पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्याननागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानबिटगेट पर बड़ा साइबर हमला, हॉट वॉलेट से उड़ाए गए 351 मिलियन डॉलरपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया याद
राजस्थान के जालोर में मौजूद हैं बजरंगबली के अद्भुत धाम, कहीं पाताल से प्रकटी प्रतिमा तो कहीं आज भी खुला है आसमानराजस्थान
20 सित॰ 2026, 3:19 pm (5 दिन पहले)· 0

राजस्थान के जालोर में मौजूद हैं बजरंगबली के अद्भुत धाम, कहीं पाताल से प्रकटी प्रतिमा तो कहीं आज भी खुला है आसमान

राजस्थान का जालोर जिला हनुमान जी के कई अनोखे और चमत्कारी मंदिरों का केंद्र है, जहां सदियों पुरानी आस्था, बिना छत के विग्रह और द्रविड़ शैली की वास्तुकला भक्तों को आकर्षित करती है।

राजस्थान के जालोर जिले में बजरंगबली के कई ऐसे पवित्र धाम मौजूद हैं, जिनकी धार्मिक मान्यताएं और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि श्रद्धालुओं को हैरान कर देती हैं। सैकड़ों साल पुराने इन तीर्थस्थलों में किसी की ख्याति जमीन से अपने आप प्रकट हुई प्रतिमा के कारण है, तो किसी धाम पर आज भी छत का निर्माण नहीं किया गया है। अलग-अलग स्वरूपों में पूजे जाने वाले इन मंदिरों में नियमित रूप से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है और लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं।

आलासन गांव का 300 साल पुराना मंदिर और 35 फीट ऊंची प्रतिमा

जालोर के आलासन गांव में स्थित हनुमान मंदिर लगभग 300 साल पुरानी अटूट धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, एक बार जब यह पूरा क्षेत्र भीषण अकाल के संकट से जूझ रहा था, उसी दौरान जाल के पेड़ के नीचे जमीन से अचानक हनुमान जी की मूर्ति प्रकट हुई थी। इस चमत्कारिक घटना के बाद गांव के लोगों ने एकजुट होकर वहां एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वर्तमान समय में मंदिर परिसर के भीतर स्थापित 35 फीट ऊंची हनुमान जी की विशाल प्रतिमा यहां का मुख्य आकर्षण है। दूर-दराज के इलाकों से आने वाले भक्तों का विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु यहां सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी हर मनोकामना निश्चित तौर पर पूरी होती है।

ये भी पढ़ें

कानीवाड़ा का पातालेश्वर मंदिर, जहां 800 साल से नहीं बनी छत

जालोर शहर से तकरीबन 10 किलोमीटर की दूरी पर कानीवाड़ा गांव में पातालेश्वर हनुमान जी का ऐतिहासिक मंदिर स्थित है। इस तीर्थ की मान्यता है कि यहां स्थापित प्रतिमा इंसानों द्वारा नहीं रखी गई, बल्कि स्वयं पाताल यानी धरती के भीतर से प्रकट हुई थी। मंदिर के पुजारी के अनुसार, जमीन से स्वयं प्रकट होने के कारण ही इन्हें पातालेश्वर हनुमान जी का नाम दिया गया और यह परंपरा कई पीढ़ियों से लगातार चली आ रही है। इस मंदिर का इतिहास लगभग 800 साल पुराना माना जाता है, मगर सबसे अनूठी बात यह है कि आज तक प्रतिमा के ऊपर किसी तरह की छत नहीं बनाई गई है। हर मंगलवार और शनिवार के दिन यहां विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पैदल चलकर दर्शन करने पहुंचते हैं।

सायला में द्रविड़ वास्तुकला और दक्षिण भारतीय शैली का संगम

जालोर से लगभग 35 किलोमीटर दूर सायला कस्बे के मुख्य मार्ग पर बना हनुमान मंदिर अपनी भव्य और आकर्षक बनावट के लिए जाना जाता है। इस मंदिर की अनूठी सुंदरता हर राहगीर को अपनी ओर आकर्षित करती है। मंदिर का पूरा निर्माण तमिलनाडु से आए कुशल कारीगरों ने पारंपरिक द्रविड़ शैली में किया है। राजस्थान की धरती पर दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला और नक्काशी की यह झलक इस मंदिर को क्षेत्र के बाकी सभी धार्मिक स्थलों से बिल्कुल अलग और दर्शनीय बनाती है।

जागृत स्वरूप में बालाजी और सिरोही सीमा पर महाभारत कालीन जुड़ाव

जालोर क्षेत्र में बालाजी का एक अन्य पवित्र धाम भी जनमानस के बीच गहरी आस्था का विषय है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यहां बालाजी महाराज पूर्णतः जागृत स्वरूप में विराजमान हैं, जहां भक्त अपनी पीड़ा और प्रार्थनाएं लेकर आते हैं। यहां बालाजी को किसी पारंपरिक बंधन के बजाय स्वतंत्र और चैतन्य रूप में पूजे जाने का अनोखा विधान है।

इसके अलावा, जालोर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित एक अन्य मंदिर अपनी भौगोलिक स्थिति और पौराणिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का एक मुख्य प्रवेश द्वार जालोर जिले की सीमा में खुलता है, जबकि दूसरा द्वार सिरोही जिले की तरफ बना हुआ है। लोकमान्यता के अनुसार, महाभारत काल के दौरान अपने अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां कुछ समय रुककर विश्राम किया था। इस मार्ग से गुजरने वाली निजी गाड़ियां और राज्य परिवहन की रोडवेज बसें भी मंदिर के सम्मान में कुछ पलों के लिए रुकती हैं और यात्री शीश नवाकर आगे बढ़ते हैं।

सवाल-जवाब

जालोर के आलासन गांव का हनुमान मंदिर कितना पुराना है?
आलासन गांव का यह हनुमान मंदिर करीब 300 साल पुरानी आस्था से जुड़ा हुआ है।
आलासन मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा की ऊंचाई कितनी है?
इस मंदिर परिसर में 35 फीट ऊंची हनुमान जी की भव्य प्रतिमा स्थापित है।
कानीवाड़ा के पातालेश्वर हनुमान मंदिर की क्या विशेषता है?
यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है और यहां हनुमान जी की मूर्ति बिना छत के खुले आसमान के नीचे विराजमान है।
सायला कस्बे का हनुमान मंदिर किस स्थापत्य शैली में बनाया गया है?
सायला का हनुमान मंदिर तमिलनाडु के कारीगरों द्वारा पारंपरिक द्रविड़ शैली में तैयार किया गया है।
जालोर से 45 किलोमीटर दूर स्थित मंदिर का संबंध किस पौराणिक काल से है?
मान्यता है कि महाभारत काल के दौरान पांडवों ने इस स्थान पर रुककर कुछ समय विश्राम किया था।
सीमा पर स्थित मंदिर के द्वार किन-किन जिलों की ओर खुलते हैं?
इस मंदिर का एक प्रवेश द्वार जालोर जिले की तरफ और दूसरा द्वार सिरोही जिले की तरफ खुलता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

जालोर के इन ऐतिहासिक और स्थापत्य रूप से अनूठे धार्मिक स्थलों का दस्तावेजीकरण राज्य की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। पश्चिमी राजस्थान में द्रविड़ शैली की वास्तुकला और सदियों पुरानी लोक-आस्थाओं का यह संगम केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय पर्यटन सर्किट के विकास की मजबूत संभावना दर्शाता है। यदि राज्य और स्थानीय प्रशासन बेहतर बुनियादी ढांचे, सड़क संपर्क और विरासत संरक्षण योजनाओं के तहत इन स्थलों को समन्वित करे, तो इससे स्थानीय आजीविका और अर्थव्यवस्था को स्थायी संबल मिल सकता है।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·4 दिन पहले

अर्जुन जी के विचारों को आगे बढ़ाते हुए, इन प्राचीन मंदिरों का वास्तुशास्त्रीय और खगोलीय दृष्टिकोण से प्रलेखीकरण अत्यंत आवश्यक है। 'पातालेश्वर' जैसे बिना छत वाले देवालय और स्वयंभू प्रतिमाएं प्राचीन भू-ऊर्जा और खगोलीय संरेखण के विशिष्ट सिद्धांतों को दर्शाते हैं। वैदिक वास्तु शास्त्रों के आलोक में इन स्थलों के खगोलीय डेटा का डिजिटल कैटलॉगिंग करना हमारी धरोहर के संरक्षण को एक नया वैज्ञानिक आयाम देगा।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

जालोर के इन ऐतिहासिक और स्थापत्य की दृष्टि से अनूठे धार्मिक स्थलों में क्षेत्रीय पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत का बड़ा केंद्र बनने की भरपूर क्षमता है। उत्तर और दक्षिण भारतीय वास्तुकला का यह संगम तथा सदियों पुरानी आस्था सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि राज्य प्रशासन और पर्यटन विभाग इन ग्रामीण मंदिरों को बेहतर सड़क कनेक्टिविटी, बुनियादी जन-सुविधाओं और एक सुव्यवस्थित धार्मिक सर्किट से जोड़ें, तो इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था और आजीविका को नई ताकत मिलेगी, बल्कि उपेक्षित ऐतिहासिक धरोहरों का भी समुचित संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन भारत के टियर-3 और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने का एक मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है। रोहन की बात को आगे बढ़ाते हुए, जालोर के इन अनूठे धामों को एक संगठित 'स्पिरिचुअल टूरिज्म सर्किट' के रूप में विकसित करने से निजी और सार्वजनिक निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। जब ऐसे धरोहर स्थलों पर बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स का विस्तार होता है, तो हॉस्पिटैलिटी, स्थानीय व्यापार और परिवहन जैसे सूक्ष्म उद्योगों को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि असंगठित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक औपचारिक और टिकाऊ संबल प्राप्त होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

जालोर के इन ऐतिहासिक मंदिरों में मंगलवार और शनिवार को जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की पुख्ता व्यवस्था बेहद जरूरी है। खुले आसमान के नीचे स्थापित सदियों पुरानी धरोहर प्रतिमाओं की सुरक्षा, असामाजिक तत्वों की निगरानी और पदयात्रियों के आवागमन वाले मार्गों पर बुनियादी कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम पहलू हैं। ऐसे धार्मिक केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी और सुनियोजित आपातकालीन निकास योजनाएं अनिवार्य रूप से लागू होनी चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या अव्यवस्था से बचा जा सके।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp