मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों की लामबंदी के बीच अब आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी खुलकर मोर्चा खोल दिया है। देश भर में विपक्षी गठबंधन द्वारा चुनाव आयोग के खिलाफ चलाए जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच उन्होंने आयोग के कामकाज और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दल एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं।
अरविंद केजरीवाल ने क्या कहा
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि पूरा देश एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद छोड़ने की मांग कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों से एसआईआर के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और फर्जी नाम जोड़कर चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा रहा है। केजरीवाल ने कहा,
"मैं देश में वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन का समर्थन करता हूं।"उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर लोकतंत्र का मजाक उड़ाने का आरोप लगाते हुए देशव्यापी अभियान के साथ खड़े होने की बात कही।
विपक्ष की लामबंदी और महाभियोग की तैयारी
चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी गठबंधन ने रणनीतिक रूप से दबाव बढ़ा दिया है। तृणमूल कांग्रेस नेता ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से चर्चा की है और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संसद में महाभियोग नोटिस लाने की तैयारी चल रही है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल में सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचाने के लिए एसआईआर का सहारा लिया गया है और जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त पद से नहीं हटते, तब तक विरोध जारी रहेगा। 30 सितंबर को विपक्षी गठबंधन की बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी स्पष्ट कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पद से हटना होगा।
सड़कों पर विरोध और आगे की रणनीति
यह विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर भी नजर आ रहा है। बिहार में दीपांकर भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। वहीं शरद पवार की पार्टी ने पूरे घटनाक्रम पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। द्रमुक ने भी इस मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। उत्तराखंड समेत कई राज्यों में 2 अक्टूबर से व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए गए हैं, जबकि 7 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन के वरिष्ठ नेता दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय के बाहर बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रहे हैं। पूर्व गृह सचिव आरके सिंह ने भी एसआईआर व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की है।
जनता की प्रतिक्रिया
केजरीवाल के इस बयान पर इंटरनेट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई उपयोगकर्ताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की मांग का समर्थन किया, वहीं कई अन्य ने सवाल उठाया कि जब यही आयोग पहले चुनाव कराता रहा है तब आपत्तियां क्यों नहीं उठाई गईं।



























