असत्य पर सत्य की विजय और धर्म के प्रतीक के रूप में मनाए जाने वाले पावन पर्व विजयादशमी के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में विशेष अनुष्ठान संपन्न किया। इस दौरान उन्होंने गोरखपुर स्थित प्रसिद्ध गोरक्षनाथ मंदिर परिसर में विधि-विधान के साथ अनुष्ठान करते हुए लोकमंगल और जनकल्याण की कामना की। त्योहार के इस उल्लासपूर्ण माहौल में देश भर के प्रमुख नेताओं ने भी जनता को बधाई देते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
गोरखपुर में हुआ प्रभु श्रीराम के स्वरूपों का अर्चन
विजयादशमी के इस पवित्र अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में प्रभु श्री राम, माता जानकी और भगवान श्री लक्ष्मण के प्रतीक स्वरूपों का पूजन-अर्चन किया। इस पारंपरिक अनुष्ठान के माध्यम से उन्होंने लोक कल्याण की कामना की और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करने का संदेश दिया। इस अवसर पर समाज के विभिन्न वर्गों और देश के अन्य हिस्सों में भी पारंपरिक शस्त्र पूजन और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला देखने को मिला।
देशभर में विजयादशमी की धूम और नेताओं के संदेश
विजयादशमी के पावन पर्व पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और नागरिकों से एक विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देने का आग्रह किया। विभिन्न राज्यों में नेताओं ने असत्य और अन्याय पर सत्य की विजय के इस संदेश को दोहराते हुए धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। गुजरात के जामनगर में मंत्री रीवाबा जादा ने क्षत्रिय समाज के साथ पारंपरिक शस्त्र पूजन में हिस्सा लिया, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी लोगों ने इस महापर्व को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया।
गोरखपुर के बारे में
उत्तर प्रदेश का गोरखपुर एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र है जो अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। इसकी सीमाएं पूर्व में देवरिया एवं कुशीनगर, पश्चिम में संत कबीर नगर, उत्तर में महराजगंज एवं सिद्धार्थनगर तथा दक्षिण में मऊ, आज़मगढ़ तथा अम्बेडकर नगर जिलों से लगती हैं। यह शहर अपनी सांस्कृतिक विरासत और गोरक्षनाथ मंदिर के कारण विशेष पहचान रखता है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस पावन पर्व से जुड़े आयोजनों को लेकर आम जनता ने भी अपनी गहरी आस्था और शुभकामनाएं साझा कीं। कई नागरिकों ने इस अवसर पर शुभकामना संदेशों के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी और पर्व के पारंपरिक महत्व की सराहना की।


























