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शांकली में घर के बाहर खेल रही नन्ही बच्ची पर आवारा कुत्तों का हमला, शरीर पर आए 20 टांकेहिमाचल प्रदेश
21 सित॰ 2026, 2:24 pm (18 घंटे पहले)· 0

शांकली में घर के बाहर खेल रही नन्ही बच्ची पर आवारा कुत्तों का हमला, शरीर पर आए 20 टांके

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के शांकली इलाके में दो आवारा कुत्तों ने बीस महीने की मासूम बच्ची को घसीटकर लहूलुहान कर दिया। अस्पताल में बच्ची को बीस टांके लगे हैं, जबकि प्रशासन ने खतरनाक कुत्तों को शेल्टर भेजने का भरोसा दिया है।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के शांकली क्षेत्र में रविवार दोपहर आवारा श्वानों के हमले का एक बेहद रूह कंपा देने वाला वाकया सामने आया। घर के आंगन के पास मौजूद बीस महीने की मासूम बच्ची को दो खूंखार कुत्तों ने अचानक अपने जबड़ों में जकड़ लिया। हमले के दौरान कुत्ते बच्ची को घसीटते हुए करीब 20 से 30 मीटर दूर तक ले गए और उसके नाजुक शरीर को बुरी तरह नोचना शुरू कर दिया। चीख पुकार सुनकर दौड़े परिजनों और स्थानीय बाशिंदों ने कड़े संघर्ष के बाद पत्थरों की मदद से बच्ची को कुत्तों के चंगुल से छुड़ाया।

कपड़े धो रही मां ने सुनी चीखें, पत्थरों से खदेड़े हमलावर कुत्ते

यह हृदयविदारक घटना रविवार दोपहर करीब 2 बजे घटित हुई। बच्ची की मां उस वक्त घर के भीतर कपड़े धोने में व्यस्त थीं। एकाएक आंगन की तरफ से बच्ची की असहनीय चीखें गूंजीं तो मां घबराकर बाहर की ओर भागीं। बाहर निकलते ही उन्होंने देखा कि दो आक्रामक कुत्ते उनकी दुधमुंही बच्ची को घसीटकर दूर ले जा चुके थे और उसे नोंच रहे थे। घबराई मां ने हिम्मत जुटाकर शोर मचाया और मौके पर पहुंचे पड़ोसियों के साथ मिलकर कुत्तों पर पत्थर बरसाने शुरू किए। किसी तरह कुत्तों को वहां से भगाया गया और लहूलुहान बच्ची को गोद में उठाकर संभाला गया। परिजनों का साफ कहना है कि अगर लोगों के पहुंचने में चंद पलों की भी देर हो जाती, तो बच्ची की जान बचाना नामुमकिन हो जाता।

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गले और चेहरे समेत पूरे बदन पर गहरे जख्म, अस्पताल में लगे 20 टांके

हमले में मासूम के शरीर पर अनगिनत गंभीर घाव आए हैं। सिर, कान के पिछले हिस्से, गर्दन, छाती, पेट, दोनों बाजू और गले के आसपास कुत्तों के दांत गहरे धंसे थे। बच्ची के चेहरे और गले के हिस्से को कुत्तों ने बहुत बेरहमी से काटा था। लहूलुहान हालत में परिजन उसे तुरंत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला लेकर पहुंचे। आपातकालीन वार्ड में चिकित्सकों ने त्वरित उपचार शुरू किया, जहां बच्ची के गहरे जख्मों को भरने के लिए करीब 20 टांके लगाने पड़े। चिकित्सकों की देखरेख में समय पर मिले इलाज के चलते मासूम की जान खतरे से बाहर बताई गई है।

देहरादून से रोते बिलखते पहुंचे परिजन, संजौली की घटनाओं की भी याद ताजा

हादसे की खबर मिलते ही बच्ची के अन्य रिश्तेदार और परिजन देहरादून से रोते बिलखते शिमला पहुंचे। अस्पताल के बिस्तर पर पट्टियों में लिपटी बच्ची की हालत देखकर पूरा परिवार गहरे सदमे और खौफ में है। परिजनों ने स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है कि रिहायशी बस्तियों से खूंखार कुत्तों को हटाने के लिए तुरंत कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि किसी अन्य परिवार को इस तरह के दर्दनाक हादसे से न गुजरना पड़े। गौरतलब है कि शहर में कुत्तों के हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले संजौली इलाके में भी आवारा कुत्तों के उत्पात और राहगीरों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं, जिससे नागरिकों में डर का माहौल है।

प्रशासन का आश्वासन, टूटीकंडी डॉग हट्स भेजे जाएंगे खतरनाक कुत्ते

घटना की गंभीरता को देखते हुए शिमला के मेयर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन पूरे मामले पर पैनी नजर बनाए हुए है। मेयर के मुताबिक शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि टूटीकंडी में विशेष तौर पर डॉग हट्स तैयार किए गए हैं, जहां ऐसे बेहद आक्रामक और खतरनाक कुत्तों को पकड़कर स्थानांतरित करने की मुकम्मल व्यवस्था की जाएगी। नगर निगम प्रशासन ने दावा किया है कि नागरिकों की हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

सवाल-जवाब

शिमला में बच्ची पर कुत्तों का हमला किस जगह और कब हुआ?
यह हमला रविवार दोपहर करीब 2 बजे शिमला के शांकली क्षेत्र में घर के बाहर हुआ।
घायल बच्ची की उम्र कितनी है और उसे कितनी चोटें आई हैं?
बच्ची की उम्र 20 महीने है और कुत्तों ने उसके सिर, गले, चेहरे, पेट और छाती पर गहरे घाव किए हैं।
बच्ची को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया और कितने टांके लगे?
बच्ची को तत्काल आईजीएमसी शिमला ले जाया गया, जहां उसके गहरे घावों पर करीब 20 टांके लगाए गए।
कुत्तों के हमले से बच्ची को किसने और कैसे छुड़ाया?
चीखें सुनकर बाहर आई मां और स्थानीय पड़ोसियों ने पत्थरों से हमला करके कुत्तों को वहां से भगाया।
शिमला के मेयर ने खतरनाक कुत्तों से निपटने के लिए क्या कदम उठाने की बात कही?
मेयर ने बताया कि खतरनाक कुत्तों को टूटीकंडी के डॉग हट्स में स्थानांतरित किया जाएगा और नसबंदी प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।
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टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·11 घंटे पहले

शिमला के शांकली में आवारा कुत्तों द्वारा बच्ची पर किया गया यह भीषण हमला मात्र एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में बढ़ती सार्वजनिक सुरक्षा और जीव प्रबंधन की गंभीर चुनौती को उजागर करता है। इस तरह की घटनाओं से नागरिकों में भय का माहौल पैदा होता है और प्रशासन की नीतियों पर सवाल उठते हैं। यदि नगर निकाय समय रहते आक्रामक श्वानों को शेल्टर भेजने और प्रभावी नस्ल नियंत्रण के पुख्ता कदम नहीं उठाता है, तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति को रोक पाना असंभव होगा, जिससे सामाजिक असंतोष और अधिक गहरा सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·16 घंटे पहले

शांकली की यह घटना शहरी स्थानीय निकायों की लचर नीति और सार्वजनिक सुरक्षा के कुप्रबंधन को बेनकाब करती है। केवल शेल्टर भेजने के सतही आश्वासन से काम नहीं चलेगा; नगर निगम को रिहायशी क्षेत्रों में खूंखार श्वानों की पहचान कर वैज्ञानिक और मानवीय नियंत्रण प्रणाली लागू करनी होगी, अन्यथा शिमला और संजौली जैसे इलाकों में नागरिकों का जीवन खतरे में बना रहेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·16 घंटे पहले

शहरी स्थानीय निकायों की यह विफलता न केवल सार्वजनिक सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक व सामाजिक परिणाम भी हो सकते हैं। शिमला जैसे प्रमुख पर्यटन गंतव्य में यदि इस तरह की हिंसक घटनाएं अनियंत्रित रहीं, तो यह पर्यटन उद्योग और स्थानीय आजीविका को भी दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकता है। प्रशासन के लिए यह समय केवल सतही दावों का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करते हुए ठोस और पारदर्शी कदम उठाने का है।

Rohan Verma@rohan-verma·17 घंटे पहले

शिमला के शांकली में हुआ यह वीभत्स हादसा केवल एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि शहरी स्थानीय निकायों की गंभीर प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों का इस तरह बच्चों को निशाना बनाना और उन्हें दूर तक घसीट ले जाना यह साबित करता है कि पूर्व में संजौली जैसी जगहों पर सामने आई चेतावनियों के बावजूद कोई ठोस धरातलीय कदम नहीं उठाए गए। यदि नगर निगम अब भी केवल कागजी आश्वासनों तक सीमित रहा और खूंखार श्वानों को तत्काल प्रभाव से शेल्टर होम में स्थानांतरित नहीं किया, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर फूटेगा और प्रशासनिक लापरवाही किसी और मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 घंटे पहले

इस मामले में नगर निगम और पशु नियंत्रण विभाग की जवाबदेही तय होनी चाहिए। कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद गंभीर है कि रिहायशी बस्तियों में इस तरह के खूंखार झुंड खुले घूम रहे हैं। यदि स्थानीय प्रशासन ने समय रहते सख्त कानूनी और निवारक कदम नहीं उठाए, तो कानूनी प्रावधानों के तहत नागरिकों की सुरक्षा खतरे में डालने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर कानूनी गलियारों में भी आवाज उठाई जा सकती है।

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