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शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुरू किया नया दफ्तर, 20 करोड़ रुपये की लागत पर विपक्ष के आरोपों का दिया जवाबहिमाचल प्रदेश
21 सित॰ 2026, 11:24 am (21 घंटे पहले)· 1

शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शुरू किया नया दफ्तर, 20 करोड़ रुपये की लागत पर विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब

शिमला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने 20 करोड़ रुपये की लागत से तैयार अपने नए कार्यालय का सोमवार को उद्घाटन किया, जहां निर्माण अभी अधूरा है और मामला हाईकोर्ट में भी लंबित है।

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नया कदम सामने आया है, जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोमवार को अपने नए कार्यालय परिसर का औपचारिक उद्घाटन किया। इस पूरे प्रोजेक्ट पर 20 करोड़ रुपये का खर्च आया है। वर्तमान समय में इस भवन का निर्माण पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अभी केवल मुख्यमंत्री के बैठने का कक्ष ही पूरी तरह तैयार हो पाया है, जबकि भवन के शेष हिस्सों में निर्माण कार्य लगातार जारी है।

हाईकोर्ट में लंबित याचिका और विरासत नियमों के आरोप

इस नवनिर्मित भवन का निर्माण कानूनी जांच और विवादों के बीच हुआ है। इमारत के निर्माण को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका लंबित है, जिसमें हेरिटेज नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। कानूनी आपत्तियों के बावजूद प्रशासन ने इसके पहले चरण को क्रियान्वित किया है। जब मुख्यमंत्री से अदालत में विचाराधीन इस मामले के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने और कानूनी अधिकार का उपयोग करने की स्वतंत्रता है।

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नए परिसर की सुविधाएं और भविष्य का ढांचा

प्रशासनिक योजना के अनुसार, इस पूरे परिसर में न केवल मुख्यमंत्री का दफ्तर होगा, बल्कि राज्य के मंत्रियों, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के कार्यालय भी स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में केवल मुख्यमंत्री कार्यालय ही कार्य करने योग्य स्थिति में पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह निर्माण का केवल पहला चरण है। इस नए परिसर में व्यवस्थाओं का विस्तार किया गया है, जिसके तहत इसमें वातानुकूलित व्यवस्था के साथ 15 कमरे बनाए गए हैं और 40 वाहनों के लिए पार्किंग की सुविधा विकसित की गई है।

पुराने सचिवालय में जगह की तंगी और विपक्ष पर पलटवार

पुराने प्रशासनिक भवन की सीमाओं की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले के दफ्तर में लोगों और आगंतुकों के बैठने तक की पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं थी, जिसकी ओर अधिकारियों ने भी ध्यान दिलाया था। नए भवन में विधायकों से मिलने आने वाले आम नागरिकों के बैठने के लिए समुचित व्यवस्था तैयार की गई है। विपक्ष की तरफ से फिजूलखर्ची के लगाए जा रहे आरोपों पर जवाब देते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि फिजूलखर्ची उन्होंने नहीं की, बल्कि पूर्व की सरकार ने एक हजार करोड़ रुपये के संस्थान खोलकर गैर-जरूरी खर्च किया था। उन्होंने कहा कि यह कार्यालय किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं है, बल्कि अगले पचास साल तक कार्य करने के हिसाब से बनाया गया है, और यदि 15 साल बाद भाजपा का मुख्यमंत्री भी बनता है तो वह भी इसी स्थान से कार्य करेगा।

सवाल-जवाब

नए मुख्यमंत्री कार्यालय पर कुल कितनी लागत आई है?
इस नए भवन के निर्माण पर 20 करोड़ रुपये की लागत आई है।
इस नए भवन में वर्तमान में क्या तैयार हुआ है?
अभी केवल पहले चरण के तहत मुख्यमंत्री का कार्यालय कक्ष तैयार हुआ है, जबकि बाकी निर्माण जारी है।
परिसर में क्या सुविधाएं शामिल की गई हैं?
इस परिसर में वातानुकूलित व्यवस्था के साथ 15 कमरे और 40 गाड़ियों की पार्किंग की सुविधा है।
हाईकोर्ट में यह मामला क्यों लंबित है?
भवन निर्माण में हेरिटेज नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
भवन पूरी तरह तैयार होने पर यहां किसके दफ्तर होंगे?
मुख्यमंत्री के अलावा यहां राज्य के मंत्रियों, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के कार्यालय होंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·8 घंटे पहले

अधूरा दफ्तर और ऊपर से कोर्ट में केस, फिर भी उद्घाटन करने की क्या जल्दी थी? जब बाकी कमरों का काम चल ही रहा है, तो थोड़ा इंतज़ार नहीं हो सकता था?

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 घंटे पहले

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा शिमला में 20 करोड़ रुपये की लागत से बने नए कार्यालय का उद्घाटन कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर उलझता नजर आ रहा है। एक तरफ जहां हेरिटेज नियमों के उल्लंघन का मामला हाईकोर्ट में लंबित है, वहीं विपक्ष इसे जनता के पैसों की फिजूलखर्ची बता रहा है। हालांकि, सुक्खू का यह तर्क कि यह भवन अगले पचास वर्षों की प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, भविष्य की राजनीति और गवर्नेंस पर इसके असर को महत्वपूर्ण बनाता है। अदालत के आगामी फैसले और इस परिसर के पूर्ण संचालन पर ही इस राजनीतिक दांव की सफलता निर्भर करेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·19 घंटे पहले

इस पूरे प्रकरण का वित्तीय और प्रशासनिक प्रभाव राज्य के राजकोषीय स्वास्थ्य पर सीधा असर डालेगा। जब बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट कानूनी विवादों में उलझते हैं, तो कैपिटल एक्सपेंडिचर की तय समयसीमा प्रभावित होती है, जिससे लागत बढ़ने का जोखिम रहता है। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे दीर्घकालिक निवेश के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन 20 करोड़ रुपये के इस खर्च और भविष्य के चरणों की शेष फंडिंग का प्रबंधन राज्य की मौजूदा आर्थिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की कड़ी परीक्षा होगी। अदालत के संभावित निर्णय और चरणबद्ध निर्माण की आगामी गति यह तय करेगी कि यह ढांचागत विस्तार अंततः प्रशासनिक दक्षता को कितना बढ़ावा दे पाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 घंटे पहले

इस मामले में न्यायिक और प्रशासनिक पहलुओं का टकराव स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। चूंकि मामला उच्च न्यायालय में लंबित है और हेरिटेज नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं, ऐसे में उद्घाटन के बावजूद कानूनी पेचीदगियां बढ़ सकती हैं। यदि अदालत का फैसला प्रशासनिक पक्ष के विपरीत आता है, तो यह सरकार के लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती बन सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·20 घंटे पहले

यह विवाद केवल एक कार्यालय के उद्घाटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन प्रणाली और कानूनी प्रक्रिया के बीच के नाजुक संतुलन को रेखांकित करता है। जब किसी परियोजना पर अदालत में सुनवाई जारी हो और निर्माण अधूरा होने के बावजूद उसका आंशिक उपयोग शुरू कर दिया जाए, तो यह कार्यपालिका और न्यायपालिका के संबंधों को असहज कर सकता है। यदि आगामी न्यायिक निर्देशों में निर्माण को लेकर कोई प्रतिकूल आदेश आता है, तो यह प्रशासनिक और वित्तीय दोनों दृष्टियों से सरकार की साख के लिए एक गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

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