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उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण 2027 से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर लगी रोकउत्तर प्रदेश
22 अक्तू॰ 2026, 12:25 am (7 दिन पहले)· 6

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण 2027 से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर लगी रोक

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा मतदाता सूची पुनरीक्षण 2027 से जुड़े सभी अधिकारियों के स्थानांतरण पर निर्वाचन आयोग ने रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध सूची के अंतिम प्रकाशन तक प्रभावी रहेगा और बिना अनुमति ट्रांसफर नहीं किए जाएंगे।

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण 2027 की पूरी प्रक्रिया से जुड़े तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है। यह आदेश आलेख्य प्रकाशन से लेकर सूची के अंतिम प्रकाशन तक कड़ाई से लागू रहेगा और इस दौरान बिना आयोग की मंजूरी के किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।

तबादलों पर रोक और मुख्य तिथियां

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अर्हता तिथि 01 जनवरी 2027 के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम तय किया गया है। तय शेड्यूल के मुताबिक, एकीकृत मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 12 नवंबर 2026 को किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक मतदाताओं से दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। इन सभी आपत्तियों का नियमानुसार निस्तारण 28 दिसंबर 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके पश्चात 04 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची का आधिकारिक प्रकाशन किया जाएगा।

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कानूनी प्रावधान और आयोग का नियंत्रण

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 13 सीसी के प्रावधानों के तहत मतदाता सूची तैयार करने, उसका पुनरीक्षण करने और संशोधन कार्य में संलिप्त सभी अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग में प्रतिनियुक्ति पर माने जाते हैं। जिस समयावधि तक वे इस जिम्मेदारी पर तैनात रहते हैं, वे सीधे तौर पर आयोग के नियंत्रण, पर्यवेक्षण और अनुशासन के अंतर्गत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं।

रिक्त नहीं रखे जाएंगे पद

निर्वाचन आयोग के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, इस पूरी पुनरीक्षण अवधि के दौरान जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी समेत इस कार्य में प्रत्यक्ष रूप से जुड़े किसी भी अधिकारी का पद रिक्त नहीं छोड़ा जाएगा। यदि किसी कारणवश पद खाली होता है तो उसे तुरंत भरा जाएगा और किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण आयोग की पूर्व अनुमति के बिना संभव नहीं होगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग के इन तमाम निर्देशों से राज्य के सभी संबंधित विभागों को समय पर अवगत करा दिया गया है। प्रशासन की मंशा मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण 2027 के कार्य को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी तरह पारदर्शी, सुचारू और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने की है ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण 2027 से जुड़े अधिकारियों के तबादलों पर क्या स्थिति है?
अंतिम प्रकाशन तक निर्वाचन आयोग की अनुमति के बिना इन अधिकारियों के तबादलों पर पूरी रोक लगा दी गई है।
मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन कब किया जाएगा?
एकीकृत मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 12 नवंबर 2026 को किया जाएगा।
दावे और आपत्तियां किस अवधि में दर्ज कराई जा सकेंगी?
दावे और आपत्तियां 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक प्राप्त की जाएंगी।
अंतिम मतदाता सूची कब प्रकाशित होगी?
मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 04 जनवरी 2027 को किया जाएगा।
किस अधिकारी ने तबादलों पर रोक की जानकारी दी है?
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इसकी जानकारी दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·7 दिन पहले

चुनाव आयोग का ट्रांसफर रोकने का कदम ठीक है, पर 2026 के अंत तक अफसरों को एक ही जगह रोके रखना व्यावहारिक नहीं लगता। ज़मीनी स्तर पर काम करने वालों के लिए यह काफी लंबा समय है।

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

चुनाव से पहले प्रशासनिक अमले को कसना बहुत ज़रूरी है। कम से कम बीच में अफसर नहीं बदलेंगे तो वोटर लिस्ट का काम बिना किसी रुकावट के सही समय पर पूरा हो पाएगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 दिन पहले

रविकाश जी, बात तो ठीक है पर नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक अफसरों के हाथ बांधना थोड़ा ज्यादा नहीं हो जाता? क्या पता कोई मेडिकल इमरजेंसी या बड़ा प्रशासनिक कारण आ जाए।

Rohan Verma@rohan-verma·7 दिन पहले

पिछले चुनाव में जब हमारे यहाँ बीएलओ का अचानक ट्रांसफर हो गया था, तो पूरा काम अटक गया था और वोटर लिस्ट सुधरवाने में चक्कर काटते-काटते हमारे जूते घिस गए थे। आयोग का यह कदम सही है ताकि इस बार कम से कम लोगों को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। चुनाव के वक्त बीच में अधिकारी बदलने से सारा काम रुक जाता है और आम जनता को ही सबसे ज्यादा धक्के खाने पड़ते हैं।

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