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सब्जियों की भरपूर पैदावार के लिए सितंबर में अपनाएं प्रो-ट्रे तकनीक, कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने बताए नर्सरी प्रबंधन के सही तरीकेझारखंड
15 सित॰ 2026, 2:52 pm (10 दिन पहले)· 0

सब्जियों की भरपूर पैदावार के लिए सितंबर में अपनाएं प्रो-ट्रे तकनीक, कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने बताए नर्सरी प्रबंधन के सही तरीके

सितंबर महीने में ठंड की सब्जियों की नर्सरी तैयार करते समय उठी हुई क्यारियों के बजाय प्रो-ट्रे तकनीक अपनाने से पौधे मजबूत होते हैं और बारिश तथा जड़ टूटने के नुकसान से बचाव होता है।

ठंड के मौसम में बोई जाने वाली सब्जियों की खेती के लिए सितंबर का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। झारखंड के देवघर जिले में बड़ी संख्या में किसान इस समय शीतकालीन सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के काम में जुट चुके हैं। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी और तकनीक के अभाव में कई बार किसान बाजार से महंगे और बेहतरीन हाइब्रिड बीज खरीदने के बाद भी नर्सरी के दौरान गंभीर गलतियां कर बैठते हैं। इन शुरुआती भूलों का सीधा असर पौधों के स्वास्थ्य, उनके विकास और अंततः पूरी फसल के उत्पादन पर पड़ता है। सही तरीके से नर्सरी न बनाने के कारण बीज अंकुरित नहीं हो पाते या फिर शुरुआती दौर में ही गलकर नष्ट हो जाते हैं, जिससे किसानों को दोहरा वित्तीय नुकसान सहना पड़ता है।

कीमती बीजों के बावजूद क्यों विफल हो जाती है पारंपरिक नर्सरी

देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव के अनुसार, सब्जियों की खेती से अधिकतम मुनाफा कमाने का मूल मंत्र नर्सरी के स्तर पर की जाने वाली देखभाल में छिपा है। किसान बाजार से महंगे हाइब्रिड बीज तो खरीद लाते हैं, लेकिन जब नर्सरी तैयार करने की बारी आती है, तो वे पारंपरिक और असावधानी भरे तरीकों पर निर्भर रह जाते हैं। जब नर्सरी में पौधे कमजोर या अस्वस्थ तैयार होते हैं, तो उन्हें मुख्य खेत में रोपने के बाद भी उनका विकास धीमा रहता है। कमजोर पौधों पर बीमारियों का हमला जल्दी होता है, जिससे पैदावार में भारी गिरावट आती है। इसलिए बीजों की गुणवत्ता पर ध्यान देने के साथ-साथ यह समझना अनिवार्य है कि पौधों को सही माहौल और वैज्ञानिक तरीके से कैसे अंकुरित किया जाए।

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नर्सरी तैयार करने की दो प्रमुख विधियां: रेज्ड बेड बनाम प्रो-ट्रे

सब्जियों की नर्सरी तैयार करने के लिए मुख्य रूप से दो तरीके अपनाए जाते हैं। पहली विधि पारंपरिक रेज्ड बेड यानी जमीन से थोड़ी उठी हुई क्यारियां बनाकर पौध तैयार करने की है। दूसरी आधुनिक विधि प्रो-ट्रे तकनीक है, जिसे प्लग ट्रे विधि भी कहा जाता है। कृषि विशेषज्ञ वकील यादव बताते हैं कि पारंपरिक क्यारियों की तुलना में प्रो-ट्रे विधि किसानों के लिए कहीं अधिक फायदेमंद और सुरक्षित साबित होती है। प्रो-ट्रे एक प्लास्टिक की खानेदार ट्रे होती है, जिसमें अलग-अलग खानों में कोकोपीट और पोषक तत्वों का मिश्रण भरकर बीज बोए जाते हैं। यह विधि पौधों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य को बनाए रखने में सबसे ज्यादा कारगर मानी गई है।

मौसम के जोखिम से सुरक्षा और प्रो-ट्रे की पोर्टेबिलिटी

प्रो-ट्रे तकनीक का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ इसकी सुगमता और पोर्टेबिलिटी है। सितंबर के दौरान अक्सर अचानक तेज बारिश या भारी धूप का मौसम बना रहता है। जब किसान उठी हुई क्यारियों में नर्सरी बनाते हैं, तो तेज बारिश के पानी से क्यारियों की मिट्टी कट जाती है और नन्हे पौधे गलकर बर्बाद हो जाते हैं। इसके विपरीत, प्रो-ट्रे में पौध उगाने पर किसान ट्रे को आसानी से उठाकर किसी सुरक्षित, छायादार या शेड वाले स्थान पर ले जा सकते हैं। जब बारिश थम जाए या मौसम सामान्य हो जाए, तो इन्हें वापस धूप में रखा जा सकता है। इस आसान प्रबंधन से भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम के कारण होने वाले भारी नुकसान से पूरी तरह बचा जा सकता है।

रोपाई के दौरान जड़ों की अखंडता और झटका रहित विकास

पारंपरिक क्यारियों से पौधों को उखाड़कर मुख्य खेत में लगाते समय अक्सर उनकी नाजुक जड़ें टूट जाती हैं या मिट्टी से पूरी तरह अलग हो जाती हैं। जड़ों को पहुंचने वाली इस क्षति के कारण पौधा रोपाई के बाद सदमे में चला जाता है और उसे खेत में अपनी जड़ें जमाने में कई दिन लग जाते हैं। कई बार कमजोर पौधे रोपाई के तुरंत बाद सूख भी जाते हैं। इसके विपरीत, प्रो-ट्रे में उगे पौधे को जब ट्रे से निकाला जाता है, तो उसकी जड़ों के चारों ओर मिट्टी और कोकोपीट का गोला बना रहता है। इससे जड़ को कोई चोट नहीं पहुंचती। मुख्य खेत में रोपाई करते ही यह पौधा बिना किसी रुकावट के तेजी से बढ़ना शुरू कर देता है और फसल समय पर तैयार होती है।

सितंबर प्रबंधन से बढ़ाएं सब्जियों का उत्पादन और मुनाफा

सर्दियों की सब्जियों से बेहतर कमाई करने के लिए किसानों को नर्सरी तैयार करने के चरण में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। कृषि विशेषज्ञ वकील यादव सलाह देते हैं कि सितंबर के महीने में नर्सरी बनाते समय किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें। यदि संभव हो तो पारंपरिक क्यारियों के बजाय प्रो-ट्रे विधि को ही प्राथमिकता दें। शुरुआती चरण में की गई थोड़ी सी सावधानी, सही पोषण और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किसानों को कमजोर पौधों के नुकसान से बचाता है। जब पौधे मजबूत और स्वस्थ होंगे, तो खेत में फसल की फलन अच्छी होगी, जिससे ठंड के मौसम में बाजार में सब्जियां जल्दी पहुंचेंगी और किसानों को उपज का बेहतरीन दाम मिल सकेगा।

सवाल-जवाब

ठंड की सब्जियों की नर्सरी तैयार करने का सबसे सही समय कौन सा है?
शीतकालीन सब्जियों की बेहतर फलन और समय पर बाजार उपलब्धता के लिए सितंबर का महीना नर्सरी तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
प्रो-ट्रे तकनीक पारंपरिक उठी हुई क्यारी से बेहतर क्यों है?
प्रो-ट्रे पोर्टेबल होती हैं जिन्हें बारिश में सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है। साथ ही, इससे पौधे निकालते समय जड़ें टूटती नहीं हैं और विकास तेजी से होता है।
क्या प्रो-ट्रे से पौधों को रोपने पर वे जल्दी तैयार होते हैं?
हां, प्रो-ट्रे के पौधों में रोपाई का झटका (ट्रांसप्लांट शॉक) नहीं लगता, जिससे खेत में लगाते ही वे बिना रुके तेजी से बढ़ने लगते हैं।
देवघर के किस कृषि विशेषज्ञ ने यह सलाह दी है?
देवघर के कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने किसानों को सितंबर में प्रो-ट्रे विधि से नर्सरी तैयार करने की सलाह दी है।
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