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शहरी इलाकों में काम तलाशना हुआ कठिन, सितंबर में राष्ट्रीय बेरोजगारी का आंकड़ा 5 फीसदी रहाभारत
15 अक्तू॰ 2026, 8:09 pm (11 मिनट पहले)· 0

शहरी इलाकों में काम तलाशना हुआ कठिन, सितंबर में राष्ट्रीय बेरोजगारी का आंकड़ा 5 फीसदी रहा

सितंबर 2026 के आधिकारिक श्रम सर्वेक्षण के अनुसार देश भर में बेरोजगारी की दर 5 प्रतिशत पर थमी रही, लेकिन कस्बों और शहरों में काम मिलने की चुनौती गांवों के मुकाबले काफी अधिक दर्ज की गई।

देश भर में पंद्रह वर्ष या उससे अधिक उम्र के नागरिकों के बीच काम न मिलने की समस्या सितंबर 2026 के दौरान पांच प्रतिशत के स्तर पर अपरिवर्तित दर्ज की गई है। आधिकारिक श्रम बल सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि अगस्त के मुकाबले सितंबर के महीने में समूची राष्ट्रीय कार्यहीनता की गति बिल्कुल एक समान बनी रही। यदि एक वर्ष पहले यानी सितंबर 2025 की स्थिति पर नजर डालें, तब यह पैमाना 5.2 प्रतिशत पर था, जिसका अर्थ है कि वार्षिक आधार पर इसमें हल्की नरमी आई है। हालांकि, इस पूरे परिदृश्य का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि गांवों के मुकाबले महानगरों और शहरों में रहने वाले कामकाजी लोगों के लिए आजीविका तलाशना ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

ग्रामीण और शहरी कार्यबल की स्थिति में अंतर

भौगोलिक आधार पर विवरण देखें तो देहाती क्षेत्रों में काम न मिलने का अनुपात सितंबर में मामूली इजाफे के साथ 4.2 प्रतिशत दर्ज हुआ, जो ठीक एक महीने पहले अगस्त में 4.1 प्रतिशत देखा गया था। दूसरी तरफ शहरी बस्तियों में यह संकट अधिक गहराया, जहां आंकड़ा 6.8 प्रतिशत से चढ़कर 6.9 प्रतिशत पर पहुंच गया। पिछले वर्ष सितंबर 2025 में ग्रामीण अंचलों की स्थिति 4.6 प्रतिशत तथा शहरी केंद्रों की 6.8 प्रतिशत रिकॉर्ड की गई थी। पुरुष आबादी की बात करें तो पंद्रह साल और उससे अधिक आयु वर्ग में पुरुषों के बीच काम की कमी 4.9 प्रतिशत पर टिकी रही। पुरुषों से संबंधित आंकड़ों में जून 2026 के बाद से ही क्रमिक सुधार या ठहराव का क्रम लगातार कायम है।

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कामकाजी महिलाओं के आंकड़े और बढ़ता अंतर

महिलाओं के रोजगार से जुड़े आंकड़े एक बिल्कुल अलग और संवेदनशील तस्वीर बयां करते हैं। सितंबर माह में समस्त महिलाओं के बीच बिना काम रहने का स्तर 5.2 प्रतिशत दर्ज हुआ, जो अगस्त में दर्ज 5.1 प्रतिशत की तुलना में थोड़ा बढ़ा है। हालांकि, ग्रामीण और शहरी महिलाओं के अनुभवों में भारी असमानता देखने को मिली है। ग्रामीण बस्तियों में महिलाओं के बीच बिना काम का अनुपात घटकर 3.9 प्रतिशत पर आ गया, जो कैलेंडर वर्ष 2026 का अब तक का सबसे कम आंकड़ा है। इसके विपरीत शहरों में रहने वाली महिलाओं के समक्ष काम मिलने का संकट और विकट हुआ, जहां यह दर 8.9 प्रतिशत से सीधे उछलकर 9.2 प्रतिशत पर जा पहुंची। यह सांख्यिकी दर्शाती है कि शहरों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं को आजीविका से जुड़ने में अधिक कठिनाई झेलनी पड़ रही है।

सालाना तुलना और सर्वे का दायरा

सालाना तुलनात्मक दृष्टिकोण से देखने पर पता चलता है कि सितंबर 2025 के मुकाबले पुरुष और महिला दोनों ही श्रेणियों में समग्र कार्यहीनता में कमी दर्ज की गई है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों की महिलाओं के लिए यह स्तर मौजूदा साल के सबसे अनुकूल मुकाम पर आ गया है। रोजगार, बेरोजगारी और कार्यबल की स्थिति मापने के इस राष्ट्रव्यापी मासिक सर्वेक्षण का आधार बेहद व्यापक रहा है, जिसमें समूचे देश के कुल 3,70,513 नागरिकों से मिली जानकारी को शामिल किया गया। इसी अवधि में श्रमिक जनसंख्या अनुपात यानी डब्ल्यूपीआर भी सालाना आधार पर 0.3 प्रतिशत का सुधार दिखाते हुए 52.7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया।

श्रम बल भागीदारी दर में हुआ सुधार

आजीविका की तलाश करने वाले या काम में जुटे लोगों के समग्र अनुपात को मापने वाला पैमाना यानी एलएफपीआर सितंबर 2026 में 55.5 प्रतिशत रहा, जो सितंबर 2025 की तुलना में 0.2 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। शहरी आबादी के भीतर श्रम बल में सहभागिता की रफ्तार अगस्त 2026 के 50.4 प्रतिशत से सुधरकर सितंबर में 50.7 प्रतिशत आंकी गई। इसी क्रम में पंद्रह वर्ष या अधिक उम्र की कुल महिलाओं की श्रम बल में भागीदारी दर सालाना तुलना में 0.5 प्रतिशत की तेजी के साथ 34.6 प्रतिशत हो गई। वहीं अगर देहाती क्षेत्रों की महिलाओं की बात करें तो उनकी श्रम बल में उपस्थिति पूरे एक प्रतिशत की वृद्धि के साथ 38.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है।

सवाल-जवाब

सितंबर 2026 में देश की कुल बेरोजगारी दर कितनी दर्ज की गई?
सितंबर 2026 में पंद्रह वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए राष्ट्रीय बेरोजगारी दर 5 फीसदी पर स्थिर रही, जो अगस्त के बराबर है।
ग्रामीण और शहरी बेरोजगारी में क्या अंतर देखा गया?
ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 4.2 फीसदी दर्ज की गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह काफी अधिक 6.9 फीसदी रही।
शहरी महिलाओं की बेरोजगारी के आंकड़े क्या संकेत देते हैं?
शहरी महिलाओं में बेरोजगारी दर अगस्त के 8.9 फीसदी से उछलकर सितंबर में 9.2 फीसदी हो गई, जो गहरी चिंता का विषय है।
ग्रामीण महिलाओं की रोजगार स्थिति कैसी रही?
ग्रामीण महिलाओं के लिए बेरोजगारी दर गिरकर 3.9 फीसदी रह गई, जो वर्ष 2026 का अब तक का सबसे निचला स्तर है।
यह श्रम सर्वेक्षण कितने लोगों के आंकड़ों पर आधारित है?
यह मासिक सर्वेक्षण पूरे देश में कुल 3,70,513 लोगों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है।
सितंबर 2026 में देश की कुल श्रम बल भागीदारी दर क्या रही?
पंद्रह वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की कुल श्रम बल भागीदारी दर 55.5 फीसदी रही, जो पिछले साल से 0.2 फीसदी अधिक है।
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