क्या है e-Forensics 2.0?
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए e-Forensics 2.0 ऐप की जानकारी साझा की। उनके अनुसार यह ऐप फॉरेंसिक लैबोरेटरीज, जांच एजेंसियों और अदालतों के बीच एक मजबूत डिजिटल पुल की भूमिका निभाएगा। यह पहल देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में तकनीक के जरिए बड़ा बदलाव लाने की कोशिश मानी जा रही है।
रियल-टाइम में पहुंचेगा वैज्ञानिक सबूत
इस ऐप की सबसे अहम खासियत यह है कि जांच के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्यों का रियल-टाइम में इस्तेमाल किया जा सकेगा। सभी संबंधित पक्षों के बीच सूचनाओं का प्रवाह तत्काल होगा, जिससे जांच एजेंसियों को फॉरेंसिक रिपोर्ट के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह व्यवस्था पूरी जांच प्रक्रिया को ज्यादा सटीक और तेज बनाएगी।
देरी कम करना है मकसद
अमित शाह ने बताया कि e-Forensics 2.0 के जरिए सभी पक्षों को आपस में जोड़कर मामलों में होने वाली देरी को कम किया जाएगा। फॉरेंसिक लैब से निकली रिपोर्ट अदालत तक पहुंचने में अब तक जो वक्त लगता था, वह इस ऐप से काफी घट सकता है। इससे न सिर्फ जांच बल्कि अदालती कार्यवाही भी तेज होगी।
जनता की प्रतिक्रिया
इस पोस्ट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई यूजर्स ने फॉरेंसिक तंत्र को डिजिटल और आधुनिक बनाने की इस पहल को सराहा, जबकि कुछ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह ऐप जमीनी स्तर पर उतना ही प्रभावी साबित होगा जितना दावा किया जा रहा है।













