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उत्तराखंड के इस सुदूर इलाके में दशकों के इंतजार के बाद आखिरकार सड़क पहुंचने की जगी आसउत्तराखंड
30 अग॰ 2026, 4:45 pm (23 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड के इस सुदूर इलाके में दशकों के इंतजार के बाद आखिरकार सड़क पहुंचने की जगी आस

पिथौरागढ़ के सुदूर कनार गांव के निवासियों ने दशकों तक बुनियादी सड़क संपर्क के अभाव में कई चुनावों का बहिष्कार किया था। अब पहली बार इस दुर्गम क्षेत्र के लिए सर्वे पूरा होने से इलाके में मोटर मार्ग बनने की उम्मीद जग गई है।

देशभर में आधुनिक एक्सप्रेसवे और तेज गति वाले डिजिटल नेटवर्क का विस्तार हो रहा है, लेकिन उत्तराखंड के सीमांत पिथौरागढ़ जिले में एक ऐसा भी पर्वतीय इलाका है जहां के बाशिंदों को आज भी आवागमन के लिए लंबी दूरियां पैदल ही तय करनी पड़ती हैं। धारचूला तहसील के अंतर्गत आने वाले कनार गांव तक पहुंचने के लिए लगभग 18 किलोमीटर का जोखिम भरा और पथरीला रास्ता पार करना पड़ता है। देश को स्वतंत्र हुए 79 वर्ष पूरे होने को हैं, फिर भी यह आबादी आधुनिक परिवहन सुविधाओं से पूरी तरह वंचित बनी हुई है। हालांकि, लंबे संघर्ष के बाद अब इस बहुप्रतीक्षित मार्ग के निर्माण की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए गए हैं और प्रारंभिक सर्वेक्षण का कार्य सफलताપૂર્વक संपन्न कर लिया गया है।

दो हजार लोगों का जानलेवा संघर्ष और पैदल सफर

इस ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली लगभग दो हजार की आबादी के लिए यह कठिन पैदल मार्ग उनकी दैनिक जिंदगी की एक डरावनी अनिवार्यता बन चुका है। अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय लोगों को अपनी जान हथेली पर रखनी पड़ती है और खराब रास्तों के कारण पूर्व में कई ग्रामीण हादसों का शिकार होकर अपनी जान भी गंवा चुके हैं। यदि गांव में कोई व्यक्ति अचानक गंभीर रूप से बीमार हो जाए या किसी गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अस्पताल पहुंचाना पड़े, तो चारपाई या डोली ही एकमात्र विकल्प बचती है। शिक्षा ग्रहण करने वाले छोटे बच्चों को भी हर रोज इन्ही खतरनाक पगडंडियों से गुजरना पड़ता है। चुनावी प्रक्रिया के दौरान भी स्थिति इतनी गंभीर होती है कि मतदान दलों को वोटिंग की तारीख से तीन दिन पहले ही पैदल सफर शुरू करना पड़ता है।

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वन्यजीव अभयारण्य का अड़चन और प्रशासनिक प्रयास

बुनियादी सुविधाओं की इस भारी कमी से उपजे आक्रोश के चलते यहां के निवासियों ने लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत कड़ा रुख अपनाते हुए अब तक चार बार विधानसभा और दो बार लोकसभा चुनावों का पूर्ण बहिष्कार किया है। इस मार्ग के निर्माण में सबसे बड़ा अवरोध यह रहा है कि यह संपूर्ण भूभाग अस्कोट वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंतर्गत आता है, जिसके कारण वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से विधिवत अनुमति प्राप्त करना एक जटिल प्रक्रिया रही है। यह प्रस्तावित सड़क परियोजना लगभग 31 हेक्टेयर क्षेत्र में आकार लेगी। अब जिला प्रशासन और वन विभाग ने आपसी तालमेल से इस दिशा में सक्रियता बढ़ा दी है, जिससे इस अटके हुए काम के जल्द शुरू होने की उम्मीद है।

संयुक्त सर्वे और अधिकारियों की सक्रियता

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने इस पूरी प्रक्रिया पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना धारचूला और वन विभाग के माध्यम से प्रशासनिक कार्रवाई तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है। दोनों महकमों के अधिकारियों ने मिलकर संयुक्त रूप से मैदानी सर्वे का काम पूरा कर लिया है तथा मार्ग के संरेखण की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। तकनीकी अमला मौके पर पहुंचकर बारीकी से मुआयना कर रहा है ताकि प्रकृति और पर्यावरण के नियमों का पूरा पालन करते हुए निर्माण कार्य को गति दी जा सके।

गांव के लोगों की उम्मीदें और पर्यावरण का संकल्प

क्षेत्र के स्थानीय बाशिंदे मनोज परिहार ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क पहुंचने से गांव तक स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं आएंगी। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, 'सड़क पहुंचेगी तो गांव तक स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं आएंगी।' ग्रामीणों का मानना है कि इसके बाद ही उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने का वास्तविक अहसास होगा। पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने कहा कि यदि मार्ग निर्माण के दौरान पेड़ों की कटाई होती है, तो वे सरकार से यह वादा करते हैं कि तय संख्या से दस गुना अधिक यानी पचास हजार नए पौधे लगाएंगे।

सवाल-जवाब

कनार गांव उत्तराखंड के किस जिले में स्थित है?
कनार गांव उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील में स्थित है।
गांव तक पहुंचने के लिए कितना पैदल चलना पड़ता है?
गांव तक पहुंचने के लिए वर्तमान में 18 किलोमीटर का खतरनाक और पथरीला पैदल सफर तय करना पड़ता है।
कनार गांव की आबादी कितनी है?
कनार गांव की कुल आबादी लगभग दो हजार है।
गांव में सड़क न होने के कारण ग्रामीणों ने क्या कदम उठाया था?
सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने अब तक 4 विधानसभा और 2 लोकसभा चुनावों का बहिष्कार किया है।
सड़क निर्माण में सबसे बड़ा पेच क्या था?
यह पूरा इलाका अस्कोट वाइल्डलाइफ सेंचुरी के अंतर्गत आता है, जिसके कारण पर्यावरण मंजूरी मिलना सबसे बड़ी बाधा थी।
प्रस्तावित सड़क परियोजना कितने क्षेत्रफल में फैली है?
यह प्रस्तावित सड़क परियोजना करीब 31 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है।
वर्तमान में सड़क परियोजना को लेकर क्या प्रगति हुई है?
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और वन विभाग ने संयुक्त रूप से सर्वे का काम पूरा कर लिया है और रोड अलाइनमेंट की प्रक्रिया जारी है।
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी कौन हैं?
पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई हैं।
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