सवाई माधोपुर स्थित प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। बाघों की प्राकृतिक नर्सरी के रूप में अपनी खास पहचान रखने वाले इस राष्ट्रीय उद्यान के लाहपुर वनक्षेत्र में बाघिन टी 93 को एक नवजात शावक के साथ घूमते हुए देखा गया है। इस नए नन्हे सदस्य के आगमन के साथ ही रणथंभौर प्रथम में बाघों की कुल तादाद में इजाफा दर्ज किया गया है और यह संख्या अब 63 पर पहुंच गई है। नए शावक की मौजूदगी ने पूरे वन क्षेत्र में वन्यजीव प्रेमियों और वन अधिकारियों के बीच खुशी का माहौल बना दिया है।
लाहपुर वनक्षेत्र में नन्हे शावक के साथ दिखी बाघिन
रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व के रणथंभौर प्रथम प्रभाग अंतर्गत आने वाले लाहपुर इलाके में बाघिन टी 93 को अपने नन्हे शावक के साथ विचरण करते हुए चिन्हित किया गया। यह बाघिन टी 93 का तीसरा प्रसव यानी लिटर है। इस नए जन्म के साथ ही अभयारण्य में बाघों के परिवार में एक नई पीढ़ी का विस्तार हुआ है। वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती दौर में अभी एक ही शावक बाघिन के साथ दिखाई पड़ा है, लेकिन शावकों की असल संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है।
सटीक संख्या जानने के लिए लगाए जा रहे कैमरा ट्रैप
वन क्षेत्र में शावकों की सही संख्या और उनकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि करने के लिए वन विभाग व्यापक तकनीकी निगरानी का सहारा ले रहा है। लाहपुर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में विशेष फोटो ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि कैमरा ट्रैप से मिलने वाली तस्वीरों और वीडियो फुटेज के तकनीकी विश्लेषण के उपरांत ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा कि बाघिन ने वास्तव में कितने शावकों को जन्म दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था और सतत निगरानी के पुख्ता इंतजाम
नवजात शावक और मां की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग की विशेष टीमें पूरी तरह मुस्तैद हो गई हैं। डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि फील्ड स्टाफ को कड़े दिशा-निर्देश दिए गए हैं ताकि इलाके में लगातार गश्त जारी रहे। मैदानी कर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बाघिन और उसके शावक के प्राकृतिक विचरण में इंसानी गतिविधियों या किसी अन्य कारण से जरा भी व्यवधान न पहुंचे।
बाघ संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत
रणथंभौर प्रथम में बाघों की संख्या बढ़कर 63 होना इस बात का प्रमाण है कि इस अभयारण्य में बाघों के सुरक्षित प्रजनन और प्रभावी आवास प्रबंधन के परिणाम निरंतर सामने आ रहे हैं। डीएफओ ने रेखांकित किया कि अभयारण्य में सतत ट्रैकिंग, वैज्ञानिक निगरानी और वन्यजीव संरक्षण की सुनियोजित नीतियां लगातार क्रियान्वित की जा रही हैं। बाघिन टी 93 द्वारा दिया गया यह नया जीवन रणथंभौर के पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती को दर्शाता है।


















