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सीकर में आस्था का अनूठा अनुष्ठान, एक साथ पूजे जाएंगे 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंगराजस्थान
19 सित॰ 2026, 12:32 pm (6 दिन पहले)· 2

सीकर में आस्था का अनूठा अनुष्ठान, एक साथ पूजे जाएंगे 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंग

सीकर के श्री गोविंदम भवन में 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किया जाएगा। इस धार्मिक आयोजन के लिए श्रद्धालुओं द्वारा हाथों से विशेष रूप से शिवलिंग तैयार किए जा रहे हैं।

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सालासर रोड के श्री गोविंदम भवन में एक भव्य धार्मिक आयोजन की तैयारी चल रही है, जहां कुल 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किया जाएगा। गौ ग्रास संस्थान और श्री गोपीनाथ गोशाला के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और विवाहित जोड़े भाग लेकर भगवान शिव की आराधना करेंगे। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां स्थापित होने वाले शिवलिंग किसी मशीन से नहीं बनाए जा रहे हैं, बल्कि पिछले तीन दिनों से दर्जनों श्रद्धालु अपने हाथों से इन्हें गढ़ने में दिन-रात जुटे हुए हैं।

हाथों से तैयार हो रहे हैं विशेष शिवलिंग

पार्थिव शिवलिंग निर्माण के कार्य में लगातार जुटे कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है। आयोजकों ने जानकारी दी है कि आगामी 19 सितंबर तक करीब सवा दो लाख से अधिक शिवलिंग पूरी तरह तैयार कर लिए जाएंगे, जिसके अगले दिन यानी 20 सितंबर को वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण विधि-विधान के साथ इनका सामूहिक पूजन संपन्न होगा। इन शिवलिंगों को बनाने की प्रक्रिया में विशेष सावधानी बरती जा रही है। काली मिट्टी और चिकनी मिट्टी के मिश्रण में शुद्ध घी मिलाया जा रहा है, ताकि जब अनुष्ठान के दौरान इन पर जल अर्पित किया जाए, तो ये पानी के संपर्क में आने के तुरंत बाद बिखरें या घुलें नहीं। मिट्टी को भली-भांति गूंथने के बाद हर एक शिवलिंग को करीने से अलग आकार दिया जा रहा है। इतने वृहद स्तर पर हाथों से पार्थिव शिवलिंग तैयार करना सभी साधकों और भक्तों के लिए एक बेहद अनूठा अनुभव साबित हो रहा है।

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भव्य अनुष्ठान और गोसेवा का अनूठा संकल्प

आगामी 20 सितंबर का दिन इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण होगा, जब एक साथ 2.15 लाख से अधिक पार्थिव शिवलिंगों की पूजा की जाएगी और पूरा परिसर मंत्रोच्चार से गूंज उठेगा। इस भव्य अनुष्ठान में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में विवाहित जोड़ों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी की है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा करना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र विधान माना जाता है। अपने हाथों से मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उसकी विधिवत पूजा करना और फिर धार्मिक संस्कारों के साथ अनुष्ठान पूर्ण करना अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। सीकर में होने जा रहा यह आयोजन लाखों शिवलिंगों की स्थापना, हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और गोसेवा के महान संकल्प को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है।

गोसेवा के विस्तार से जुड़ा है आयोजन

इस वृहद धार्मिक अनुष्ठान को केवल भगवान शिव की आराधना तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसके मूल में गोसेवा का पवित्र संदेश भी गहराई से निहित है। आयोजकों के अनुसार गौ ग्रास संस्थान पिछले करीब 15 वर्षों से लगातार गोमाता को हरा चारा उपलब्ध कराने और अन्य कल्याणकारी गोसेवा कार्यों में सक्रियता से जुटा हुआ है। इस बड़े आयोजन के माध्यम से गोसेवा के दायरे को और अधिक विस्तृत करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि समाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस संगठन से जोड़ा जा सके। गौ ग्रास संस्थान द्वारा मुख्य रूप से विभिन्न गोशालाओं में मवेशियों के लिए निशुल्क चारे की व्यवस्था करने का सराहनीय कार्य किया जाता है।

सवाल-जवाब

सीकर में यह धार्मिक आयोजन कहां आयोजित किया जा रहा है?
यह आयोजन सीकर के सालासर रोड स्थित श्री गोविंदम भवन में किया जा रहा है।
इस अनुष्ठान में कुल कितने पार्थिव शिवलिंगों की पूजा होगी?
इस कार्यक्रम के दौरान कुल 2.15 लाख पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किया जाएगा।
पार्थिव शिवलिंगों को तैयार करने का कार्य कौन कर रहा है?
पिछले तीन दिनों से दर्जनों श्रद्धालु अपने हाथों से इन विशेष शिवलिंगों को बनाने में जुटे हुए हैं।
इन शिवलिंगों को बनाते समय मिट्टी में क्या मिलाया जा रहा है?
शिवलिंग पानी में बिखरें नहीं, इसके लिए काली और चिकनी मिट्टी में शुद्ध घी मिलाया जा रहा है।
पार्थिव शिवलिंगों का सामूहिक पूजन किस तारीख को होगा?
सभी शिवलिंगों का सामूहिक पूजन 20 सितंबर को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न होगा।
यह आयोजन मुख्य रूप से किन संस्थाओं द्वारा आयोजित किया जा रहा है?
यह आयोजन गौ ग्रास संस्थान और श्री गोपीनाथ गोशाला की ओर से किया जा रहा है।
गौ ग्रास संस्थान गोसेवा के क्षेत्र में कितने समय से सक्रिय है?
यह संस्थान पिछले करीब 15 वर्षों से गोसेवा के कार्यों में लगातार सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·5 दिन पहले

सीकर का यह धार्मिक अनुष्ठान स्थानीय स्तर पर सामुदायिक सहभागिता और गोसेवा के आर्थिक और सामाजिक आयामों को रेखांकित करता है। इतने बड़े पैमाने पर हाथों से शिवलिंग निर्माण और गोशालाओं के सहयोग से होने वाले ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ संस्थागत गोसंरक्षण प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करते हैं, जिसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर पड़ता है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

सीकर का यह अनुष्ठान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर कम्युनिटी इंगेजमेंट और सामाजिक अर्थव्यवस्था को भी गति देता है। हाथों से इतने बड़े पैमाने पर शिवलिंग बनाने और गोसेवा संस्थानों के माध्यम से होने वाले इस आयोजन से स्थानीय कारीगरों, मिट्टी के कारोबार और संबंधित सप्लाई चेन को भी एक नया आर्थिक प्रोत्साहन मिलता है। इस तरह के सामूहिक आयोजन सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के साथ धार्मिक पर्यटन और क्षेत्रीय आजीविका के नए अवसर पैदा करते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

अर्जुन मेहता का राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषण यह रेखांकित करता है कि सीकर जैसे अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ऐसे वृहद धार्मिक आयोजन केवल सांस्कृतिक समागम तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इनका व्यापक सोशियो-इकोनॉमिक प्रभाव होता है। गोसेवा संस्थानों और स्थानीय स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी से जिस प्रकार कम्युनिटी मोबिलाइजेशन और लोकल सप्लाई चेन को गति मिलती है, वह गवर्नेंस और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकेंद्रीकरण का एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत करता है। आगामी भविष्य में इस तरह के धार्मिक-सामाजिक अनुष्ठान स्थानीय आजीविका और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने में रणनीतिक भूमिका निभा सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

सीकर में होने वाले इस बड़े धार्मिक आयोजन में लाखों लोगों की भीड़ जुटने की संभावना है, जिसके चलते जिला प्रशासन और पुलिस को कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे। इतने बड़े पैमाने पर यातायात प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती होगी, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

सीकर के इस आयोजन में दो लाख से अधिक पार्थिव शिवलिंगों के निर्माण और सामूहिक पूजन के दौरान जुटने वाली भारी भीड़ को संभालना जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा। खासकर जब बड़ी संख्या में विवाहित जोड़े और श्रद्धालु एक साथ अनुष्ठान स्थल पर पहुंचेंगे, तब सुचारू यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के बिना अव्यवस्था फैलने का खतरा रहता है। ऐसे बड़े धार्मिक आयोजनों में स्थानीय पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं को भी पूरी तरह मुस्तैद रखना होगा ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

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