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राजस्थान के बेरी पशु मेले को मिली प्रशासनिक मंजूरी, दो अलग दौर में जुटेंगे पशुपालकराजस्थान
21 सित॰ 2026, 12:06 pm (4 दिन पहले)· 0

राजस्थान के बेरी पशु मेले को मिली प्रशासनिक मंजूरी, दो अलग दौर में जुटेंगे पशुपालक

लम्पी संक्रमण की आशंकाओं के बीच राजस्थान के शेखावाटी स्थित बेरी पशु मेले को प्रशासनिक अनुमति मिल गई है, जिसका आयोजन इस बार दो चरणों में होगा।

शेखावाटी अंचल की समृद्ध पशुपालन परंपरा का प्रतीक माना जाने वाला ऐतिहासिक बेरी पशु मेला इस वर्ष नए स्वरूप में सजने के लिए तैयार है। लम्पी संक्रमण के साए और शुरुआती संशय के बाद स्थानीय प्रशासन ने आखिरकार इस प्रसिद्ध मेले के आयोजन को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। पूर्व में संक्रमण की आशंका को देखते हुए इस पर अस्थाई रोक लगा दी गई थी, जिससे ग्रामीण कारोबारियों में असमंजस की स्थिति बन गई थी। मेला समिति के पदाधिकारी बजरंग सिंह चौहान ने विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि इस मर्तबा व्यवस्थाओं को सुगम रखने और भीड़ प्रबंधन के उद्देश्य से मेले का संचालन दो अलग-अलग दौर में किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, पहला चरण 27 सितंबर से शुरू होकर 5 अक्टूबर तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 27 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 5 नवंबर तक जारी रहेगा।

दो चरणों का नया प्रारूप और बढ़ा हुआ समय

प्रशासनिक स्वीकृति के पश्चात तय किए गए इस द्वि-चरणीय कार्यक्रम से किसानों और दूरदराज के पशुपालकों को काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले वर्ष यह आयोजन महज 6 दिनों की सीमित अवधि के लिए चला था, लेकिन इस बार कार्य दिवसों की संख्या में उल्लेखनीय विस्तार किया गया है। दोनों चरणों में पर्याप्त अंतर होने से व्यापारियों को आने-जाने और परिवहन की व्यवस्था करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। मेला समिति के अनुसार, पहले चरण में जो लोग शामिल नहीं हो पाएंगे, वे दूसरे चरण यानी 27 अक्टूबर से 5 नवंबर के दौरान अपने पशुओं को लेकर पहुंच सकते हैं। दिनों की बढ़ोतरी से न सिर्फ व्यापारिक लेनदेन को पर्याप्त समय मिलेगा, बल्कि स्थानीय बाजारों में भी रौनक लंबे समय तक बनी रहेगी।

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ऊंट और घोड़ियों का विशेष आकर्षण और नस्ल चर्चा

बेरी मेले की मुख्य पहचान रेगिस्तानी पशुओं, विशेषकर बेहतरीन कद-काठी के ऊंटों और उन्नत नस्ल की घोड़ियों की मौजूदगी से रही है। इस बार भी मेले के मुख्य मैदान में मारवाड़ी नस्ल की घोड़ियों और राजस्थान के विशिष्ट ऊंटों का बड़ा जमावड़ा देखने को मिलेगा। यहां आने वाले खरीदार केवल जानवर का सौदा ही नहीं करते, बल्कि उसकी वंशावली, शारीरिक गठन, स्वास्थ्य और कार्यकुशलता पर भी लंबी बातचीत करते हैं। आयोजन समिति द्वारा आयोजित की जाने वाली विभिन्न पशु प्रतियोगिताएं भी ग्रामीण दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती हैं, जिन्हें देखने के लिए दूर-दराज के तहसीलों से लोग सपरिवार मेले में शिरकत करते हैं। उत्कृष्ट नस्लों के प्रदर्शन से पशुपालकों को अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य पाने में मदद मिलती है।

ग्रामीण मेलजोल और ज्ञान साझा करने का खुला मंच

व्यापारिक नफा-नुकसान से परे यह पारंपरिक मेला पशुपालकों के लिए सामाजिक संपर्क और व्यावहारिक अनुभवों के आदान-प्रदान का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। भिन्न-भिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से आने वाले चरवाहे और किसान यहां एक जाजम पर बैठकर पशुओं की बीमारियों, मौसमी देखभाल, पोषण और देसी उपचारों से जुड़ी जानकारियां एक-दूसरे से साझा करते हैं। आधुनिक संचार साधनों के दौर में भी प्रत्यक्ष मुलाकात का यह मंच नए खरीदारों से सीधा संबंध स्थापित करने में बेहद मददगार साबित होता है। ग्रामीण समाज में इस प्रकार के मेलजोल से नई पीढ़ी को भी अपनी पारंपरिक धरोहर और पशुपालन के व्यावहारिक गुर सीखने का सीधा अवसर मिलता है।

बदलते दौर में भी कायम है पारंपरिक हाट का महत्व

राजस्थान के देहाती इलाकों में पशु मेलों का इतिहास सदियों पुराना रहा है, जहां कभी पूरे गांव की सालाना आजीविका इन्हीं हाट-बाजारों पर टिकी होती थी। हालांकि आधुनिक युग में डिजिटल माध्यमों, आधुनिक परिवहन और संगठित मंडियों के आगमन से व्यापार के तौर-तरीके बदले हैं, फिर भी बेरी जैसे पारंपरिक मेलों की अहमियत जस की तस बनी हुई है। पशुपालकों का मानना है कि जो प्रामाणिकता और पशु की सीधी परख खुले मैदान में संभव है, वह किसी अन्य व्यवस्था में नहीं हो सकती। राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले पशुधन की वास्तविक मजबूती को यह मेला एक बार फिर से धरातल पर जीवंत करता हुआ दिखाई देगा।

सवाल-जवाब

बेरी पशु मेले का पहला चरण कब से कब तक आयोजित होगा?
मेले का पहला चरण 27 सितंबर से शुरू होकर 5 अक्टूबर तक चलेगा।
मेले का दूसरा चरण किन तारीखों में आयोजित किया जाएगा?
दूसरा चरण 27 अक्टूबर से प्रारंभ होकर 5 नवंबर तक आयोजित होगा।
प्रशासन ने पहले इस मेले पर रोक क्यों लगाई थी?
मवेशियों में लम्पी बीमारी के संक्रमण के जोखिम को देखते हुए प्रशासन ने पहले मेले पर रोक लगाई थी।
मेले में मुख्य आकर्षण किन पशुओं का रहेगा?
मेले में विशेष रूप से बेहतर कद-काठी और नस्ल वाले ऊंट और घोड़ियां मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
पिछले साल के मुकाबले इस बार मेले की अवधि में क्या बदलाव हुआ है?
पिछली बार यह मेला केवल 6 दिन चला था, जबकि इस बार दिनों की संख्या बढ़ाकर इसे दो चरणों में लंबा किया गया है।
मेला समिति की ओर से तारीखों की जानकारी किसने दी?
मेला समिति के सदस्य बजरंग सिंह चौहान ने मेले के दोनों चरणों की तिथियों और व्यवस्थाओं की जानकारी दी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·3 दिन पहले

बेरी पशु मेले को दो चरणों में आयोजित करने का निर्णय और दिनों का विस्तार स्वागतयोग्य है, विशेषकर लम्पी संक्रमण जैसी बीमारियों के बाद। स्वास्थ्य रिपोर्टिंग के दृष्टिकोण से, इतने बड़े पशु मेलों में संक्रमण रोकने के लिए पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और आइसोलेशन की पुख्ता व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए ताकि मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

बेरी पशु मेले का दो चरणों में होना और दिनों का बढ़ना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक है। लम्पी संक्रमण के बाद प्रशासनिक मंजूरी मिलने से पशुपालकों को अपनी उन्नत नस्ल के ऊंटों और घोड़ियों का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद जगी है। यह द्वि-चरणीय व्यवस्था भीड़ प्रबंधन के साथ स्थानीय बाजारों में लंबे समय तक नकदी प्रवाह बनाए रखेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

लम्पी संक्रमण के दौर के बाद इस ऐतिहासिक मेले का दो चरणों में आयोजित होना ग्रामीण अर्थशास्त्र के लिहाज से एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मॉडल पेश करता है। भीड़ प्रबंधन और परिवहन के लिए समय मिलने से न केवल पशु व्यापार सुरक्षित होगा, बल्कि मारवाड़ी घोड़ों और ऊंटों के कारोबार से जुड़े स्थानीय कारोबारियों को भी लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिलेगा, जो ग्रामीण संबल को मजबूत करेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

बेरी पशु मेले को दो चरणों में आयोजित करने का प्रशासनिक निर्णय भीड़ प्रबंधन और लम्पी संक्रमण जैसी चुनौतियों से निपटने का एक व्यावहारिक मॉडल है। कृषि आधारित मेलों में इस तरह का द्वि-चरणीय प्रारूप न केवल पशुपालकों को परिवहन और व्यापार के लिए पर्याप्त समय देता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक गतिशीलता प्रदान करता है। भविष्य में इस प्रकार के लचीले दृष्टिकोण से अन्य क्षेत्रीय मेलों के आयोजन में भी मदद मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

यह निर्णय न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य और पशुओं की सुरक्षा के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है, बल्कि कानून-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के प्रबंधन को भी सुगम बनाता है। दो चरणों में आयोजन होने से पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त समय और संसाधन मिलेंगे। इस तरह का विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण भविष्य में अन्य बड़े आयोजनों में भी सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने का एक प्रभावी मानक बन सकता है।

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