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उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनावी घमासान शुरू, सात पर एनडीए मजबूत तो सपा दो पर तयउत्तर प्रदेश
29 सित॰ 2026, 8:45 am (30 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनावी घमासान शुरू, सात पर एनडीए मजबूत तो सपा दो पर तय

उत्तर प्रदेश में खाली हो रही दस राज्यसभा सीटों पर मतदान 16 अक्टूबर को होगा, जिसमें सात सीटों पर एनडीए और दो पर सपा गठबंधन की राह आसान दिख रही है।

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में राज्यसभा की दस सीटों के लिए होने वाले मुकाबले को लेकर सरगर्मी काफी बढ़ गई है। चुनाव आयोग द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार इन सभी सीटों पर 16 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे, जिसके लिए नामांकन प्रपत्रों का वितरण आज से आरंभ हो गया है। चुनाव नियमों के तहत प्रत्येक उम्मीदवार अधिकतम चार सेट में नामांकन पत्र दाखिल करने का अधिकार रखता है। नियमानुसार एक सेट पर कम से कम दस विधायकों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य होता है। इसी गणित को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी ने अपने तमाम विधायकों को राजधानी लखनऊ में ही डेरा डाले रहने की हिदायत दी है। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने भी अपनी कोर कमेटी की अहम बैठक बुलाकर प्रत्याशियों के चयन पर मंथन किया है, जिसके बाद प्रत्याशियों के नामों की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है।

विधानसभा का संख्या बल और जीत का गणित

सदन की मौजूदा स्थिति को देखें तो राज्य की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 6 सीटें इस समय रिक्त पड़ी हैं। इस वजह से विधानसभा में प्रभावी सदस्यों की कुल संख्या 397 रह गई है। 16 अक्टूबर को होने वाले इस मतदान में एक राज्यसभा सीट अपने नाम करने के लिए किसी भी दल के प्रत्याशी को न्यूनतम 37 प्रथम वरीयता वोटों की दरकार होगी। सत्ताधारी एनडीए खेमे के पास इस समय 294 विधायकों का मजबूत समर्थन मौजूद है। इस संख्या बल के दम पर एनडीए गठबंधन अपने सात प्रत्याशियों को बिना किसी अड़चन के संसद के उच्च सदन भेजने की स्थिति में है। हालांकि आठवीं सीट पर जीत दर्ज करने के लिए उसे दो अतिरिक्त वोटों की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उस सीट पर मुकाबला रोचक होने के आसार हैं।

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विपक्षी खेमे की रणनीति और पेंच

विपक्षी मोर्चे की बात करें तो समाजवादी पार्टी के पास कांग्रेस के विधायकों को शामिल करते हुए कुल 103 विधायकों का संख्या बल है। फॉर्मूले के अनुसार दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए समाजवादी पार्टी को कुल 74 विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में सपा अपने दम पर दो सीटें तो बेहद आसानी से निकाल लेगी, मगर तीसरी सीट पर अपनी दावेदारी साबित करने के लिए उसे अतिरिक्त मतों की आवश्यकता होगी। यदि सपा तीसरी सीट पर अपना उम्मीदवार उतारती है, तो जरूरी वोटों के अभाव में वहां भी कड़ा पेंच फंसना तय माना जा रहा है।

आगामी विधानसभा चुनाव पर भी दिखेगा असर

नामांकन प्रक्रिया की शुरुआत के साथ ही आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों के बीच सीटों को लेकर खींचतान और तेज होने की पूरी संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दस सीटों के नतीजे आने के बाद सूबे का पूरा राजनीतिक माहौल आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों की दिशा में केंद्रित हो जाएगा। सभी प्रमुख दल न सिर्फ संगठनात्मक बैठकें कर रहे हैं बल्कि गठबंधन के समीकरणों को दुरुस्त करने की कवायद भी शुरू कर चुके हैं।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की कितनी सीटों पर चुनाव हो रहा है?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव कराया जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान कब होगा?
इन 10 सीटों पर मतदान 16 अक्टूबर को कराया जाएगा।
एक सीट जीतने के लिए कितने वोटों की आवश्यकता होगी?
विधानसभा में मौजूदा 397 विधायकों के अनुसार एक सीट जीतने के लिए कम से कम 37 वोटों की जरूरत होगी।
एनडीए और सपा गठबंधन के पास इस समय कितने विधायक हैं?
एनडीए के पास 294 विधायक हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास कांग्रेस को मिलाकर कुल 103 विधायक हैं।
एक उम्मीदवार अधिकतम कितने सेट में नामांकन दाखिल कर सकता है?
प्रत्येक उम्मीदवार अधिकतम चार सेट में नामांकन पत्र दाखिल कर सकता है, जिसमें हर सेट पर 10 विधायकों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·29 दिन पहले

सात और दो सीटों का गणित तो ठीक है, पर मुझे लगता है तीसरी और आठवीं सीट को लेकर खेल कुछ ज़्यादा ही दिलचस्प होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

अरे भाई, 37 वोटों का जादुई आंकड़ा ही सारा खेल तय कर रहा है! एनडीए सात सीटें तो आराम से निकाल लेगी, लेकिन आठवीं सीट पर दो वोटों की कमी बड़ा ड्रामा करवा सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

अरे अर्जुन, गणित तो साफ है पर राजनीति में दो वोटों का जुगाड़ कौन सी बड़ी बात है। एनडीए आठवीं सीट भी आसानी से निकाल सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

दस सीटों के इस खेल में असली मजा आठवीं और तीसरी सीट पर फंसे पेंच का है। लखनऊ में विधायकों की बाड़बंदी शुरू हो चुकी है, अब देखना होगा कि क्रॉस वोटिंग का खेल कौन खेलता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

रोहन भाई, बाड़बंदी की बात तो ठीक है पर मुझे लगता है कि इस बार मामला इतना उलझेगा नहीं। एनडीए के पास संख्या है, सब शांति से निपट जाएगा।

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