तुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हालचीन और अमेरिका के बीच टकराव से दोनों को नुकसान, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर दिया जोरगाजा युद्ध में पीछे न हटने के पीछे नेतन्याहू ने सुनाई 1967 की दास्तान, भाई के वो 5 शब्द बने इजरायल की सैन्य नीतिसऊदी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमलों के बाद तेल की कीमतों में उछाल, तुर्किये और पाकिस्तान के साथ आपात बैठकसिंह राशिफल 25 सितंबर 2026: साझेदारी और कागजी सौदों में रखें स्पष्टता, रिश्तों में पुरानी बातें न दोहराएंकेदारनाथ में पांच महीने के भीतर 50 मीट्रिक टन से अधिक कचरा जमा, आरटीआई में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
सोशल मीडिया के एडिक्टिव डिजाइन पर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे डॉ. विकास कथूरिया और सुभिका जोशीराजस्थान
13 सित॰ 2026, 9:14 pm (11 दिन पहले)· 1

सोशल मीडिया के एडिक्टिव डिजाइन पर दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे डॉ. विकास कथूरिया और सुभिका जोशी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के यूजर को लत लगाने वाले डिजाइन और तकनीकी ढांचे के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई गई है।

दिल्ली हाईकोर्ट में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के तकनीकी ढांचे और उनके एडिक्टिव डिजाइन को चुनौती देने वाली एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका दायर की गई है। इस कानूनी मुहिम में राजस्थान के उदयपुर की रहने वाली अधिवक्ता सुभिका जोशी भी शामिल हैं, जिन्होंने अधिवक्ता कार्तिका शर्मा के साथ मिलकर कानून के प्रोफेसर डॉ. विकास कथूरिया की ओर से यह याचिका अदालत के समक्ष पेश की है। इस याचिका में उन विशेष फीचर्स पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं जो यूजर्स को लगातार ऐप पर बने रहने के लिए उकसाते हैं।

क्या है सोशल मीडिया का एडिक्टिव डिजाइन?

याचिकाकर्ताओं ने अदालत का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल उस पर मौजूद वीडियो, फोटो या पोस्ट की वजह से नहीं बढ़ रहा है। असल में, इन प्लेटफॉर्म्स के पीछे काम करने वाली कोडिंग और तकनीकी डिजाइन को इस तरह से तैयार किया गया है कि लोग चाहकर भी इनसे दूर न रह सकें। ऐसे कई फीचर्स एल्गोरिदम के जरिए काम करते हैं जो यूजर्स की पसंद को ट्रैक करते हैं और उन्हें लगातार स्क्रॉल करने के लिए मजबूर करते हैं। इस आर्किटेक्चर के कारण लोग बार-बार इन ऐप्स पर लौटते हैं, जिससे वे अपने समय और मानसिक स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया की ये तकनीकें मानव मनोविज्ञान को प्रभावित करती हैं। जब कोई यूजर बार-बार नोटिफिकेशन देखता है या अनवरत स्क्रॉलिंग करता है, तो उसका दिमाग डिजिटल रूप से बंध जाता है।

ये भी पढ़ें

बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर

याचिका में इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की गई है कि इस लत का सबसे खतरनाक असर देश के बच्चों और युवाओं पर पड़ रहा है। किशोरों के मानसिक विकास और उनके सामाजिक व्यवहार पर इन एडिक्टिव फीचर्स का बेहद नकारात्मक असर हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का यह तकनीकी ढांचा उनके व्यवहार को इस कदर प्रभावित करता है कि वे इसके आदी हो जाते हैं। इससे न केवल उनकी पढ़ाई और शारीरिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है, बल्कि उनके भीतर मानसिक तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं भी जन्म ले रही हैं।

अदालती सुनवाई और न्यायाधीश का हटना

इस अहम मामले पर 9 सितंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई तय की गई थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान पीठ के एक माननीय न्यायाधीश ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। इस रीक्यूजल के बाद अब इस याचिका को अगले सप्ताह किसी दूसरी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। कानूनी विश्लेषकों और आम जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आगामी सप्ताह में नई पीठ इस गंभीर संवेदनशील मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाती है।

कड़े कानून और दिशा-निर्देशों की मांग

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई है कि भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इन नुकसानदेह एडिक्टिव डिजाइन फीचर्स को प्रतिबंधित, नियंत्रित या नियमित करने के लिए केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को उचित आदेश दिए जाएं। याचिका में यह भी मांग की गई है कि जब तक इस विषय पर कोई सख्त संसद कानून नहीं बन जाता, तब तक सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की ओर से अस्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि देश के नागरिकों और विशेषकर बच्चों को इस डिजिटल खतरे के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखा जा सके।

सवाल-जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के उन एडिक्टिव डिजाइनों और तकनीकी आर्किटेक्चर को विनियमित या प्रतिबंधित करना है जो यूजर्स को ऐप्स की लत लगाते हैं।
इस जनहित याचिका को किसने दायर किया है?
इसे कानून के प्रोफेसर डॉ. विकास कथूरिया की ओर से अधिवक्ता सुभिका जोशी और कार्तिका शर्मा ने मिलकर दायर किया है।
याचिका में सोशल मीडिया के किस प्रभाव पर चिंता जताई गई है?
याचिका में खास तौर पर बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, विकास और उनके कल्याण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता जताई गई है।
इस मामले की सुनवाई 9 सितंबर 2026 को क्यों टल गई?
सुनवाई करने वाली पीठ के एक माननीय न्यायाधीश ने खुद को इस मामले से अलग (रीक्यूजल) कर लिया था, जिसके कारण सुनवाई टालनी पड़ी।
अब इस याचिका पर अगली सुनवाई कब और कहां होगी?
इस मामले को अगले सप्ताह दिल्ली हाईकोर्ट की एक दूसरी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp