अवैध दवा सिंडिकेट पर शिकंजा: 20 करोड़ से अधिक की 25 अचल संपत्तियों पर कानूनी तालादिल्ली से गुवाहाटी तक दौड़ेगी बुलेट ट्रेन, केंद्र सरकार ने दी नॉर्दर्न हाई-स्पीड कॉरिडोर विस्तार को मंजूरीरास्तों के किनारे उगने वाला अपामार्ग छिपाए है कई औषधीय गुण, वैद्य डॉ. अभिषेक कुमार मिश्र ने दी सही इस्तेमाल की सलाहदिल्ली रैली कूच के दौरान मुरादाबाद में सपा नेता इकबाल इंजीनियर के विवादित नारे, विधायक कमाल अख्तर ने रोकाबारां में वनकर्मियों से मारपीट और जब्ती छुड़ाने के आरोप में नरेश मीणा पर एक हफ्ते में तीसरा केसविदेश जाने वाले यात्रियों के लिए डिजी यात्रा का परीक्षण शुरू, सात बड़े हवाई अड्डों पर ई-पासपोर्ट से मिलेगी डिजिटल एंट्रीअनिल कपूर ने दिखाई अपने शो के पीछे की कड़ी मेहनत, पचास दिनों की रिहर्सल का वीडियो आया सामनेरामलीला मैदान की रैली पर संबित पात्रा का प्रहार, राहुल गांधी के दावों को बताया हकीकत से कोसों दूरमणिपुर के मुख्य सचिव ने थौबल के राहत शिविरों का लिया जायजा, विस्थापितों से मिलकर जानीं समस्याएंबिहार के भागलपुर जंक्शन पर दिनदहाड़े सनसनी, युवक को चाकू घोंपकर मारी गोली
कार्तिक मास की कालाष्टमी पर इन अचूक उपायों से करें संकटों का निवारण, व्यापार और परिवार में लौटेगी शांतिधर्म
1 नव॰ 2026, 8:20 pm (15 मिनट पहले)· 0

कार्तिक मास की कालाष्टमी पर इन अचूक उपायों से करें संकटों का निवारण, व्यापार और परिवार में लौटेगी शांति

कार्तिक माह में 2 नवंबर 2026 को पड़ने वाली कालाष्टमी पर भगवान शिव के रौद्र रूप की साधना से जीवन के आर्थिक अवरोध, गृह क्लेश और भय को शांत करने के पारंपरिक विधान बताए गए हैं।

हिंदू पंचांग में हर महीने के कृष्ण पक्ष के आठवें दिन पड़ने वाली अष्टमी को कालाष्टमी के तौर पर मनाया जाता है, जिसका कार्तिक मास में विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। वर्ष 2026 में यह पावन तिथि 2 नवंबर को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन महादेव के उग्र रूप बाबा भैरव की आराधना के लिए समर्पित रहता है। शिव पुराण और तंत्र शास्त्र में भैरव देव के मुख्यतः दो स्वरूपों का वर्णन मिलता है, जिनमें एक सौम्य बटुक भैरव हैं और दूसरे भय का संहार करने वाले काल भैरव हैं। कालाष्टमी के इस विशिष्ट अवसर पर विशेष रूप से काल भैरव की आराधना करने की परंपरा रही है, जिससे अनिष्टकारी शक्तियों, अज्ञात भय और जीवन के तमाम संकटों से मुक्ति मिलने का विश्वास है। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले कुछ सरल अनुष्ठान मनुष्य के सांसारिक कष्टों को दूर करने में अत्यंत प्रभावी सिद्ध होते हैं।

व्यापार विस्तार और धन के नुकसान से उबरने के उपाय

यदि कोई व्यक्ति अपने कारोबार की सीमाएं बढ़ाकर उसे अन्य महानगरों अथवा विदेशी बाजारों तक पहुंचाना चाहता है, तो इस पर्व पर एक पारंपरिक तांत्रिक क्रिया की जाती है। साधक को कालाष्टमी के अवसर पर भैरव जी के मंदिर में पहुंचकर लगभग सवा सौ ग्राम साबुत उड़द की दाल अर्पित करनी चाहिए। पूजा संपन्न होने के उपरांत उसी अर्पित दाल में से ठीक 11 दाने गिनकर अलग कर लें। इन दानों को एक साफ काले वस्त्र में लपेटें और अपनी कार्यशाला अथवा दुकान की तिजोरी में सुरक्षित रख दें। इस संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान काले कपड़े में रखते समय प्रत्येक दाने के साथ 'ऊँ ह्रीं बटुकाय आपद्उद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊँ' मंत्र का उच्चारण अवश्य करें।

ये भी पढ़ें

इसके विपरीत कई लोग दिन-रात अथक श्रम करने और प्रचुर धन कमाने के बावजूद हाथ में बचत न टिकने की समस्या से ग्रस्त रहते हैं। नित्य नए अप्रत्याशित खर्चे जमा पूंजी को समाप्त कर देते हैं। इस आर्थिक अस्थिरता को समाप्त करने के लिए कालाष्टमी के पावन पर्व पर नागकेसर का एक फूल प्राप्त करें। यदि आसपास ताजा पुष्प न मिल सके, तो पंसारी की हाट से लाया गया सूखा नागकेसर भी उपयोग में लाया जा सकता है। इस पुष्प को एक लाल रंग के कपड़े में सावधानी से लपेटकर अपने समीप सहेज कर रखें, जिससे व्यर्थ के अपव्यय पर अंकुश लगता है।

कार्यस्थल की समस्याओं और दांपत्य जीवन में मधुरता के विधान

दफ्तर अथवा कार्यस्थल पर नकदी के प्रवाह या आर्थिक तालमेल को लेकर आ रही दिक्कतों को सुधारने के लिए भी नागकेसर का प्रयोग लाभकारी माना गया है। कालाष्टमी की तिथि पर पंसारी से नागकेसर का पुष्प लाकर अपने निजी पूजा स्थल में स्थापित करें। वहां रोली, अक्षत और धूप से उसकी विधिवत अर्चना करें। पूरे दिन उस फूल को पूजा स्थल पर ही प्रतिष्ठित रहने दें। अगले दिन प्रातःकाल नित्यकर्म और स्नान से निवृत्त होने के बाद उस अभिमंत्रित पुष्प को श्रद्धापूर्वक उठाकर अपने दफ्तर के कैशबॉक्स में रख लें।

यदि दांपत्य संबंधों में कड़वाहट आ गई हो और वैवाहिक जीवन में प्रेम तथा तालमेल का अभाव महसूस हो रहा हो, तो इस दिन देवी भगवती की शरण में जाना चाहिए। बाजार अथवा बगीचे से लाया गया एक ताजा या सूखा नागकेसर का फूल लेकर उस पर शहद की एक बूंद लगाएं। इसके पश्चात उस पुष्प को मां दुर्गा के चरणों में समर्पित कर दें और दोनों जीवनसाथियों के बीच प्रेम तथा आजीवन सहचर्य बनाए रखने की विनती करें।

गृह क्लेश, वास्तु दोष और नकारात्मक ऊर्जा का निवारण

घर में अकारण तनाव, अशांति अथवा परिजनों के भीतर काम में अरुचि जैसी स्थितियां तब पनपती हैं जब भवन में नकारात्मक ऊर्जा का वास हो जाता है। इस दोष को दूर करने के लिए कालाष्टमी पर सूती मौली अथवा कलावा से एक लंबा धागा निकालें। उस धागे में सात अलग-अलग स्थानों पर गांठें लगाएं। ध्यान रहे कि प्रत्येक गांठ बांधते समय 'ऊँ ह्रीं बटुकाय आपद्उद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊँ' मंत्र का पाठ करें। तत्पश्चात उस रक्षासूत्र को घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर बांध दें, जिससे घर में सकारात्मक वातावरण का संचार होने लगता है।

जीवनसाथी के कष्टों को दूर करने के लिए भी इस दिन एक संयुक्त साधना का विधान है। यदि पति अथवा पत्नी में से कोई गंभीर मानसिक या शारीरिक कष्ट झेल रहा हो, तो कालाष्टमी की सुबह स्वच्छ वस्त्र धारण करके देवाधिदेव शिव की प्रतिमा के समक्ष आसन लगाकर बैठें। वहां एकाग्र मन से संपूर्ण शिव चालीसा का पाठ करें और अंत में भैरव जी के सिद्ध मंत्र 'ऊँ ह्रीं बटुकाय आपद्उद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊँ' का एक बार श्रद्धापूर्वक जप करें।

बच्चों की सुरक्षा, नजर दोष और करियर संबंधी समझ

अक्सर माता-पिता को यह संशय रहता है कि किसी गुप्त बाधा, नजर दोष अथवा तंत्र-मंत्र के असर के कारण उनके बालक की प्रगति बाधित हो रही है। इस नकारात्मक प्रभाव को समाप्त करने के लिए कालाष्टमी पर एक मुट्ठी काले तिल लेकर भैरव जी का स्मरण करें। फिर उन तिलों को बच्चे के मस्तक से सात बार उसारें, जिसमें छह बार घड़ी की सुई की दिशा में और एक बार सुई की विपरीत दिशा में घुमाना अनिवार्य है। इसके बाद इन तिलों को बहते हुए जल प्रवाह में प्रवाहित कर दें और विसर्जन के समय 'ऊँ ह्रीं बटुकाय आपद्उद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊँ' मंत्र का उच्चारण करें।

यदि संतान स्वयं का नया उद्यम प्रारंभ करने की अभिलाषा रखती हो परंतु उसमें व्यावहारिक व्यापारिक समझ और निर्णय क्षमता का अभाव दिखता हो, तो इस दिन मिट्टी का एक विशेष प्रयोग किया जाता है। किसी स्वच्छ स्थान से शुद्ध मिट्टी लाकर जल मिलाकर गूंथ लें और उससे 27 नन्हीं गोलियां तैयार करके सुखा लें। कालाष्टमी से आरंभ करके प्रतिदिन एक गोली अपनी संतान के हाथों से घर के पूजा स्थल में रखवाएं। यह क्रम 27 दिनों तक लगातार चलेगा। बाद में सुविधानुसार उन गोलियों को किसी मंदिर परिसर अथवा किसी पवित्र वृक्ष की जड़ के पास छोड़ दें।

अज्ञात भय से मुक्ति, भौतिक सुख-सुविधाएं और जीवन में स्थिरता

मन में हर समय किसी अनहोनी अथवा पराजय का भय बना रहता हो, तो मानसिक संबल प्राप्त करने के लिए कालाष्टमी के दिन भैरव जी के पावन चरणों में एक काले रंग का सूती धागा अर्पित करें। उस धागे को लगभग 5 मिनट तक विग्रह के चरणों में ही स्पर्श रहने दें और इस अंतराल में 'ऊँ ह्रीं बटुकाय आपद्उद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊँ' मंत्र का निरंतर जप करें। निर्धारित समय पूर्ण होने पर उस अभिमंत्रित धागे को उठाकर अपने दाएं पैर में बांध लें।

अपने जीवन में भौतिक सुख-साधनों और ऐश्वर्य की वृद्धि की कामना रखने वाले साधकों को इस दिन भैरव प्रतिमा के सम्मुख मिट्टी के पात्र में सरसों का तेल भरकर दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। दीप जलाते समय 'ऊँ ह्रीं बटुकाय आपद्उद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ऊँ' मंत्र का दो बार पाठ करते हुए अपने सुख-संसाधनों में वृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त जीवन में स्थायित्व लाने के लिए प्रातः स्नान के बाद भैरव बाबा को काले तिल अर्पित करें और घंटा अथवा घंटी बजाते हुए उपर्युक्त मंत्र का उच्चारण करके आरती व वंदना करें।

सुख-समृद्धि के लिए नागकेसर के वृक्ष का पूजन

जीवन में दीर्घकालिक समृद्धि बनाए रखने के लिए इस तिथि पर नागकेसर के वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा और वंदना का विधान है। यदि आसपास नागकेसर का जीवित वृक्ष उपलब्ध न हो, तो पंसारी की दुकान से उसकी सूखी लकड़ी का एक काष्ठ खंड अथवा सूखा फूल लाकर उसका नमन करें और कालाष्टमी के पूरे दिन उसे अपने पास रखें। अगले दिन सुबह स्नान के बाद उस पवित्र काष्ठ या पुष्प को किसी नदी अथवा बहते हुए स्वच्छ जल स्रोत में विसर्जित कर देना चाहिए। यह अनुष्ठान जीवन के दारिद्र्य को दूर कर सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है।

सवाल-जवाब

वर्ष 2026 में कार्तिक माह की कालाष्टमी किस तारीख को मनाई जाएगी?
वर्ष 2026 में कार्तिक मास की कालाष्टमी का व्रत और पूजन 2 नवंबर 2026 को किया जाएगा।
कालाष्टमी के दिन भगवान शिव के किस स्वरूप की विशेष उपासना की जाती है?
इस दिन भगवान शंकर के रौद्र स्वरूप काल भैरव की विशेष उपासना करने का शास्त्रीय विधान है।
व्यापार विस्तार के लिए भैरव मंदिर में उड़द की कितनी मात्रा चढ़ाई जाती है?
व्यापार को दूर-दराज के शहरों और विदेशों तक फैलाने के लिए सवा सौ ग्राम साबुत उड़द चढ़ाने का विधान है, जिसमें से 11 दाने तिजोरी में रखे जाते हैं।
भय से मुक्ति पाने के लिए काला धागा शरीर के किस अंग में बांधना चाहिए?
भैरव जी के चरणों में 5 मिनट अभिमंत्रित करने के बाद उस काले धागे को अपने दाएं पैर में बांधना चाहिए।
संतान की व्यापारिक समझ बढ़ाने के लिए मिट्टी की कितनी गोलियां बनाई जाती हैं?
शुद्ध मिट्टी से 27 छोटी गोलियां बनाई जाती हैं, जिन्हें संतान के हाथों से 27 दिनों तक पूजा घर में रखवाया जाता है।
घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए मौली में कितनी गांठें लगाई जाती हैं?
कलावा या मौली के धागे में मंत्र बोलते हुए सात गांठें लगाई जाती हैं और उसे मुख्य द्वार पर बांधा जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp