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राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून, 22 सितंबर को भारी बारिश की कोई चेतावनी नहींराजस्थान
21 सित॰ 2026, 4:40 pm (4 दिन पहले)· 0

राजस्थान में कमजोर पड़ा मानसून, 22 सितंबर को भारी बारिश की कोई चेतावनी नहीं

राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में 22 सितंबर को मौसम शुष्क और सामान्य रहने का अनुमान है, जिससे दिन के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।

राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अब काफी धीमी पड़ती दिख रही हैं। मौसम विभाग के जयपुर केंद्र ने 22 सितंबर के लिए पूरे राज्य में किसी भी तरह की मौसम चेतावनी जारी नहीं की है। पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही क्षेत्रों के लिए कोई गंभीर अलर्ट नहीं होने के कारण आम जनजीवन सामान्य रहने की उम्मीद है। हालांकि, कुछ चुनिंदा इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और स्थानीय परिस्थितियों के चलते कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है।

प्रमुख शहरों में मौसम का मिजाज और तापमान

राजधानी जयपुर में 22 सितंबर को आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं। यहां न्यूनतम तापमान लगभग 26 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। मौसम केंद्र ने राजधानी के लिए कोई विशेष चेतावनी नहीं दी है, जिससे दिन में सामान्य गतिविधियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

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हाड़ौती अंचल के प्रमुख शहर कोटा में भी 22 सितंबर को मुख्यतः आंशिक रूप से बादल बने रहने के आसार हैं। कोटा का न्यूनतम तापमान लगभग 26 डिग्री सेल्सियस जबकि अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना जताई गई है। यहां 21 सितंबर की तुलना में 22 सितंबर को बारिश की संभावना काफी कम दर्ज की गई है और किसी तरह का मौसम अलर्ट भी प्रभावी नहीं है।

मेवाड़ क्षेत्र के उदयपुर शहर में भी मौसम आंशिक रूप से बादलों वाला रह सकता है। उदयपुर में न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है। मौसम विभाग ने उदयपुर के लिए भी इस दिन किसी प्रकार की चेतावनी जारी नहीं की है, जिससे मौसम सुहावना लेकिन सामान्य बना रहेगा।

बारिश की रफ्तार थमने से बढ़ेगी उमस और दिन की गर्मी

राज्य भर में 22 सितंबर को व्यापक स्तर पर तेज अथवा मूसलाधार बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। मौसम विभाग ने पूर्वी और पश्चिमी दोनों संभागों के लिए आधिकारिक रूप से 'नो वॉर्निंग' की स्थिति बताई है। इसका सीधा मतलब यह है कि भारी बारिश या आंधी-तूफान जैसी कोई व्यापक मौसमी हलचल फिलहाल नहीं होगी। इसके बावजूद स्थानीय वातावरण और बादलों के जमावड़े के कारण किसी-किसी स्थान पर बहुत हल्की वर्षा या फुहारें पड़ने की गुंजाइश से इनकार नहीं किया जा सकता।

बारिश के थमने और बादलों के छंटने के चलते कई प्रमुख शहरों में दिन के पारे में उछाल देखा जा सकता है। जयपुर और कोटा जैसे मैदानी एवं पठारी इलाकों में अधिकतम पारा 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास जाने के कारण दोपहर के समय उमस और तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। सुबह और शाम के समय जरूर तापमान में नरमी रहेगी, जिससे लोगों को गर्मी से हल्की राहत मिलेगी।

किसानों के लिए कृषि कार्य और खेतों की देखभाल

बारिश का दौर थमने से किसानों के लिए खेतों में रुके हुए कामकाज निपटाने का यह अनुकूल अवसर साबित हो सकता है। जिन क्षेत्रों में हाल ही के दिनों में अच्छी वर्षा हुई थी, वहां की जमीन में पर्याप्त नमी अब भी मौजूद रह सकती है। ऐसे में काश्तकारों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों में जलभराव की स्थिति, अपनी खड़ी फसलों की सेहत और कीटों के प्रकोप पर लगातार निगरानी रखें। किसी भी नई बुवाई, निराई-गुड़ाई या रासायनिक छिड़काव की योजना बनाने से पहले स्थानीय मौसम पूर्वानुमान की ताजा जानकारी हासिल करना बेहद जरूरी रहेगा।

सवाल-जवाब

22 सितंबर को राजस्थान में मौसम की क्या चेतावनी है?
मौसम विभाग ने 22 सितंबर के लिए पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान दोनों हिस्सों में 'नो वॉर्निंग' जारी की है, यानी भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।
22 सितंबर को जयपुर का तापमान कितना रह सकता है?
जयपुर में न्यूनतम तापमान लगभग 26 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
कोटा में 22 सितंबर को मौसम कैसा रहेगा?
कोटा में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है, जहां न्यूनतम पारा 26 डिग्री और अधिकतम पारा लगभग 37 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।
उदयपुर में 22 सितंबर को अधिकतम तापमान कितना रहने का अनुमान है?
उदयपुर में अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान लगभग 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।
क्या 22 सितंबर को राजस्थान में कहीं भी बारिश नहीं होगी?
व्यापक स्तर पर भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन स्थानीय मौसमी बदलावों के चलते कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
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टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·3 दिन पहले

राजस्थान में मानसून के कमजोर पड़ने और 22 सितंबर को 'नो वॉर्निंग' रहने से तापमान में जो उछाल (37 डिग्री तक) और उमस बढ़ने की बात कही गई है, वह कृषि और ऊर्जा खपत पर सीधा असर डालेगी। हालांकि किसानों को रुके हुए खेत के काम निपटाने का मौका मिलेगा, लेकिन मैदानी इलाकों में बढ़ती गर्मी से बिजली मांग पर दबाव आ सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 दिन पहले

मानसून की विदाई से पहले बारिश का थमना और तापमान का 37 डिग्री तक पहुँचना राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक अहम मोड़ है। हालांकि किसानों को रुके हुए कृषि कार्य निपटाने का अवसर मिलेगा, लेकिन अचानक बढ़ी उमस और गर्मी से जल प्रबंधन पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह स्थिति रबी फसलों की बुवाई और जल स्रोतों के स्तर को कैसे प्रभावित करती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·3 दिन पहले

मानसून की इस सुस्ती का सीधा असर स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि जिंसों के बाजार पर पड़ सकता है। तापमान में 37 डिग्री तक की वृद्धि से मिट्टी की नमी तेजी से घटेगी, जिससे किसानों को सिंचाई के विकल्पों और बिजली की मांग पर नए सिरे से विचार करना होगा। यदि यह शुष्क दौर लंबा खिंचा, तो आगामी रबी सीजन की लागत और फसल चक्र की अर्थिकी दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 दिन पहले

राज्य में मौसम के इस बदलाव का सीधा असर कृषि क्षेत्रों और जनजीवन पर पड़ेगा। मानसून कमजोर पड़ने से किसानों को खेतों के अटके कार्य पूरे करने का अवसर मिला है, लेकिन तापमान में बढ़ोतरी और उमस से आम नागरिकों को परेशानी हो सकती है। हालांकि कोई आधिकारिक चेतावनी जारी नहीं की गई है, फिर भी प्रशासन को गर्मी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं और जलापूर्ति पर नजर रखनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·3 दिन पहले

मानसून की विदाई और तापमान में यह उछाल केवल मौसम का बदलाव नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और नगरीय प्रबंधन दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। जहाँ एक ओर किसानों को खेतों में रुके हुए कार्यों को निपटाने का यह अनुकूल अवसर मिला है, वहीं दूसरी ओर शहरों में बढ़ती उमस और 37 डिग्री तक पहुंचता पारा सीधे तौर पर ऊर्जा की मांग और मौसमी बीमारियों को बढ़ावा दे सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन को केवल 'नो वॉर्निंग' के भरोसे न रहकर, शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सतर्क रहना होगा, ताकि इस अचानक बदलते मौसम के नकारात्मक प्रभावों को न्यूनतम किया जा सके।

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