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वेस्ट डेनिम को नया जीवन देकर उदयपुर की शालिनी मालवीय ने दिल्ली हाट परिसर में बिखेरी पारंपरिक हस्तशिल्प की चमकराजस्थान
3 सित॰ 2026, 9:00 am (22 दिन पहले)· 4

वेस्ट डेनिम को नया जीवन देकर उदयपुर की शालिनी मालवीय ने दिल्ली हाट परिसर में बिखेरी पारंपरिक हस्तशिल्प की चमक

उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की फैशन शोधार्थी शालिनी मालवीय ने दिल्ली हाट में पुरानी जींस से बने रीसाइकल्ड उत्पादों और हाथ की कढ़ाई वाले रूमाल का सफल प्रदर्शन किया। वस्त्र मंत्रालय की पहल पर चुने गए इस संग्रह को देशी और विदेशी पर्यटकों से सरहाना और अग्रिम ऑर्डर मिले।

राष्ट्रीय राजधानी स्थित दिल्ली हाट परिसर में उदयपुर की फैशन शोधार्थी और प्रतिभाशाली डिजाइनर शालिनी मालवीय के हस्तनिर्मित तथा पर्यावरण-अनुकूल संग्रह ने बड़ी संख्या में आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित किया। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के फैशन टेक्नोलॉजी एंड डिजाइनिंग विभाग से संबद्ध शालिनी ने अपनी विशिष्ट कलात्मक सोच का परिचय देते हुए पारंपरिक भारतीय हाथ की कढ़ाई और रीसाइक्ल्ड डेनिम फैब्रिक से तैयार किए गए टिकाऊ उत्पादों को प्रदर्शित किया। उनके इस आकर्षक स्टॉल पर देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे कला प्रेमियों के अलावा अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की भी भारी भीड़ देखी गई। स्टॉल पर आए आगंतुकों ने पुरानी जींस के नवीन प्रयोग और सूती कपड़े पर उकेरी गई बारीक कसीदाकारी की खूब सराहना की। कई देशी और विदेशी खरीदारों ने मौके पर ही इन अनोखी वस्तुओं की खरीदारी की, जबकि कई अन्य लोगों ने अपनी विशेष पसंद और भविष्य की जरूरतों के लिए अग्रिम ऑर्डर भी दर्ज कराए। यह पूरी पहल पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प को सहेजने और आधुनिक समाज में टिकाऊ फैशन की अवधारणा को लोकप्रिय बनाने की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरी है।

पारंपरिक कसीदाकारी और अपसाइक्ल्ड डेनिम का सुंदर समन्वय

दिल्ली हाट में लगाए गए स्टॉल पर शालिनी मालवीय ने सुई-धागे के पारंपरिक हुनर और आधुनिक जीवन शैली की जरूरतों का एक बेहद खूबसूरत तालमेल प्रस्तुत किया। एक दौर में हर भारतीय घर की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर रहे हाथ से कढ़े रूमाल और नैपकिन को उन्होंने नए पैटर्न, आकर्षक रंगों और समकालीन डिजाइनों के साथ पुनर्जीवित किया है। इन रूमालों पर पारंपरिक कढ़ाई की प्रामाणिक छाप के साथ-साथ एक व्यक्तिगत स्पर्श देखने को मिलता है, जिसने युवा खरीदारों और विदेशी सैलानियों को विशेष रूप से आकर्षित किया। इसके साथ ही, अनुपयोगी समझकर फेंक दी जाने वाली पुरानी जींस को नया जीवन प्रदान करते हुए उन्होंने बहुउपयोगी बैग, कपड़े के मजबूत थैले, घर के लिए सजावटी सामान और दैनिक दिनचर्या में काम आने वाली कई अन्य टिकाऊ वस्तुएं तैयार की हैं। मजबूत डेनिम कपड़े और सुई-धागे की कला के इस संगम ने प्रदर्शनी में आए प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित किया।

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पर्यावरण संरक्षण और वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन पर बल

इस पूरे रचनात्मक कार्य के माध्यम से शालिनी ने केवल फैशनेबल सामान तैयार करने का प्रयास नहीं किया है, बल्कि समाज को पर्यावरण सुरक्षा और वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन का एक ठोस संदेश भी दिया है। उनका स्पष्ट मानना है कि फैशन और डिजाइन का दायरा केवल नई सामग्री का उपयोग करके कपड़े या सामान बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके विपरीत, इस्तेमाल हो चुके कपड़ों और पुराने संसाधनों का रचनात्मक एवं कलात्मक ढंग से पुनर्चक्रण करके भी आकर्षक, मजबूत और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। पुरानी जींस को रीसाइकिल करके बनाए गए ये उत्पाद इसी प्रगतिशील सोच का ज्वलंत प्रमाण हैं। इस तरह की कोशिशों से एक तरफ जहां लैंडफिल में जमा होने वाले टेक्सटाइल वेस्ट यानी कपड़ों के कचरे को कम करने में मदद मिलती है, वहीं दूसरी तरफ आम लोगों के बीच संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ जीवन शैली के प्रति जागरूकता भी बढ़ती है।

देशी-विदेशी पर्यटकों की प्रतिक्रिया और व्यावसायिक संभावनाएं

प्रदर्शनी के दौरान शालिनी मालवीय के स्टॉल पर लगातार लोगों की चहल-पहल बनी रही। भारत के विभिन्न हिस्सों से आए सैलानियों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों ने भी हाथ से कढ़ाई किए गए नैपकिन और रीसाइक्ल्ड डेनिम बैग के फिनिशिंग की प्रशंसा की। कई आगंतुकों ने इन हस्तनिर्मित वस्तुओं को अपने निजी इस्तेमाल तथा अपनों को उपहार देने के लिए खरीदा। वहीं, कुछ व्यवसायियों और डिजाइन प्रेमियों ने भविष्य की व्यावसायिक आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर ऑर्डर दिए। हस्तशिल्प और अपसाइक्लिंग के इस सफल मेल ने यह साबित कर दिया है कि यदि पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक ग्राहकों की मांग के अनुसार ढाला जाए, तो यह न केवल पर्यावरण के लिए लाभकारी है बल्कि व्यावसायिक दृष्टि से भी एक टिकाऊ और सफल मॉडल साबित हो सकता है।

मंत्रालय की चयन प्रक्रिया और राष्ट्रीय मंच का महत्व

मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के फैशन टेक्नोलॉजी एंड डिजाइनिंग विभाग की प्रभारी अध्यक्ष डॉ. डॉली मोगरा ने विश्वविद्यालय की छात्रा की इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। डॉ. मोगरा ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "दिल्ली हाट देश भर के लोगों के सामने युवा डिजाइनरों को अपनी कला प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।" उन्होंने आगे बताया कि वस्त्र मंत्रालय के हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय के माध्यम से आयुक्त महेंद्र सिंह मीणा के सहयोग से इस राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी के लिए विद्यार्थियों का चयन किया गया था। इस प्रतिष्ठित मंच ने युवा डिजाइनरों को अपने रचनात्मक कार्यों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने का एक बेहतरीन मौका प्रदान किया। इसके साथ ही, विद्यार्थियों को उपभोक्ताओं की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया प्राप्त करने, बाजार की बदलती पसंद को गहराई से समझने और अपने व्यावसायिक कौशल को निखारने का भी अमूल्य व्यावहारिक अनुभव मिला।

सवाल-जवाब

शालिनी मालवीय किस विश्वविद्यालय और विभाग से जुड़ी हैं?
शालिनी मालवीय उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के फैशन टेक्नोलॉजी एंड डिजाइनिंग विभाग से जुड़ी हैं।
शालिनी मालवीय ने दिल्ली हाट में किन उत्पादों का प्रदर्शन किया?
उन्होंने हाथ से कढ़ाई किए हुए रूमाल और नैपकिन के अलावा पुरानी जींस को रीसाइकिल कर बनाए गए बैग, सजावटी सामान और दैनिक उपयोग की वस्तुएं प्रदर्शित कीं।
दिल्ली हाट में विद्यार्थियों का चयन किस प्रक्रिया के तहत हुआ?
विद्यार्थियों का चयन वस्त्र मंत्रालय के हस्तशिल्प विकास आयुक्त कार्यालय की ओर से आयुक्त महेंद्र सिंह मीणा के माध्यम से किया गया।
इस पहल के संबंध में विभाग प्रमुख डॉ. डॉली मोगरा का क्या कहना था?
प्रभारी अध्यक्ष डॉ. डॉली मोगरा ने कहा कि दिल्ली हाट देश भर से आने वाले पर्यटकों के सामने युवा कारीगरों को अपनी कला प्रदर्शित करने और बाजार का रुझान समझने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
शालिनी मालवीय के उत्पादों को पर्यटकों की कैसी प्रतिक्रिया मिली?
देशी और विदेशी पर्यटकों ने उत्पादों की खूब सराहना की, मौके पर खरीदारी की और भविष्य के लिए नए ऑर्डर भी दिए।
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