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सिरोही में टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा में कलह, जिलाध्यक्ष और मंत्री ओटाराम देवासी के बीच तनातनीराजस्थान
1 सित॰ 2026, 9:10 am (24 दिन पहले)· 2

सिरोही में टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा में कलह, जिलाध्यक्ष और मंत्री ओटाराम देवासी के बीच तनातनी

सिरोही में नगर परिषद चुनाव से ठीक पहले भाजपा के भीतर टिकट वितरण को लेकर घमासान छिड़ गया है। जिलाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री के बीच मतभेदों के साथ-साथ एक पूर्व पार्षद ने बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार उतार दिया है।

राजस्थान के सिरोही जिले में आगामी नगर परिषद चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही भारतीय जनता पार्टी की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। पार्टी द्वारा आधिकारिक प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक किए जाने से पहले ही संगठन के भीतर टिकटों के बंटवारे को लेकर भारी खींचतान और असंतोष खुलकर सामने आ गया है। स्थानीय स्तर पर चल रही सुगबुगाहट के अनुसार पार्टी के भीतर मचे इस घमासान से चुनावी समीकरणों पर विपरीत असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है और वरिष्ठ नेता डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं।

शिवगंज के वार्ड 25 में टिकट पर आमने-सामने

इस पूरे विवाद के केंद्र में शिवगंज नगर पालिका का वार्ड 25 मुख्य रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि इस वार्ड के टिकट आवंटन को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी और प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओटाराम देवासी के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं। यह क्षेत्र रक्षा भंडारी का गृह क्षेत्र भी माना जाता है, जिसके कारण यहां की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं का एक बड़ा धड़ा खासा नाराज चल रहा है।

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स्थानीय कार्यकर्ताओं का यह आरोप है कि वर्षों से पार्टी के लिए निष्ठापूर्वक काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसी पूरे घटनाक्रम के चलते मंत्री ओटाराम देवासी के भी असंतुष्ट होने की बातें सामने आ रही हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की अनदेखी का यह सिलसिला जारी रहा, तो इसका खामियाजा चुनाव के दौरान पार्टी को उठाना पड़ सकता है.

सिरोही शहर के वार्ड 11 में खुली बगावत

केवल शिवगंज ही नहीं बल्कि सिरोही शहर के वार्ड 11 में भी टिकट वितरण को लेकर पार्टी के भीतर बगावत का बिगुल बज चुका है। यहां पूर्व भाजपा पार्षद सुरेश सगरवंशी के गृह वार्ड में पार्टी द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा गर्म थी। स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक जिस व्यक्ति को टिकट दिए जाने की बात चल रही थी, उसे किसी सांसद का करीबी माना जा रहा है।

इस फैसले से आहत होकर पूर्व पार्षद सुरेश सगरवंशी ने कड़ा रुख अपनाया और अपनी पत्नी को सीधे तौर पर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतार दिया। इतना ही नहीं बल्कि उनके द्वारा नामांकन पत्र भी दाखिल कराया जा चुका है। इस कदम के बाद से स्थानीय राजनीतिक गलियारों में यह साफ हो गया है कि टिकट को लेकर उपजा यह विवाद अब केवल असंतोष तक सीमित नहीं रहा बल्कि खुलकर बगावत का रूप ले चुका है।

पारदर्शिता की मांग और सुरेश सगरवंशी का बयान

पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बागी तेवर अपनाने वाले सुरेश सगरवंशी ने अपनी बात खुलकर रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कार्यकर्ताओं की भावनाओं और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की इसी तरह उपेक्षा की जाती रही, तो चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने टिकट वितरण प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने की पुरजोर जरूरत पर बल दिया ताकि पार्टी की एकजुटता बनी रहे।

हालांकि अभी तक इस पूरे मामले पर भाजपा के अधिकृत मंच से कोई विस्तृत या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने चल रही हलचल से पार्टी नेतृत्व की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।

डैमेज कंट्रोल में जुटे वरिष्ठ नेता और नया मंथन

बढ़ते विरोध के सुरों और बगावत की खबरों के बीच अब पार्टी स्तर पर नए सिरे से रणनीति तैयार की जा रही है। अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक विवादित सीटों पर खासकर तीन प्रमुख नामों को लेकर दोबारा गहन मंथन किया जा रहा है। स्थिति को संभालने के लिए देर रात तक पार्टी के तमाम वरिष्ठ नेता नाराज चल रहे स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को मनाने के निरंतर प्रयासों में जुटे रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस असंतोष को शांत नहीं किया गया, तो आगामी नगर परिषद चुनावों में भाजपा की जीत की संभावनाओं को बड़ा झटका लग सकता है। अब सबसे बड़ा और अहम सवाल यही बना हुआ है कि पार्टी नेतृत्व इस अंतरकलह को कैसे सुलझाता है और क्या वे बागी होकर मैदान में उतरे नेताओं को वापस पार्टी के पक्ष में लाने में सफल हो पाते हैं.

सवाल-जवाब

सिरोही में भाजपा के भीतर विवाद का मुख्य कारण क्या है?
नगर परिषद चुनाव के लिए टिकट वितरण और प्रत्याशियों के चयन को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष और बगावत का माहौल बना है।
शिवगंज के वार्ड 25 में किन नेताओं के बीच मतभेद सामने आए हैं?
वार्ड 25 के टिकट को लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष रक्षा भंडारी और कैबिनेट मंत्री ओटाराम देवासी के बीच मतभेद चर्चा में हैं।
सुरेश सगरवंशी ने बगावत क्यों की?
सिरोही शहर के वार्ड 11 में उनके गृह क्षेत्र से किसी अन्य व्यक्ति को टिकट मिलने की चर्चा से नाराज होकर उन्होंने अपनी पत्नी को निर्दलीय मैदान में उतार दिया है।
पार्टी नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कर रहा है?
वरिष्ठ नेता नाराज कार्यकर्ताओं और नेताओं को मनाने में जुटे हैं तथा विवादित सीटों पर तीन नामों पर दोबारा विचार कर रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

सिरोही में टिकट बंटवारे को लेकर उभरा यह आंतरिक कलह और खुली बगावत केवल राजनीतिक असंतोष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठनात्मक अनुशासन और स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था व सार्वजनिक शांति के लिए भी एक चुनौती बन सकता है। जब सत्ता और संगठन के शीर्ष चेहरे आमने-सामने आ जाएं और बागी उम्मीदवार मैदान में उतर आएं, तो चुनावी रैलियों और प्रचार के दौरान समर्थकों में टकराव की आशंका बढ़ जाती है। यदि समय रहते डैमेज कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी सिरदर्द साबित हो सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

रोहन वर्मा की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुभव से यह स्पष्ट है कि स्थानीय चुनावों में जब जिलाध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री के बीच ऐसी खींचतान होती है, तो इसका सीधा असर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ता है। वार्ड स्तर की यह बगावत यदि समय रहते नहीं थमी, तो पार्टी का कोर वोटर छिटक सकता है, जिससे विरोधी दलों को इसका सीधा राजनीतिक लाभ मिलने की पूरी संभावना बन जाएगी।

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