत बाद वैकल्पिक ठिकानों पर स्थानांतरित होने की रणनीति सिखाई गई। इसके अंतर्गत सैनिकों ने शूट एंड स्कूट ड्रिल का अभ्यास किया, जिसमें तोप से लक्ष्य पर प्रहार करने के तुरंत बाद दुश्मन की जवाबी कार्रवाई से बचने के लिए तोप को तेजी से उस जगह से हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाता है। इस साझा अभ्यास से दोनों देशों के कर्मियों को आधुनिक युद्धक कार्यप्रणालियों को करीब से समझने में मदद मिली।

औली से महाजन तक युद्धाभ्यास का 22वां संस्करण

भारत और अमेरिका के बीच आयोजित हो रहे इस संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास का यह 22वां संस्करण है, जो भौगोलिक रूप से बेहद विविधतापूर्ण इलाकों में एक साथ संचालित किया जा रहा है। एक तरफ यह उत्तराखंड के अत्यधिक बर्फीले और ऊंचे पहाड़ी इलाके औली में चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के रेतीले महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में इसका जमीनी अभ्यास जारी है। इस बड़े पैमाने के सैन्य अभ्यास में दोनों देशों की ओर से लगभग 600-600 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं। इस युद्धाभ्यास में अत्याधुनिक तकनीकों को मुख्य केंद्र में रखा गया है। दोनों सेनाओं के जवान युद्धक्षेत्र की टोह लेने और निगरानी करने के लिए आधुनिक ड्रोन व स्वायत्त प्रणालियों का व्यापक इस्तेमाल कर रहे हैं, साथ ही महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में कई आधुनिक हथियार प्रणालियों का संयुक्त प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

सवाल-जवाब

भारत और अमेरिका के बीच कौन सा संयुक्त युद्धाभ्यास आयोजित किया जा रहा है?
भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास का 22वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है।
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में किस हथियार प्रणाली से फायरिंग की गई?
महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एम777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों से डायरेक्ट फायरिंग की गई।
यह युद्धाभ्यास किन-किन स्थानों पर संचालित हो रहा है?
यह अभ्यास उत्तराखंड के औली क्षेत्र और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ चल रहा है।
इस सैन्य अभ्यास में दोनों देशों के कितने सैनिक शामिल हैं?
इस अभ्यास में भारत और अमेरिका दोनों पक्षों के लगभग 600-600 सैन्यकर्मी भाग ले रहे हैं।
अभ्यास के दौरान 'शूट एंड स्कूट' प्रक्रिया क्यों अपनाई गई?
जवाबी गोलाबारी से बचने के लिए तोप से फायरिंग के तुरंत बाद उसे तेजी से दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए यह अभ्यास किया गया।
निगरानी और टोह लेने के लिए किन प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया?
सैनिकों द्वारा इलाके की टोह और निगरानी रखने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·4 दिन पहले

वाशिंगटन की रणनीतिक प्राथमिकताओं के नज़रिए से, युद्धाभ्यास में एम777 जैसी तोपों का यह साझा अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच केवल सामरिक तालमेल नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तकनीकी और सामरिक अंतर-संचालनीयता को भी गहरा करता है। अमेरिकी रक्षा हलकों में भारत के साथ रेगिस्तानी इलाकों से लेकर बर्फीले हिमालयी मोर्चों तक संयुक्त अभियानों को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है। यह ड्रिल साबित करती है कि दोनों देशों की सैन्य साझेदारी अब प्रतीकात्मक बयानों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर सटीक मारक क्षमता, लॉजिस्टिक्स एकीकरण और वास्तविक युद्ध-तैयारी में तब्दील हो चुकी है, जो आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को नई मजबूती देगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

यह संयुक्त अभ्यास केवल दो सेनाओं का सामरिक तालमेल नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक भू-राजनीति में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के विस्तार का स्पष्ट संकेत है। औली के उच्च पर्वतीय इलाके से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक एक साथ साझा अभ्यास और एम777 जैसी प्रणालियों का संचालन दोनों देशों के बीच बढ़ती पारस्परिक संचालन क्षमता को दर्शाता है। सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिहाज से दोनों देशों का यह उन्नत रक्षा समन्वय कूटनीतिक रूप से भी एक ठोस संदेश देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

अर्जुन की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस सैन्य तालमेल का एक अहम पहलू द्विपक्षीय रक्षा-औद्योगिक एकीकरण भी है। एम777 जैसी उन्नत तोप प्रणालियों का साझा संचालन केवल सामरिक तत्परता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के रक्षा व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं के आपसी जुड़ाव को भी मजबूती देता है। जब दोनों सेनाएं रेगिस्तानी और उच्च पर्वतीय परिस्थितियों में एक जैसे हथियारों का परीक्षण करती हैं, तो इससे तकनीकी सहयोग, रखरखाव और भविष्य में सह-उत्पादन के अवसरों को सीधा बल मिलता है। यह अभ्यास क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दीर्घकालिक सामरिक-आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

राजस्थान के तपते रेगिस्तान से लेकर औली के बर्फ़ीले ऊंचे इलाकों तक यह साझा अभ्यास दोनों देशों के बीच केवल पारंपरिक सैन्य सहयोग नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध रणनीतियों की उच्च अंतर्क्रियाशीलता को दर्शाता है। एम777 हॉवित्जर जैसी हल्की तोपों का सीधे लक्ष्य पर सटीक प्रहार और तत्पश्चात 'शूट एंड स्कूट' ड्रिल का अभ्यास यह साबित करता है कि भावी संघर्षों में गतिशीलता और जवाबी हमले से बचाव ही सबसे अहम रणनीति होगी। विविधतापूर्ण भौगोलिकता में यह तालमेल सरहद की विषम परिस्थितियों में त्वरित तैनाती क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

रोहन की बात सही है। राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती कानून-व्यवस्था के नज़रिए से देखें तो विषम भौगोलिक परिस्थितियों में ऐसी मारक सटीकता और त्वरित गतिशीलता केवल युद्ध कौशल नहीं, बल्कि देश की समग्र सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाती है। जब सेनाएँ सीमाई इलाकों में बिना रुकावट त्वरित तैनाती और 'शूट एंड स्कूट' जैसी रणनीतियों में महारत हासिल करती हैं, तो यह संभावित सीमा पार सुरक्षा खतरों और घुसपैठ जैसी चुनौतियों के खिलाफ एक मजबूत रक्षा कवच तैयार करता है। सार्वजनिक सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए इस तरह का अंतर-संचालन तंत्र बेहद निर्णायक साबित होगा।

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