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राजस्थान में मानसून की रफ्तार धीमी, तीन दिन राहत के बाद 12 सितंबर से फिर बरसेंगे बादलराजस्थान
7 सित॰ 2026, 6:32 am (18 दिन पहले)· 2

राजस्थान में मानसून की रफ्तार धीमी, तीन दिन राहत के बाद 12 सितंबर से फिर बरसेंगे बादल

पूर्वी राजस्थान में छिटपुट बारिश के बीच मौसम विभाग ने 7 सितंबर से बारिश में कमी और 8 से 10 सितंबर तक शुष्क मौसम रहने का अनुमान जताया है, जबकि 12-13 सितंबर से बारिश का नया दौर लौटने के संकेत दिए हैं।

राजस्थान में बीते कई दिनों से झूम कर बरस रहा मानसून अब कमजोर पड़ने की तैयारी में है। मौसम विभाग का कहना है कि 7 सितंबर से राज्य के ज्यादातर हिस्सों में बारिश की तीव्रता घटेगी, हालांकि पूर्वी राजस्थान के कुछ जिलों में हल्की से मध्यम बौछारों का सिलसिला अभी थमा नहीं है। दूसरी ओर पूर्वानुमान में यह भी साफ संकेत है कि यह ठहराव लंबा नहीं चलेगा और महीने के दूसरे सप्ताह में बारिश की एक नई खेप राज्य के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में फिर दस्तक दे सकती है। यानी किसानों और आम लोगों के लिए अगले दस दिन उतार-चढ़ाव भरे रहने वाले हैं।

7 सितंबर को किन इलाकों में भीगेगी धरती

जयपुर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक 7 सितंबर को अजमेर संभाग के कुछ हिस्सों के साथ साथ टोंक, सवाई माधोपुर, कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, जयपुर, दौसा, अलवर और भरतपुर जिलों के अलग अलग कोनों में बादल बरस सकते हैं। भरतपुर, जयपुर और कोटा संभाग को हल्की से मध्यम बारिश मिलने का अनुमान है, जबकि उदयपुर संभाग के भी कुछ कस्बों में छिटपुट बौछारें दर्ज हो सकती हैं। पश्चिमी राजस्थान में तस्वीर इससे बिल्कुल अलग रहेगी, यहां श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, बीकानेर और नागौर जैसे जिलों में सिर्फ कहीं कहीं मामूली फुहारें या बूंदाबांदी भर होने का अनुमान है। राज्य के बाकी हिस्सों में आसमान ज्यादातर साफ और मौसम मुख्यतः सूखा बने रहने की संभावना जताई गई है, यानी पश्चिमी जिलों के लोगों को फिलहाल भारी बारिश की चिंता नहीं करनी होगी।

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कमजोर पड़ रहा है मौसमी सिस्टम

मौसम विभाग की मानें तो दक्षिण पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उसके आसपास के इलाके में बना लो प्रेशर एरिया अब कमजोर पड़कर एक साधारण कम दबाव क्षेत्र में तब्दील हो चुका है, जो बताता है कि जिस ताकतवर सिस्टम ने बीते दिनों तेज बारिश करवाई थी, वह अब अपना दम खो रहा है। मौसम विज्ञान की भाषा में लो प्रेशर एरिया और उससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण ही मानसूनी बारिश का मुख्य इंजन होता है। जब यह सिस्टम मजबूत होता है तो हवा में नमी खींचकर भारी बारिश करवाता है, लेकिन कमजोर पड़ते ही बारिश की तीव्रता अपने आप घटने लगती है, फिलहाल राजस्थान में यही हो रहा है। इस सिस्टम से जुड़ा चक्रवाती हवाओं का घेरा समुद्र सतह से करीब 5.8 किलोमीटर ऊंचाई तक असर दिखा रहा है और अगले 24 घंटे में इसके पूर्व की ओर, यानी पूर्व उत्तर पूर्व दिशा में खिसकने के आसार हैं। इसके साथ ही मानसून की मुख्य रेखा यानी ट्रफ भी श्रीगंगानगर से शुरू होकर रोहतक, दक्षिण पश्चिम उत्तर प्रदेश में बने कम दबाव क्षेत्र के केंद्र, फिर सीधी, रांची और बांकुरा से होते हुए त्रिपुरा तक फैली हुई है। ट्रफ लाइन जितनी पूर्व की ओर खिसकेगी, राजस्थान में बारिश कराने वाली नमी उतनी ही कम मिलेगी।

पिछले 24 घंटे में कहां कितनी बरसात

सिस्टम के कमजोर पड़ने से ठीक पहले प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में जमकर बारिश दर्ज हुई थी। बीते 24 घंटे में सबसे तेज बारिश सवाई माधोपुर जिले के खंडार कस्बे में हुई, जहां 104 मिलीमीटर यानी करीब 10 सेंटीमीटर पानी बरस गया, जो इस दौर में पूरे राज्य में सबसे ज्यादा रहा। इतनी भारी बारिश खेतों और निचले इलाकों में पानी भरने की वजह बन सकती है, इसलिए स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की जरूरत है। इससे पहले प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ बादलों की गरज, आसमानी बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की घटनाएं भी सामने आई थीं, जिसने खेती और आवागमन दोनों को प्रभावित किया। अब जबकि मौसमी सिस्टम कमजोर हो चुका है, उम्मीद है कि इस तरह की तेज और व्यापक बारिश का सिलसिला फिलहाल थम जाएगा और लोगों को कुछ राहत मिलेगी।

8 से 10 सितंबर तक राहत के आसार

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 8 सितंबर से राज्य के अधिकांश हिस्सों में मानसून सुस्त पड़ जाएगा। 8, 9 और 10 सितंबर के दौरान बड़े पैमाने पर बारिश होने की संभावना काफी कम आंकी गई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि बादल पूरी तरह गायब हो जाएंगे, कुछ इलाकों में बादल छाने और स्थानीय स्तर पर छिटपुट बौछारें पड़ने की गुंजाइश बनी रह सकती है, मगर फिलहाल किसी बड़े और व्यापक बारिश के दौर के संकेत नहीं मिल रहे। इन तीन दिनों में ज्यादातर जिलों के लोगों को उमस भरी गर्मी के बीच अपेक्षाकृत सूखे मौसम का सामना करना पड़ सकता है, जिससे खेतों में जमा अतिरिक्त पानी निकलने और फसलों को थोड़ा सूखने का मौका मिलेगा।

12-13 सितंबर से फिर सक्रिय होगा मानसून

राहत का यह दौर लंबा नहीं टिकने वाला। मौसम विभाग के मुताबिक 11-12 सितंबर के आसपास पूर्वी राजस्थान में मौसम एक बार फिर करवट ले सकता है। 12 और 13 सितंबर से पूर्वी और दक्षिणी जिलों में बारिश की नई खेप शुरू होने के साफ संकेत मिल रहे हैं। 12 से 15 सितंबर के बीच पूर्वा हवाओं के असर से हवा में नमी की मात्रा बढ़ेगी, जिससे कई जिलों में टुकड़ों में यानी खंड खंड बारिश देखने को मिल सकती है। इस दौरान दक्षिणी, दक्षिण पूर्वी और पूर्वी राजस्थान के जिलों में बाकी राज्य के मुकाबले ज्यादा सक्रियता रहने का अनुमान है, यानी इन इलाकों के किसानों को दोबारा बारिश की तैयारी रखनी होगी। इसके बाद 16 और 17 सितंबर के आसपास एक बार फिर बारिश की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, हालांकि स्थानीय स्तर पर उतार चढ़ाव बने रहने की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।

आगे क्या, किसान रखें नजर

मौसम विभाग ने साफ किया है कि 10 से 15 दिन का यह पूर्वानुमान अंतिम नहीं है और आगे चलकर इसमें बदलाव मुमकिन है। बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में अगर आने वाले दिनों में कोई नया मौसमी सिस्टम बनता है, तो उसकी दिशा और तीव्रता पूरी तस्वीर बदल सकती है, जिससे बारिश ज्यादा या कम भी हो सकती है। यही वजह है कि किसानों और आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने अपने जिले का ताजा मौसम अपडेट लगातार देखते रहें, ताकि बुवाई, कटाई, यात्रा या किसी भी बाहरी काम से जुड़े फैसले सही समय पर और सुरक्षित तरीके से लिए जा सकें।

सवाल-जवाब

7 सितंबर को राजस्थान में मौसम कैसा रहेगा?
ज्यादातर हिस्सों में बारिश कमजोर रहेगी, लेकिन भरतपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर संभाग में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश कहां दर्ज हुई?
सवाई माधोपुर जिले के खंडार में सबसे ज्यादा 104 मिलीमीटर, यानी करीब 10 सेंटीमीटर बारिश दर्ज हुई।
मानसून अचानक कमजोर क्यों पड़ रहा है?
दक्षिण-पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर बना लो प्रेशर एरिया कमजोर होकर सामान्य कम दबाव क्षेत्र में बदल गया है, जिससे बारिश कराने वाली नमी घट रही है।
8 से 10 सितंबर के बीच मौसम कैसा रहेगा?
इन तीन दिनों में राज्य के अधिकतर हिस्सों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने और व्यापक बारिश से राहत मिलने की संभावना है।
बारिश का अगला दौर कब से शुरू होगा?
आईएमडी के अनुसार 12-13 सितंबर से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है।
क्या यह पूर्वानुमान आगे बदल सकता है?
हां, बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में नया सिस्टम बनने पर पूर्वानुमान में बदलाव संभव है, इसलिए ताजा जिला स्तर का अपडेट देखते रहने की सलाह दी गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

यद्यपि यह रिपोर्ट मुख्य रूप से मौसम के बदलाव और कृषि संबंधी उतार-चढ़ाव पर केंद्रित है, लेकिन एक अपराध और सार्वजनिक सुरक्षा संवाददाता के रूप में मेरा ध्यान इस बात पर है कि भारी बारिश या अचानक शुष्क मौसम के ऐसे दौर अक्सर ग्रामीण और शहरी इलाकों में जलभराव, सड़क हादसों और जल जनित बीमारियों जैसी प्रशासनिक चुनौतियों को जन्म देते हैं। हालांकि मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक राहत का अनुमान जताया है, फिर भी राज्य प्रशासन को किसी भी अप्रत्याशित आपदा या कानून-व्यवस्था से जुड़ी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए, विशेषकर तब जब दूसरे सप्ताह में नया मानसूनी दौर फिर से दस्तक देने वाला है।

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

एक वरिष्ठ संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि मौसम में होने वाले ऐसे बदलाव केवल कृषि चक्र को ही प्रभावित नहीं करते, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रशासनिक तैयारियों की भी कड़ी परीक्षा लेते हैं। जब तीन दिन के शुष्क मौसम के बाद अचानक नया मानसूनी दौर लौटेगा, तो स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन तंत्र को जलभराव, सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी आकस्मिक चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से ही पुख्ता इंतजाम करने होंगे, ताकि आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

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