जापान में आयोजित हो रहे 20वें एशियाई गेम्स में सहारनपुर की बेटी प्राची चौधरी ने एक बार फिर देश और अपने गृह जनपद का नाम रोशन कर दिया है। प्राची ने 400 मीटर दौड़ स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया है। इस बड़ी सफलता के बाद उनके परिवार और पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है। प्राची के घर पर बधाई देने वाले लोगों का तांता लगा हुआ है और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया जा रहा है। प्राची का कभी न हारने वाला रिकॉर्ड इस बार भी बरकरार रहा है, क्योंकि वह इससे पहले भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। उन्होंने साल 2023 में चीन में आयोजित एशियाई गेम्स के दौरान सिल्वर मेडल जीता था।
चीन के एशियाई गेम्स के बाद प्राची का चयन ओलंपिक खेलों के लिए भी हुआ था, हालांकि वहां उन्हें प्रतिस्पर्धा में दौड़ने का अवसर प्राप्त नहीं हो सका था। जब उनका चयन एक बार फिर से एशियाई गेम्स के लिए हुआ, तो उनके परिवार को उनसे मेडल जीतने की पूरी उम्मीद थी, जिस पर प्राची ने पूरी तरह खरा उतरकर दिखाया है। कांस्य पदक जीतने के बाद अब प्राची का सफर थमा नहीं है, बल्कि वह 29 सितंबर को होने वाली आगामी रिले दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए मैदान में उतरेंगी। फिलहाल उनके घर पर उत्सव का माहौल है और सभी लोग उनकी स्वदेश वापसी और स्वागत की तैयारियों में व्यस्त हैं।
दस साल की उम्र से शुरू किया था संघर्ष का सफर
परिवार के सदस्यों का कहना है कि प्राची ने सिल्वर और कांस्य पदक अपने नाम कर लिए हैं और अब घर में सजे पदकों के संग्रह में केवल एक स्वर्ण पदक की कमी है। परिजनों को पूरी उम्मीद है कि कुछ दिनों बाद होने वाली अगली स्पर्धा में प्राची कांस्य के साथ स्वर्ण पदक भी जीतकर लौटेंगी। प्राची के खेल सफर की बात करें तो वह मात्र 10 साल की उम्र से दौड़ के मैदान में उतरी हुई हैं। उन्होंने अपने एथलेटिक्स करियर की शुरुआत उस दौर में की थी जब उनके घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हुआ करती थी। उन दिनों वह नंगे पांव ही गांव की कच्ची सड़कों पर कड़ा अभ्यास करती थीं। तब शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि उनकी यह अनथक दौड़ एक दिन पूरे देश का नाम दुनिया भर में रोशन करेगी, लेकिन उनकी वर्षों की दिन-रात की कड़ी मेहनत अब रंग ला रही है।
मां और पिता ने बयां की अपनी खुशी
प्राची की माता राजेश ने बताया कि मेडल जीतने के तुरंत बाद उनकी प्राची से फोन पर बात हुई थी और उस समय उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने पूरी दुनिया में परिवार का सिर ऊंचा कर दिया है और यह सब उसकी सालों की तपस्या का परिणाम है। मां ने बताया कि अब वह बेटी के घर लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। प्राची खुद भी फोन पर कह रही थी कि उसने कांस्य तो जीत लिया है, अब वह गोल्ड मेडल लेकर ही लौटेगी। इस समय उनके घर पर रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का तांता लगा हुआ है और ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया जा रहा है।
वहीं प्राची के पिता जयवीर सिंह ने गर्व महसूस करते हुए कहा कि शुरुआती दिनों से ही प्राची जिस लगन और मेहनत के साथ अभ्यास करती आ रही थी, उसे देखकर पूरा विश्वास था कि वह जरूर कोई न कोई मेडल जीतकर लाएगी। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी उनकी बेटी ने एशिया स्तर पर मेडल हासिल किया था और इस बार भी उसने अपनी सफलता का सिलसिला जारी रखा है। वह बेहद लंबे समय से इस क्षेत्र में पसीना बहा रही है और उसने अपने प्रदर्शन से देश का मान बढ़ाया है, जिस पर पूरे परिवार को गर्व है।
भाई ने साझा किए जज्बात
प्राची के भाई अंकित चौधरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि जब मेडल जीतने के बाद प्राची की उनसे फोन पर बात हुई, तो खुशी के मारे उनकी आवाज रुंध गई थी और वे ठीक से बात भी नहीं पा रहे थे। जैसे ही प्राची ने मेडल जीतने की बात बताई, वह खुद भी भावुक हो गई थी। उन्होंने आगे कहा कि अब उसके पदकों के सेट में केवल एक गोल्ड मेडल की कमी रह गई है। गौर करने वाली बात यह है कि प्राची आज तक जब भी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने गई हैं, कभी भी खाली हाथ नहीं लौटी हैं और उनका यह विजयी रिकॉर्ड आज भी पूरी तरह कायम है।

















