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सैनिक राहुल राजीव ने अंगदान से सात लोगों को दी नई जिंदगी, केरल पुलिस ने बनाया विशेष ग्रीन कॉरिडोरकेरल
12 सित॰ 2026, 10:28 pm (18 दिन पहले)· 0

सैनिक राहुल राजीव ने अंगदान से सात लोगों को दी नई जिंदगी, केरल पुलिस ने बनाया विशेष ग्रीन कॉरिडोर

कोल्लम के 30 वर्षीय दिवंगत सैनिक राहुल राजीव के परिवार ने उनके ब्रेन डेड होने के बाद अंगदान का साहसिक फैसला लिया, जिससे के-सोटो के समन्वय से सात लोगों को नया जीवन मिला।

हिमाचल प्रदेश में तैनात रहकर देश की सेवा करने वाले केरल के कोल्लम निवासी 30 वर्षीय सैनिक राहुल राजीव ने दुनिया से जाते-जाते भी इंसानियत का फर्ज निभाया है। उनके इस सर्वोच्च बलिदान और अंगदान की बदौलत सात जरूरतमंद मरीजों को एक नया जीवन मिल सका है। तिरुवनंतपुरम के एक निजी अस्पताल में गंभीर स्थिति में इलाज करा रहे राहुल राजीव को डॉक्टरों ने काफी प्रयासों के बाद अंततः दिमागी रूप से मृत यानी ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इस अत्यंत कठिन और दुखद क्षण में उनके परिवार ने एक बेहद भावुक लेकिन साहसी फैसला लिया। उन्होंने राहुल के अंगों को दान करने की अपनी सहमति दे दी, जिसके बाद इस महान कार्य को अंजाम देने की प्रक्रिया शुरू की गई।

दुख की घड़ी में मानवता की अनूठी मिसाल

राहुल राजीव की इस निस्वार्थ भावना और उनके परिवार के इस मानवीय कदम की केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने भी खुलकर सराहना की है। उन्होंने दिवंगत सैनिक के शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। राहुल के परिवार की सहमति मिलने के तुरंत बाद उनके शरीर से अंगों को निकालकर जरूरतमंद मरीजों तक सुरक्षित पहुँचाने की पूरी तैयारी शुरू कर दी गई थी। इस बेहद संवेदनशील और जटिल प्रक्रिया का पूरा समन्वय केरल स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (के-सोटो) के माध्यम से बेहद व्यवस्थित तरीके से किया गया। इस संस्था के कुशल मार्गदर्शन में राहुल के अंगों से कुल सात गंभीर रूप से बीमार मरीजों को एक नई जिंदगी मिल सकी।

समय पर प्रत्यारोपण के लिए बना ग्रीन कॉरिडोर

अंग प्रत्यारोपण के मामलों में समय का प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डॉक्टरों के अनुसार, दान किए गए अंगों को शरीर से निकालने के बाद एक अत्यंत सीमित और निर्धारित समय के भीतर ही संबंधित मरीज के शरीर में प्रत्यारोपित करना अनिवार्य होता है। जरा सी भी देरी अंगों को निष्क्रिय कर सकती है। इसी समय सीमा की चुनौती से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ। तिरुवनंतपुरम से तिरुवल्ला तक अंगों को बिना किसी यातायात बाधा के न्यूनतम समय में पहुँचाने के लिए केरल पुलिस के सहयोग से एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। इस ग्रीन कॉरिडोर की मदद से पुलिस ने आपातकालीन वाहनों को बिना रुके और बहुत तेजी से मंजिल तक पहुँचाया।

मुख्यमंत्री ने जताई गहरी संवेदना और आभार

केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने पुलिस विभाग द्वारा दिखाई गई इस तत्परता और संवेदनशीलता की सराहना की। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से राहुल राजीव के इस महान योगदान को सलाम किया। उन्होंने लिखा कि सैनिक राहुल ने अपने जीवन के बाद भी दूसरों को नया जीवन देने का अद्भुत मार्ग चुना। उन्होंने परिवार को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति मिलने की कामना करते हुए कहा कि राहुल की यह करुणा और निस्वार्थ सेवा की महान विरासत हमेशा केरल के समाज को प्रेरित करती रहेगी।

के-सोटो की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी

केरल स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन यानी के-सोटो केरल राज्य सरकार की एक अधिकृत संस्था है। यह मुख्य रूप से पूरे राज्य में मानव अंगों और ऊतकों के दान तथा उनके प्रत्यारोपण से जुड़ी सभी गतिविधियों के नियमन, समन्वय और निगरानी का जिम्मा संभालती है। अंगदान की इच्छा व्यक्त करने से लेकर जरूरतमंद मरीजों की पहचान करने, सूची तैयार करने और अंगों को सुरक्षित रूप से अस्पतालों तक पहुँचाने की पूरी प्रक्रिया में के-सोटो रीढ़ की हड्डी की तरह काम करता है। इस मामले में भी के-सोटो के बेहतरीन तालमेल और पुलिस की मदद से बनाए गए ग्रीन कॉरिडोर ने अंगों को सही समय पर जरूरतमंदों तक पहुँचाने में सफलता हासिल की।

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सवाल-जवाब

राहुल राजीव कौन थे?
राहुल राजीव केरल के कोल्लम के रहने वाले 30 वर्षीय सैनिक थे, जो हिमाचल प्रदेश में देश की सेवा कर रहे थे।
सैनिक राहुल राजीव के अंगों से कितने लोगों को नया जीवन मिला?
उनके अंगदान की वजह से कुल सात जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सका है।
अंगदान की इस प्रक्रिया में के-सोटो की क्या भूमिका थी?
के-सोटो (K-SOTTO) ने अंगदान से लेकर जरूरतमंद मरीजों तक अंगों को सुरक्षित पहुंचाने और प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया का समन्वय किया।
केरल पुलिस ने किस मार्ग पर और क्यों ग्रीन कॉरिडोर बनाया?
केरल पुलिस ने तिरुवनंतपुरम से तिरुवल्ला तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया ताकि दान किए गए अंगों को बिना किसी यातायात रुकावट के समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
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