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रीवा के सरकारी अस्पताल में कुत्ते के काटे मरीज को थमाया गया सांप के जहर का इंजेक्शनमध्य प्रदेश
7 सित॰ 2026, 12:04 am (6 दिन पहले)· 2

रीवा के सरकारी अस्पताल में कुत्ते के काटे मरीज को थमाया गया सांप के जहर का इंजेक्शन

रीवा के शासकीय संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में कुत्ते के काटने पर पहुंचे एक युवक को कथित तौर पर सांप के काटने पर दिया जाने वाला इंजेक्शन लगा दिया गया, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई।

रीवा के शासकीय संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में इलाज कराने पहुंचे एक युवक ने अस्पताल के डॉक्टरों पर बेहद गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। युवक का कहना है कि कुत्ते के काटने के बाद वह एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंचा था, लेकिन वहां मौजूद डॉक्टर ने उसे सांप के काटने पर दिया जाने वाला एंटी-वेनम इंजेक्शन लगा दिया।

इंजेक्शन लगते ही बिगड़ने लगी तबीयत

परिजनों के मुताबिक युवक को बीती शाम कुत्ते ने काटा था, जिसके बाद वह तुरंत अस्पताल पहुंचा ताकि समय रहते एंटी-रेबीज का टीका लगवाया जा सके। लेकिन आरोप है कि डॉक्टर ने जल्दबाजी में उसे गलत इंजेक्शन थमा दिया, जो असल में सांप के जहर के असर को बेअसर करने के लिए इस्तेमाल होता है। युवक का कहना है कि इंजेक्शन लगते ही उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और कुछ ही देर में वह बेहोश हो गया। परिवार के लोग उसे तुरंत आपात कक्ष में ले गए, जहां हालत संभालने की कोशिश की गई। इस पूरी घटना ने मरीज और उसके परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया है और उन्होंने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित युवक ने साफ कहा है कि वह इस मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराएगा, ताकि दोषी डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई हो सके।

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विवादों से अस्पताल का पुराना नाता

यह पहला मौका नहीं है जब संजय गांधी अस्पताल सुर्खियों में आया हो। इससे पहले जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सामने आया था, जिसकी चर्चा अभी पूरी तरह थमी भी नहीं थी। इसके अलावा अस्पताल पर एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने का भी आरोप लग चुका है, जिसने अस्पताल प्रशासन की साख पर पहले से ही सवाल खड़े कर रखे हैं। ऐसे में ताजा मामला सामने आने के बाद अस्पताल में मरीजों के इलाज के दौरान बरती जा रही सतर्कता और दवाओं तथा इंजेक्शन की पहचान से जुड़ी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

हालांकि युवक को वास्तव में कौन सा इंजेक्शन लगाया गया, उस वक्त उसकी चिकित्सकीय स्थिति क्या थी और इंजेक्शन किस डॉक्टर ने लगाया था, इन तमाम बिंदुओं पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पूरा मामला जांच के दायरे में है और सच्चाई तभी सामने आएगी जब अस्पताल प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग इस पर आधिकारिक बयान जारी करेगा। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर मरीज को कुत्ते ने काटा था, तो क्या उसे भूलवश सांप के काटने वाला इंजेक्शन लगा दिया गया, और अगर हां तो अस्पताल में दवाओं तथा इंजेक्शन की पहचान व सत्यापन की व्यवस्था आखिर कितनी भरोसेमंद है।

सवाल-जवाब

यह घटना कहां हुई?
यह घटना रीवा के शासकीय संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में हुई।
युवक को अस्पताल क्यों जाना पड़ा?
युवक को कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद वह एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंचा था।
आरोप क्या है?
युवक का आरोप है कि डॉक्टर ने उसे एंटी-रेबीज की जगह सांप के काटने पर दिया जाने वाला इंजेक्शन लगा दिया।
इंजेक्शन के बाद युवक की क्या हालत हुई?
युवक की तबीयत तेजी से बिगड़ गई और वह बेहोशी की हालत में पहुंच गया।
युवक अब क्या करने की योजना बना रहा है?
उसने इस मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराने की बात कही है।
क्या यह अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है?
हां, हाल में इसी अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत और एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने के मामले सामने आ चुके हैं।
क्या गलत इंजेक्शन लगने की आधिकारिक पुष्टि हुई है?
नहीं, यह मामला अभी जांच के दायरे में है और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·5 दिन पहले

यह घटना न केवल चिकित्सा लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों में बुनियादी सुरक्षा प्रोटोकॉल और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। जब तक दवाओं के वितरण और प्रशासन में बारकोड स्कैनिंग जैसी डिजिटल प्रणाली या सख्त क्रॉस-चेक मेकैनिज्म लागू नहीं किए जाते, तब तक ऐसी घातक मानवीय भूलों से मरीजों की जान खतरे में बनी रहेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मध्य प्रदेश में यदि सरकारी अस्पतालों में दवाओं के वितरण और पहचान जैसी प्राथमिक प्रक्रियाओं में इस तरह की लापरवाही सामने आ रही है, तो यह नीतिगत विफलता को दर्शाता है। इससे पहले भी इस संस्थान में गंभीर मामले आ चुके हैं, जो जवाबदेही के अभाव को रेखांकित करते हैं। यदि समय रहते सख्त प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्वास्थ्य प्रणाली आम जनता का भरोसा पूरी तरह खो देगी।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

यह गंभीर चिकित्सकीय चूक केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट के बुनियादी ढांचे और डिजिटल इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणालियों की विफलता को भी उजागर करती है। यदि सरकारी अस्पतालों में बार-बार इस तरह की घातक भूलें होती हैं, तो यह सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा जोखिम में डालती है और इस पर त्वरित डिजिटल ऑडिट तथा सख्त निगरानी नीति लागू करने की आवश्यकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

यह मामला केवल चिकित्सा लापरवाही का नहीं, बल्कि आपराधिक उपेक्षा की श्रेणी में आ सकता है यदि जांच में यह साबित हुआ कि बिना उचित सत्यापन के गलत इंजेक्शन दिया गया था। सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में इस तरह की बुनियादी गलतियां भारतीय दंड संहिता के तहत गंभीर कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित करती हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाते हैं और क्या दोषियों पर एफआईआर दर्ज होती है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह घटना क्षेत्रीय स्वास्थ्य तंत्र की लचर प्रशासनिक निगरानी को उजागर करती है। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय जैसे बड़े संस्थानों में पहले भी गंभीर प्रशासनिक विफलताएं सामने आ चुकी हैं, जो यह दर्शाती हैं कि आंतरिक ऑडिट और मेडिकल स्टाफ की जवाबदेही तय करने की प्रणाली कागजों तक सीमित है। यदि जिला प्रशासन इस मामले में त्वरित और पारदर्शी जांच कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करता है, तो सरकारी अस्पतालों के प्रति आम जनता का बचा-खुचा भरोसा भी पूरी तरह से टूट जाएगा। आगामी दिनों में स्वास्थ्य निदेशालय की रिपोर्ट इस दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है।

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