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सुपर एल नीनो का साया: देश के 166 बड़े जलाशयों में सिर्फ 27.5 फीसदी बचा पानी, खेती और बिजली पर संकटबिहार
20 जून 2026, 10:12 am (40 दिन पहले)· 5

सुपर एल नीनो का साया: देश के 166 बड़े जलाशयों में सिर्फ 27.5 फीसदी बचा पानी, खेती और बिजली पर संकट

देश में कमजोर मानसून और सुपर एल नीनो के असर के कारण 166 प्रमुख जलाशयों का जलस्तर गिरकर कुल क्षमता का 27.5 प्रतिशत रह गया है, जिससे खरीफ फसलों और बिजली उत्पादन पर संकट मंडरा रहा है।

भारतीय मौसम में बारिश की भारी कमी देखी जा रही है और इसका मुख्य कारण सुपर एल नीनो का सक्रिय होना माना जा रहा है। मानसून के सुस्त पड़ने से देश के कृषि और ऊर्जा क्षेत्रों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में औसत से करीब 40 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इस अल्पवृष्टि का सीधा असर भारत के महत्वपूर्ण जल स्रोतों पर पड़ा है, जिससे जल संकट गहराने लगा है।

जलाशयों का जलस्तर गिरा: TrendKia की खास रिपोर्ट

TrendKia की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय जल आयोग (CWC) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि भारत के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्टॉक गिरकर उनकी कुल भंडारण क्षमता का केवल 27.5 प्रतिशत रह गया है। हालांकि, मौजूदा जल स्तर अभी भी पिछले 10 वर्षों के औसत से थोड़ा बेहतर है, लेकिन यदि बारिश का यही ढर्रा बना रहा तो आने वाले दिनों में मुश्किलें गंभीर रूप ले सकती हैं।

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इन 166 बड़े जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता लगभग 183.6 BCM है, जो भारत के कुल निर्मित जल भंडारण (257.8 BCM) का 71 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संभालते हैं। ऐसे में इन जलाशयों के सूखने का सीधा असर सिंचाई, पीने के पानी की आपूर्ति, औद्योगिक इकाइयों और जलविद्युत परियोजनाओं पर पड़ना तय है।

इनमें देश के 20 प्रमुख जलविद्युत बांध भी शामिल हैं। हिमाचल प्रदेश का गोबिंद सागर, पंजाब का थीन बांध, राजस्थान का राणा प्रताप सागर, ओडिशा का हीराकुंड, झारखंड का पंचेत हिल, गुजरात के उकाई व सरदार सरोवर और महाराष्ट्र का पेंच बांध जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं इसी सूची का हिस्सा हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलस्तर में गिरावट आने से बिजली उत्पादन की क्षमता काफी प्रभावित हो सकती है।

क्षेत्रवार स्थिति: दक्षिण और पश्चिम में बढ़ा सूखा, उत्तर-मध्य भारत में राहत

CWC के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के सभी हिस्सों में स्थिति एक जैसी नहीं है। उत्तर भारत के 11 और मध्य भारत के 28 जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में बेहतर पाया गया है। इसके विपरीत, पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों के जलाशयों में पानी की भारी कमी दर्ज की गई है।

विवरण के अनुसार, पूर्वी क्षेत्र के 27, दक्षिणी क्षेत्र के 47 और पश्चिमी क्षेत्र के 53 जलाशयों में पानी का स्टॉक पिछले साल के मुकाबले कमजोर है। असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में तो पानी की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में संतोषजनक है। लेकिन आंध्र प्रदेश, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जलाशयों का स्तर पिछले साल की समान अवधि से पीछे रह गया है।

बिजली उत्पादन और कृषि पर मंडरा रहा खतरा

पिछले वर्ष की तुलना में इस बार का मानसून काफी कमजोर नजर आ रहा है। पिछले साल मानसून ने तय समय से 8 दिन पहले केरल में दस्तक दी थी और जून के दौरान हुई जोरदार बारिश से बांध समय पर भर गए थे। इसके विपरीत, इस वर्ष मानसून केरल में तीन दिन की देरी से पहुंचा और उसके बाद भी इसकी रफ्तार धीमी बनी हुई है।

कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जुलाई में भरपूर बारिश नहीं होती है, तो खरीफ फसलों की बुवाई पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में राज्य सरकारों को सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए वैकल्पिक और कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे पानी की किल्लत और औद्योगिक बिजली कटौती का खतरा भी बढ़ जाएगा।

सवाल-जवाब

भारत के जलाशयों में पानी की कमी का मुख्य कारण क्या है?
सुपर एल नीनो के प्रभाव के चलते मानसून की सुस्त चाल और देश में सामान्य से करीब 40 फीसदी कम बारिश होना इसका मुख्य कारण है।
इस समय देश के प्रमुख जलाशयों में कितना पानी बचा है?
देश के 166 प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर घटकर उनकी कुल लाइव स्टोरेज क्षमता का लगभग 27.5 प्रतिशत ही रह गया है।
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार इन जलाशयों की कुल क्षमता कितनी है?
इन 166 जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता लगभग 183.6 BCM है, जो देश की कुल जल भंडारण क्षमता का 71 प्रतिशत से अधिक है।
किन प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के बांधों में पानी का संकट है?
इसमें हिमाचल प्रदेश का गोबिंद सागर, पंजाब का थीन बांध, राजस्थान का राणा प्रताप सागर, ओडिशा का हीराकुंड और झारखंड का पंचेत हिल शामिल हैं।
किन क्षेत्रों में जलाशयों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है?
पूर्वी भारत के 27, दक्षिणी भारत के 47 और पश्चिमी भारत के 53 जलाशयों में पानी का स्तर पिछले साल की तुलना में काफी कम है।
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