खरीदारी के दौरान जरा सी असावधानी कभी-कभी भारी आर्थिक संकट खड़ी कर देती है। हैदराबाद के एक प्रमुख शॉपिंग मॉल में लग्जरी आईवियर स्टोर पहुंचे एक ग्राहक के साथ ऐसा ही हैरान करने वाला वाकया सामने आया है। वहां डिस्प्ले में रखा वर्साचे ब्रांड का लगभग 25 हजार रुपये मूल्य का चश्मा देखते समय हाथ से फिसलकर फर्श पर गिर गया। चश्मा गिरते ही दुकान के स्टाफ ने तुरंत रुख कड़ा कर लिया और ग्राहक से पूरे नुकसान की भरपाई करने की मांग रख दी। उस समय ग्राहक की वित्तीय स्थिति ऐसी थी कि उसके बैंक खाते में महज 144 रुपये बचे हुए थे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी और घबराहट की स्थिति बन गई।
एएमबी मॉल में महंगी खरीदारी की कोशिश और भारी भरपाई
यह पूरा घटनाक्रम हैदराबाद स्थित एएमबी मॉल के एक प्रीमियम चश्मा स्टोर का है। ग्राहक अपनी पसंद का चश्मा तलाशने के मकसद से वहां गया था और काउंटर पर वर्साचे के डिजाइन देख रहा था। जैसे ही उसने एक चश्मा उठाकर देखना चाहा, वह अनजाने में हाथ से छूट गया। स्टोर के एक कर्मचारी ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कहा कि चश्मा खराब हो चुका है और नियमानुसार इसकी पूरी 25 हजार रुपये की कीमत उसे ही चुकानी होगी। ग्राहक के पास उस समय पैसे नहीं थे, इसलिए स्टोर के कर्मचारियों के साथ बातचीत का लंबा दौर चला। काफी मान-मनौव्वल और चर्चा के बाद स्टोर स्टाफ इस बात पर राजी हुआ कि पूरे फ्रेम का पैसा न लेकर केवल टूटे हुए लेंस की लागत वसूली जाएगी। यह रकम 12 हजार रुपये तय की गई।
खाते में सिर्फ 144 रुपये, दोस्त से मदद की गुहार
लेंस के नुकसान के तौर पर तय किए गए 12 हजार रुपये भी उस समय उस ग्राहक के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थे। उसके बैंक खाते की शेष राशि महज 144 रुपये थी। मॉल के उस माहौल से बाहर निकलने और स्टाफ के दबाव से बचने के लिए उसने तुरंत अपने एक परिचित दोस्त से संपर्क साधा। उसने दोस्त को पूरी बात बताई और उससे तुरंत 12 हजार रुपये उधार लिए। दोस्त की तरफ से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए जाने के बाद उसने स्टोर को भुगतान किया और वहां से बाहर निकला। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में उसने कर्मचारी के नजरिए को भी समझने की कोशिश की और माना कि काम के दौरान स्टाफ के सामने भी ऐसे हालात संभालना काफी तनावपूर्ण होता है, फिर भी इस कटु अनुभव के बाद उसने वर्साचे ब्रांड से पूरी तरह दूरी बनाने की बात कही।
बिना इनवॉइस पैसे लेने पर स्टोर मैनेजर के खिलाफ शिकायत
पैसे चुकाकर मॉल से निकलने के बाद भी यह मामला शांत नहीं हुआ। ग्राहक ने पाया कि स्टोर प्रबंधन ने 12 हजार रुपये वसूलने के बावजूद उसे न तो कोई आधिकारिक बिल दिया और न ही किसी रसीद या दस्तावेज पर यह लिखकर दिया कि यह रकम किस नियम या आधार पर ली गई है। यहां तक कि जब उसने 25000 रुपये के वास्तविक नुकसान और उससे वसूली गई राशि का ब्यौरा मांगा, तो स्टोर ने कोई भी लिखित साक्ष्य देने से साफ मना कर दिया। इस मनमाने व्यवहार से आहत होकर उसने स्टोर मैनेजर का नाम नोट किया और संबंधित कंपनी और स्टोर प्रबंधन के उच्चाधिकारियों के पास मैनेजर के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज करवाई है। उसका आरोप है कि बिना पक्के बिल के इस तरह नकद या डिजिटल भुगतान लेना नियमों के विपरीत है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, इंश्योरेंस और स्टोर नियमों पर उठे सवाल
इस पूरे वाकये को जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर साझा किया गया, तो वहां उपभोक्ताओं के अधिकारों और रिटेल स्टोर के नियमों को लेकर एक बड़ी बहस शुरू हो गई। इंटरनेट यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या किसी रिटेल स्टोर को अनजाने में हुए नुकसान के लिए किसी ग्राहक से जबरन पैसे वसूलने का कानूनी हक है। कई अनुभवी उपभोक्ताओं ने कहा कि किसी भी भुगतान पर हामी भरने से पहले स्टोर की रिटर्न, डैमेज पॉलिसी और इंश्योरेंस नियमों की पड़ताल करनी चाहिए थी।
चर्चा के दौरान एक उपभोक्ता ने ध्यान दिलाया कि वर्साचे के चश्मों का निर्माण और वितरण लक्सोटिका समूह से जुड़ा हुआ है। ऐसी बड़ी कंपनियों के पास आमतौर पर स्टोर लेवल पर टूटने-फूटने के मामलों के लिए वारंटी और कॉर्पोरेट क्लेम की स्पष्ट व्यवस्था होती है। उसने अपने प्राडा चश्मे का हवाला देकर बताया कि उसके मामले में स्टोर ने नुकसान की भरपाई कंपनी की वारंटी और इंश्योरेंस के तहत क्लेम करके की थी, न कि ग्राहक की जेब से वसूली की गई थी। इसके जवाब में पीड़ित ग्राहक ने फिर दोहराया कि स्टोर ने उसे कोई भी लिखित दस्तावेज या बिल देने से इनकार कर दिया था। अन्य यूजर्स ने कहा कि आमतौर पर बड़े ब्रांड्स अपने माल का व्यापक ट्रांजिट और इन-स्टोर इंश्योरेंस रखते हैं। लोगों ने पीड़ित को सलाह दी कि वह किसी वकील या परिवार के वरिष्ठ सदस्यों को साथ लेकर स्टोर जाए और बिना बिल वसूली गई राशि को इंश्योरेंस प्रक्रिया के तहत वापस कराने की मांग करे। अधिकांश लोगों ने यह भी माना कि अचानक किसी महंगे स्टोर में ऐसी घटना होने पर आम ग्राहक घबरा जाता है और उस अप्रिय स्थिति से बचने के लिए तुरंत भुगतान करने पर मजबूर हो जाता है।















