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उत्तराखंड के मियांवाला में पुराने सूखे जोहड़ की जगह तैयार हुआ जल सृष्टि पार्क, मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटनउत्तराखंड
19 सित॰ 2026, 1:09 pm (3 दिन पहले)· 1

उत्तराखंड के मियांवाला में पुराने सूखे जोहड़ की जगह तैयार हुआ जल सृष्टि पार्क, मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन

देहरादून के मियांवाला में वर्षों पुराने सूखे जोहड़ का कायाकल्प कर 8.64 करोड़ रुपये की लागत से जल सृष्टि पार्क का निर्माण किया गया है, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के मियांवाला इलाके में पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक नया सार्वजनिक स्थल तैयार किया गया है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण की देखरेख में निर्मित जल सृष्टि पार्क अब आम जनता और पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। लगभग 8.64 करोड़ रुपये के बजट से संवारे गए इस खूबसूरत पार्क का औपचारिक लोकार्पण शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया गया। यह नया परिसर न केवल स्थानीय आबादी के लिए सैर-सपाटे और विश्राम का साधन बनेगा, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी एक प्रेरक उदाहरण पेश करेगा।

दलदल और सूखे तालाब से आधुनिक हरित परिसर तक का सफर

जिस स्थान पर आज यह रमणीक पार्क खड़ा है, वहां कभी एक पारंपरिक जोहड़ हुआ करता था। समय के साथ यह जोहड़ सूखकर दलदल में बदल गया था और इसके इर्द-गिर्द आवासीय निर्माण बढ़ जाने से यह उपेक्षित पड़ा हुआ था। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने इस अनुपयोगी जगह को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया और इसे आधुनिक स्वरूप प्रदान किया। इलाके के पुराने बाशिंदों के अनुसार, दशकों पहले यहां बड़ा जल निकाय और घने पेड़ हुआ करते थे, जो आंधी-तूफानों में नष्ट हो गए थे। अब इसे एक व्यवस्थित और स्वच्छ वाटर बॉडी के रूप में ढालकर पर्यावरण की नई मिसाल कायम की गई है।

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मनोरंजन के साथ जल संरक्षण और शिक्षा का संगम

जल सृष्टि पार्क को केवल एक सामान्य सैरगाह के रूप में नहीं, बल्कि पर्यावरण अध्ययन केंद्र के रूप में भी संचालित किया जाएगा। परिसर के भीतर वर्षा जल संचयन यानी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और जल पुनर्चक्रण के व्यावहारिक मॉडल्स को प्रदर्शित किया गया है। इन तकनीकों के जरिए यहां आने वाले पर्यटकों और स्कूली विद्यार्थियों को पानी की प्रत्येक बूंद के संरक्षण का महत्व समझाया जाएगा। आने वाले दिनों में शैक्षणिक भ्रमण के जरिए छात्र-छात्राओं को जल संकट से निपटने और प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग की व्यावहारिक सीख दी जाएगी, जिससे देहरादून में पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा मिल सके।

सभी उम्र के नागरिकों के लिए खास व्यवस्थाएं

पार्क के आंतरिक ढांचे को सभी आयु वर्ग की जरूरतों के अनुकूल रूप दिया गया है। नन्हे बच्चों के मनोरंजन के लिए आधुनिक और पूरी तरह सुरक्षित प्ले-एरिया बनाया गया है। वरिष्ठ नागरिकों के आराम और शांतिपूर्ण बैठने के लिए विशेष रूप से शांत कोनों का निर्माण किया गया है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों के लिए लंबा वॉकिंग ट्रैक, जॉगिंग ट्रैक तथा ध्यान लगाने के लिए योगा डेक की व्यवस्था की गई है। आगंतुकों के खान-पान के लिए कैफे और शुद्ध पेयजल की चौबीसों घंटे सुविधा उपलब्ध कराई गई है। जलाशय में पर्यटकों के लिए पेडल बोटिंग का भी प्रबंध किया गया है, जबकि युवाओं की पसंद को ध्यान में रखकर आकर्षक सेल्फी प्वाइंट्स बनाए गए हैं।

दो हजार से अधिक पेड़-पौधों से बढ़ा ग्रीन कवर

प्राकृतिक हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूरे परिसर को घने ग्रीन कवर के तहत विकसित किया गया है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, पूरे जिले में पारंपरिक जल स्रोतों और पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार का अभियान चलाया जा रहा है, और मियांवाला का यह पार्क उसी कड़ी का हिस्सा है। पार्क के भीतर 2 हजार से अधिक विविध प्रजातियों के पेड़ और पौधे रोपे गए हैं। यहां आने वाले लोगों की जानकारी के लिए एक एजुकेशनल फ्लावर गार्डन भी बनाया गया है, जहां विभिन्न किस्मों की घास और वनस्पतियों के औषधीय व वानस्पतिक विवरण पोस्टरों के माध्यम से समझाए गए हैं।

जनप्रतिनिधियों के प्रयासों की स्थानीय स्तर पर सराहना

इस विकास कार्य के पूरा होने पर क्षेत्रवासियों ने राहत और खुशी जताई है। बचपन से इस तालाब के पास रहे स्थानीय निवासी मोहन सिंह रावत ने इलाके के कायाकल्प पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पहले जहां गंदगी और कीचड़ भरा रहता था, वहां अब बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहतरीन सुविधाएं मौजूद हैं। स्थानीय निवासियों ने इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए क्षेत्रीय विधायक उमेश कुमार काऊ, स्थानीय पार्षद तथा मेयर सौरभ थपलियाल के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि यह पार्क अब देहरादून का प्रमुख दर्शनीय स्थल बनकर उभरेगा।

सवाल-जवाब

जल सृष्टि पार्क कहां स्थित है और इसका उद्घाटन किसने किया?
यह पार्क उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के मियांवाला क्षेत्र में स्थित है, जिसका लोकार्पण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया।
इस पार्क के निर्माण में कुल कितनी लागत आई है?
जल सृष्टि पार्क को मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा 8.64 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है।
इस पार्क में आगंतुकों और बच्चों के लिए क्या-क्या प्रमुख सुविधाएं हैं?
पार्क में बच्चों के लिए आधुनिक प्ले-एरिया, पेडल बोटिंग, जॉगिंग ट्रैक, योगा डेक, सेल्फी प्वाइंट्स, कैफे और साफ पेयजल की सुविधाएं मौजूद हैं।
पार्क में जल संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा से जुड़े क्या प्रबंध किए गए हैं?
परिसर में वर्षा जल संचयन और रीसाइक्लिंग मॉडल प्रदर्शित किए गए हैं, साथ ही 2 हजार से अधिक पेड़-पौधे और जानकारियों से युक्त एजुकेशनल फ्लावर गार्डन बनाया गया है।
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टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·2 दिन पहले

उत्तराखंड में 8.64 करोड़ रुपये की लागत से बने जल सृष्टि पार्क का यह प्रोजेक्ट शहरी विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधने का एक बेहतरीन मॉडल है। सूखे जोहड़ को पुनर्जीवित कर वाटर बॉडी और रेन वॉटर हार्वेस्टिंग मॉडल विकसित करने से न केवल भूजल स्तर को सुधारने में मदद मिलेगी, बल्कि यह पर्यावरण अध्ययन केंद्र के रूप में आने वाली पीढ़ी को जल संकट से निपटने के लिए व्यावहारिक रूप से भी तैयार करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

मियांवाला में 8.64 करोड़ रुपये की लागत से बने 'जल सृष्टि पार्क' का उद्घाटन केवल शहरी सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि राज्य में इको-गवर्नेंस और भू-जल पुनर्भरण की नीति का एक व्यावहारिक मॉडल है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा सूखे जोहड़ को वाटर बॉडी में बदलना यह साबित करता है कि स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं का संतुलन कैसे साधा जा सकता है। आने वाले समय में ऐसे भू-राजनीतिक और पर्यावरणीय दबाव वाले शहरी क्षेत्रों में इस तरह के विकेंद्रीकृत जल प्रबंधन और शैक्षणिक पार्क शासन की कार्यकुशलता और नीतिगत प्राथमिकताओं की दिशा तय करेंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

मियांवाला के इस प्रोजेक्ट का वित्तीय और आर्थिक पक्ष यह रेखांकित करता है कि 8.64 करोड़ रुपये का यह निवेश मात्र बुनियादी ढांचे का विकास नहीं है, बल्कि शहरी अचल संपत्ति के मूल्यांकन और पर्यावरण-पर्यटन के लिहाज से एक दूरदर्शी कदम है। इस प्रकार के हरित निवेश लंबी अवधि में स्थानीय व्यापार, आतिथ्य क्षेत्र और रियल एस्टेट सेक्टर को सकारात्मक आर्थिक गति प्रदान करते हैं, साथ ही जलवायु परिवर्तन के वित्तीय जोखिमों को कम करते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

यह परियोजना पर्यावरण सुधार के साथ-साथ शहरी इलाकों में सार्वजनिक भूमि के उपयोग और जल संरक्षण की प्रशासनिक इच्छाशक्ति को दर्शाती है। हालांकि, 8.64 करोड़ रुपये की लागत वाले इस पार्क के दीर्घावधि रखरखाव, जल निकाय में पानी के निरंतर स्रोतों को बनाए रखने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की कार्यक्षमता की नियमित मॉनिटरिंग ही इसकी सफलता तय करेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

यह पहल सराहनीय है, लेकिन शहरी पुनरुद्धार योजनाओं में सबसे बड़ी चुनौती जल निकायों के दीर्घकालिक रख-रखाव और भूजल स्तर को प्राकृतिक रूप से रीचार्ज करने की होती है। केवल मानसून के पानी पर निर्भर रहने के बजाय यदि स्थानीय जलस्रोतों के संवर्धन और वाटर ट्रीटमेंट की ठोस नीति नहीं अपनाई गई, तो यह सुंदर ढांचा भविष्य में फिर से जल संकट का शिकार हो सकता है।

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