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तेजस Mark-1A की डिलीवरी में देरी से वायुसेना नाराज, सितंबर में एचएएल पेश करेगी रिपोर्टभारत
28 जून 2026, 2:25 am (32 दिन पहले)· 0

तेजस Mark-1A की डिलीवरी में देरी से वायुसेना नाराज, सितंबर में एचएएल पेश करेगी रिपोर्ट

भारतीय वायुसेना को मिलने वाले स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mark-1A की डिलीवरी में लगातार हो रही देरी से सैन्य आलाकमान चिंतित है, जिसे लेकर सितंबर में एक अहम समीक्षा बैठक होने जा रही है।

भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रनों की लगातार कम होती संख्या को लेकर चिंता बनी हुई है, जिसकी भरपाई के लिए स्वदेशी तेजस विमानों पर भरोसा जताया जा रहा है। हालांकि वायुसेना को अब तक तेजस मार्क-1 के 38 विमान सौंपे जा चुके हैं, लेकिन इसके आधुनिक संस्करण तेजस Mark-1A का एक भी विमान अभी तक डिलीवर नहीं किया जा सका है। वायुसेना ने देश की प्रमुख विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ कुल 180 एलसीए तेजस Mark-1A विमानों की आपूर्ति के लिए एक बड़ा समझौता किया है। इसके बावजूद, एचएएल समय पर आपूर्ति करने की अपनी समय-सीमा को कई बार टाल चुकी है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तेजस Mark-1A कार्यक्रम की ताजा प्रगति समीक्षा रिपोर्ट के साथ एचएएल सितंबर के महीने में भारतीय वायुसेना के सामने उपस्थित हो सकती है।

यह समीक्षा रिपोर्ट पहले काफी पहले पेश की जानी थी। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में इस रिपोर्ट को अप्रैल में प्रस्तुत किया जाना तय हुआ था, लेकिन बाद में इसे टालकर मई कर दिया गया। इसके बाद जून के महीने में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एचएएल के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की थी, जिसमें तेजस लड़ाकू विमान कार्यक्रम भी विशेष रूप से शामिल था। इसके बाद एचएएल ने इस साल सितंबर में तेजस Mark-1A की नई प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए समय मांगा है।

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तकनीकी चुनौतियां और अब तक के सुधार

एचएएल के पूर्व सीएमडी डॉ. डीके सुनील ने इससे पहले इस विमान की तकनीकी स्थिति को लेकर कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की थीं। उन्होंने बताया था कि पिछले साल दिसंबर में भारतीय वायुसेना के साथ हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया था कि विमान में BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, लेजर-गाइडेड बम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और रडार को आपस में जोड़ने का मुख्य काम सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। हालांकि, रडार की कार्यप्रणाली में कुछ और सुधार करने और कुछ अन्य तकनीकी खामियों को दूर करने का काम बाकी रह गया था।

अगर आगामी सितंबर में होने वाली समीक्षा बैठक तक रडार की इस समस्या और अन्य तकनीकी खामियों को पूरी तरह से ठीक कर लिया जाता है, और भारतीय वायुसेना इन तकनीकी सुधारों को हरी झंडी दे देती है, तो विमानों की डिलीवरी कब से शुरू होगी, इस बात की सटीक तारीखें सामने आ सकती हैं।

इंजन की आपूर्ति का बड़ा संकट

तेजस लड़ाकू विमान के विकास और उत्पादन में देरी का एक मुख्य कारण इसके इंजन मिलने में हो रही देरी रही है। हालांकि, अब इंजनों की उपलब्धता धीरे-धीरे सुधरने लगी है। एचएएल के पास इस समय छह इंजन मौजूद हैं, जिनमें से छठा इंजन इसी साल मई के महीने में प्राप्त हुआ था। हालांकि, उस छठे इंजन में भी शुरुआती जांच के दौरान कुछ खामियां पाई गई थीं।

नियमों के अनुसार, जब भी कोई नया इंजन या उपकरण प्राप्त होता है, तो उसका कड़ा तकनीकी परीक्षण किया जाता है। एचएएल के कुशल इंजीनियरों ने जब इस छठे इंजन की सघन जांच की, तो उसमें कुछ तकनीकी गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद मानक प्रक्रिया का पालन करते हुए इसकी जानकारी अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) को भेजी गई। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जीई ने उन सभी तकनीकी कमियों को दुरुस्त कर दिया है।

तेजस Mark-1A विमानों के लिए इंजन की आपूर्ति का मुख्य समझौता साल 2021 में अमेरिकी कंपनी जीई के साथ किया गया था। इस बड़े करार के तहत भारत को कुल 99 F404 इंजन मिलने हैं। इसके अलावा, नवंबर 2025 में 97 और अतिरिक्त तेजस Mark-1A लड़ाकू विमानों के लिए 113 इंजन खरीदने की एक और डील फाइनल की जा चुकी है।

वायुसेना की नाराजगी और जुर्माने की तैयारी

तेजस Mark-1A विमानों की आपूर्ति में बार-बार हो रहे इस विलंब से सैन्य नेतृत्व में स्पष्ट निराशा देखी जा रही है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह कई अवसरों पर सार्वजनिक मंचों से अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। अब इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए भारत का रक्षा मंत्रालय डिलीवरी में देरी के लिए एचएएल पर आर्थिक जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है। रक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अनुबंध के नियमों के तहत पेनल्टी लगाने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, एचएएल ने भी इंजनों की आपूर्ति में देरी के लिए अमेरिकी कंपनी जीई पर इसी तरह का जुर्माना लगाने की बात कही है।

उत्पादन की वर्तमान स्थिति और उम्मीदें

तमाम अड़चनों के बावजूद, रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को विश्वास है कि इस साल के अंत तक वायुसेना को तेजस Mark-1A विमानों की डिलीवरी मिलना शुरू हो जाएगी। वर्तमान में एचएएल के पास छह इंजन मौजूद हैं और लगभग 18 विमानों के बुनियादी ढांचे बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं। योजना के मुताबिक, इस साल के अंत तक करीब 24 लड़ाकू विमानों के ढांचे तैयार होने की उम्मीद जताई गई है। बहरहाल, जमीनी हकीकत यही है कि भारतीय वायुसेना को अब तक तेजस Mark-1A का पहला विमान मिलने का बेसब्री से इंतजार है।

सवाल-जवाब

भारतीय वायुसेना ने एचएएल के साथ कुल कितने तेजस मार्क-1A विमानों का सौदा किया है?
वायुसेना ने एचएएल के साथ कुल 180 एलसीए तेजस मार्क-1A विमानों की खरीद का समझौता किया है।
तेजस मार्क-1A विमानों की डिलीवरी में देरी की मुख्य वजह क्या है?
डिलीवरी में देरी का मुख्य कारण अमेरिकी कंपनी जीई से इंजनों की आपूर्ति में विलंब होना और विमान के रडार सिस्टम में तकनीकी सुधारों का पूरा न हो पाना है।
विमान के किस इंजन को लेकर जांच में तकनीकी खामियां पाई गई थीं?
मई में मिले छठे अमेरिकी F404 इंजन की जांच के दौरान कुछ तकनीकी कमियां पाई गई थीं, जिन्हें बाद में निर्माता कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) ने ठीक कर दिया।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और रक्षा मंत्रालय ने इस देरी पर क्या रुख अपनाया है?
वायुसेना प्रमुख ने सार्वजनिक रूप से इस देरी पर नाराजगी जताई है, और रक्षा मंत्रालय अब समय पर डिलीवरी न करने के लिए एचएएल पर आर्थिक जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है।
एचएएल की प्रगति रिपोर्ट की अगली समीक्षा बैठक कब होने की उम्मीद है?
सितंबर में एचएएल भारतीय वायुसेना के सामने तेजस मार्क-1A कार्यक्रम की प्रोग्रेस रिपोर्ट के साथ समीक्षा बैठक में हिस्सा ले सकती है।
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